HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

कौन होंगे मोदी के पांच प्रमुख मंत्री?

24 May 2019
किसे देंगे मोदी पांच प्रमुख मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी?
 
MAY 24 (WTN) –
एक बार फ़िर से देश में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे के सामने सम्पूर्ण विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा है। अब जबकि एक बार फ़िर से मोदी सरकार शपथ ग्रहण के लिए तैयार है, तो ऐसे में चर्चाएं शुरु हो गई हैं कि मोदी सरकार में पांच प्रमुख मंत्रालयों के ज़िम्मेदारी मोदी किसे देंगे। गृह, विदेश, वित्त, रक्षा और रेल ये पांचों सबसे प्रमुख मंत्रालय माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के सामने इस बार थोड़ी परेशानी हो सकती है कि वे इन महत्वपूर्ण मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी किसे सौंपे।
 
सबसे पहले बात करें गृह मंत्रालय की, तो इस समय राजनाथ सिंह देश के गृह मंत्री है। चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी के क़रीबी और गांधी नगर सीट से भारी मतों से जीतने वाले अमित शाह को मोदी गृह मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दे सकते हैं। वैसे राजनाथ सिंह भाजपा के काफ़ी वरिष्ठ मंत्री हैं और लखनऊ से अच्छे अंतर से जीत हासिल करके चुनाव जीते हैं। गौरतलब है कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अमित शाह उनकी सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं। इसलिए चर्चाएं जोरों पर हैं कि अमित शाह, नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में देश के गृह मंत्री बन सकते हैं। यदि अमित शाह देश के गृह मंत्री बनते हैं, तो फ़िर राजनाथ सिंह को रक्षा या फ़िर रेल मंत्रालय की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी मिल सकती है।

अब बात करें विदेश मंत्रालय की तो सुषमा स्वराज इस समय विदेश मंत्री हैं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। जिस तरह से मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय को सफलतापूर्वक चलाया है, कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी एक बार फ़िर से सुषमा स्वराज पर विश्वास जताते हुए उन्हें विदेश मंत्रालय का प्रभार देंगे। यदि स्वास्थ्य कारणों से सुषमा स्वराज विदेश मंत्री नहीं बनती हैं, तो फ़िर कयास लगाए जा रहे हैं कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण या फ़िर केन्द्रीय मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह को विदेश मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी इस बार वित्त मंत्री की ज़िम्मेदारी एक बार फ़िर से अरुण जेटली को देते हैं कि नहीं यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जेटली, मोदी के काफ़ी क़रीबी रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के समय तमाम जटिल परिस्थितियों का जिस दिलेरी से सामना जेटली ने किया था, हो सकता है कि इसका ईनाम उन्हें मिले और मोदी उन्हें एक बार फ़िर से वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपे। वैसे अरुण जेटली की बीमारी के समय पीयूष गोयल ने जिस ज़िम्मेदारी से वित्त मंत्रालय का कार्यभार सम्भाला था, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि जेटली के स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए गोयल को वित्त मंत्रालय का प्रभार मिल सकता है।

अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्मला सीतारमण को देश की रक्षा मंत्री बना कर सभी को चौका दिया था। जिस बखूबी से सीतारमण ने कथित राफेल घोटाले पर सरकार का पक्ष रखा और विपक्ष को करारा जवाब दिया, उससे तय है कि प्रधानमंत्री मोदी एक बार फ़िर से रक्षा मंत्रालय की अहम ज़िम्मेदारी निर्मला सीतारमण को दे सकते हैं। वहीं यदि सुषमा स्वराज विदेश मंत्री नहीं बनीं, तो निर्मला सीतारमण को विदेश मंत्रालय दिया जा सकता है। इस परिस्थिति में राजनाथ सिंह या फिर जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह को रक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मिल सकती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय पीयूष गोयल रेल मंत्री हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी उनके काम से काफ़ी खुश भी हैं। यानी कि तय है कि पीयूष गोयल एक बार फ़िर से देश के रेल मंत्री बन सकते हैं। लेकिन यदि अरुण जेटली की जगह पर पीयूष गोयल को वित्त मंत्री बनाया गया, तो राजनाथ सिंह या फ़िर स्मृति ईरानी को रेल मंत्रालय की अहम ज़िम्मेदारी मिल सकती है। राहुल गांधी को अमेठी से परास्त करने के बाद तय है कि स्मृति ईरानी को कोई बड़ा मंत्रालय प्रधानमंत्री देंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी 30 मई को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। अब देखना होगा कि पांच प्रमुख मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी मोदी किसे सौपते हैं। आने वाले पांच साल भाजपा के लिए काफ़ी चुनौती भरे होने वाले हैं, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव में राज्यों में भाजपा सरकारों की परीक्षा होना है। ऐसे में प्रधानमंत्र मोदी इन पांच प्रमुख मंत्रालयों को अपने पांच सबसे क़रीबी नेताओं को देकर उनसे बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद करेंगे।