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अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी बदलकर रख देंगे देश की अर्थव्यवस्था!

24 May 2019
आने वाले 5 सालों में अगले 25 सालों तक की आर्थिक वृद्धि की ज़मीन तैयार करेंगे मोदी!

MAY 24 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत के काफ़ी मायने हैं। भारत के लोकसभा चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुईं थी। अब जबकि मोदी एक बार फ़िर से भारत के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, तो ऐसे में अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि मोदी आने वाले पांच सालों में अगले 25 साल तक की आर्थिक वृद्धि की ज़मीन तैयार कर देंगे।

अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़ेगा। इसी के साथ साथ देश की आर्थिक वृद्धि दर बढ़ेगी और युवाओं के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। मोदी सरकार की नीतियों के कारण ही बेहतरीन व्यापारिक वातावरण भारत में निर्मित होगा और इसके कारण विदेशी निवेश में वृद्धि होगी।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी भाजपा के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है, ऐसे में पार्टी के लिए विधायी सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाने में संसदीय दिक्कतें सामने आ सकती हैं। पर चुनौतियों के बावजूद मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक है। एक शोध के मुताबिक़, 2019-23 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वार्षिक वृद्धि दर औसत सात प्रतिशत रहने की उम्मीद है। मोदी के कुशल नेतृत्व में ही भारत साल 2019 में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिसके बाद भारत की जीडीपी 3,000 अरब डॉलर को पार कर जाएगी।
 
मोदी के नेतृत्व में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनते ही भारत, ब्रिटेन को पीछे कर देगा। वहीं साल 2025 तक भारत जापान को भी पछाड़ देगा, और भारत चीन के बाद एशिया प्रशांत क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। लेकिन अर्थशास्त्र के जानकारों ने मोदी सरकार को सलाह दी है कि नई सरकार को मौजूदा वृद्धि की रफ़्तार को रोकने वाली चुनौतियों से निपटना होगा।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उम्मीद की जा रही है कि नयी सरकार कई प्रमुख क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों पर काफ़ी ध्यान देगी। मोदी सरकार को कृषि और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। जहां मोदी सरकार को कृषि क्षेत्र में भूमि की पारदर्शी नीलामी और रिकॉर्डों के डिजिटलीकरण पर खासा ध्यान देने की ज़रूरत है, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में और तेज़ी से निजीकरण और सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से ना केवल राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी बल्कि सरकारी बैंकों की दक्षता भी बढ़ाई जा सकेगी।

वहीं मोदी सरकार हो सकता है कि जीएसटी का विस्तार करते हुए इसके दायरे में रीयल एस्टेट, ईंधन उत्पाद, तम्बाकू और शराब उत्पादों को लेकर आए। मोदी सरकार यदि ऐसा करने में सफल रहती है तो कहा जा सकता है कि एक देश एक टैक्स की दिशा में यह सबसे बड़ा और बेहतरीन कदम होगा।

मोदी सरकार को अपने दूसरे कार्यकाल में और भी ज़्यादा प्रचण्ड बहुमत मिला है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि मोदी सरकार आर्थिक सुधारों की दिशा में पहले कार्यकाल की तुलना में और भी ज़्यादा कड़े फ़ैसले ले सकती है। यदि ऐसा होता है तो इससे देश की जीडीपी में वृद्धि होगी और राजकोषीय अनुशासन बढ़ेगा। अब देखते हैं कि मोदी सरकार अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था को कहां से कहां ले जाती है।