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मानव संग्रहालय में मणिपुर से आये कलाकारों ने 'क्ले माडलिंग एवं ड्राय फ्लॉवर्स' से कलाकृतियां बनाने का दिया प्रशिक्षण

25 May 2019

भोपाल २४ मई (WTN): इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित करो औरा सीखों ‘‘संग्रहालय शैक्षिणक कार्यक्रम के अंतर्गत मणीपुर के क्ले माडलिंग कार्यशाला में 64 पंजीकृत प्रतिभागियों को प्रषिक्षण देने आए पारंपरिक कलाकार  के. जोतीन,  एम. नोबीन, प्रेमनाथ अधिकारी, रोमेश और जेक्सन मे से के जोतीन कुमार ने प्रतिभागियों को बताया कि क्ले मांडलिंग के लिए मिट्टी हम लोग खेत से या नदी के किनारे से प्राप्त कर उसे बड़े टब में 3-4 दिन तक डुबा कर रख देते है, तत्पश्चात इसका पानी फेंक कर मिट्टी को साफ पानी में घोल दते है तथा कपडें की सहायता से इसे छानते है। यह प्रक्रिया 3-4 बार की जाती है। मिट्टी के घोल से अशुद्धियाँ निकल जाने पर इस छनी हुई मिट्टी के घोल को आधे दिन तक ढककर रख देते है जिससे मिट्टी तली में बैठ जाती है उपर का पानी फेंक देते है और तली में बैठी मिट्टी को कपड़े या चौड़े आकार के परात में उडेल कर उपर से कपड़े से ढ़क कर सुखने के लिए रख देते है। जब मिट्टी कड़ापन आ जाता है तो फिर इसे आटे जैसे गुथ लेते है इस प्रकार क्ले मॉडलिंग के लिए मिट्टी तैयार करते है।



एम. नोबीन, ने बताया कि जोभी आकृति मिट्टी से बनानी है इस हेतु एक चाकौर पॉलीथिन लेते है उसके उपर मिट्टी को रखकर हाथ से मनचाहा आकृति का निर्माण करते है। निर्माण प्रक्रिया में मिट्टी जल्दी न सूखे इस कारण उसे आवश्यकतानुसार उसे पॉलीथिन से ढंक देते है ताकि मिट्टी को आकृति प्रदान करने में सहुलियत होती है। आकृति बनने के बाद पहले उसे आधी धुप/आधी छांव में सुखाते है। इस तरह से जब आकृति पुरी तरह से सुख जाये इसमें दरार आदि न पड़े इसका ध्यान रखा जाता है।

प्रेमनाथ अधिकारी ने बताया कि आकृति तैयार हो जाने के बाद पकाने के के पहले इसके उपर गेरू मिट्टी सें रंगते है जो पकने के बाद पक्के रंग में परिवर्तित हो जाता है और काले रंग हेतु कुही की छाल के (पौधे के छाल को पानी में उबालकर प्राप्त) पानी में आकृति को भिगोते है फिर धूप में सुखाते है, अच्छी तरह से सुख जाने के बाद उसे पुनः आग में पकाते है जिससे आकृति पकने के बाद काली एवं चमकदार दिखती है।



रोमेश के अनुसार, मिट्टी के चयन के लिए वे अपने विरासत में मिले हुए पारंपरिक तरीकों एवं बर्तन के निर्माण में स्थानीय लकड़ी, बांस और बेंत से निर्मित उपकरणों का उपयोग करते है। यहां पर बर्तनों को उनके आकारों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। प्राचीन समय में इन बर्तनों का उपयोग मुख्य रूप से खाना पकाने, भंडारण, देशी चावल से बियर बनाने आदि के लिए उपयोग किया जाता था। किंतु आज इनका उपयोग फूलदान, सजावट के वस्तु आदि रूपों में किया जा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के आधार पर मिट्टी का बर्तन को मां की कोख का प्रतीक माना जाता है। इसीकारण मणीपुर के हर अनुष्ठानिक क्रियाकलापों में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। आमतौर पर यहां बर्तनों को बेचा नहीं जाता, बल्कि वस्तु विनिमय प्रणाली में सामानों के रूप में इनका आदान-प्रदान किया जाता था। पर वर्तमान में ये बर्तन बेचे जा रहे है।


सूखे पत्ते से फूल बनाने वाली पारंपरिक तकनीक से कराया प्रतिभागियों को अवगत



मणीपुर के सेनापति जिला के ग्राम माओं से आयी सूखे पत्ते से फूल बनाने वाली पारंपरिक कलाकार एन. चचेअ माओं ने पंजीकृत प्रतिभागियों को ड्राय फ्लावर आर्ट बनाने की पारंपरिक तकनीक के बारे में बताते हुए कहा कि बिना किसी सहायता से  वे जब 6 वर्ष की थी तब से इसप्रकार के फूल बनाने का कार्य करना प्रारंभ किया था। जो आज मणिपुर और उत्तरपूर्वी राज्यों में एक लोकप्रिय कला के रूप में प्रचारित हो गया है। प्रारंभ में इसे लोग घर को सजाने आदि के लिए लेते थे पर समय के साथ अब यह विवाह समारोह, पार्टियाँ, सेमिनार, वार्षिक उत्सव में सजाने आदि के लिए उपयोग किया जा रहा है। सभी पुष्प स्थानीय पहाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करते है और मक्का तथा बांस घर के बाड़ी में उगाते है।





सूखे फूलों से वस्तु निर्माण के लिए वे पाइन की लकड़ी, जंगली शैवाल, बांस के फूल, मोती एवं सदाबहार फूलों का उपयोग किया जाता है। इन वस्तुओ को सब्जियों और फलों के रस से रंग जाता है इसके साथ ही फ़ेविकोल, कैंची, पुष्प टेप, मार्कर पेन सेफ्टी पिन आदि का उपयोग करते है। संग्रहालय में मक्का के पत्ती, बीज एवं अंदरूनी तना से गुडिया बनाना सिखा रहे है। गुडिया के बाल के लिए मक्का का रेशा एवं कपडे के लिए मक्का के बाहरी पत्तिनुमा आवरण को आवश्यकतानुसार कैंची के काटकर आकृति प्रदान करते है। तत्पश्चात शरीर के लिए मक्के का बीज निकला हुआ भाग (भुट्टे) से शरीर का सिर, पेट एवं पैर बनाया जाता है। तत्पश्चात प्राकृतिक रंगों से आँख, नाक, मुंह, कान बनाते है, एक गुडिया को बन्ने में 3से 4 घंटे लगते है।- Window To News