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शपथ ग्रहण में नरेन्द्र मोदी की ‘प्रतीकात्मक कूटनीति’!

28 May 2019
शपथ ग्रहण में कूटनीति से नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान और चीन को एक साथ देंगे सन्देश!

MAY 28 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत हासिल करने के बाद नरेन्द्र मोदी एक बार फ़िर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। 30 मई, गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में होने जा रहा शपथ ग्रहण समारोह अपने आप में काफ़ी ख़ास होने जा रहा है। इस शपथ ग्रहण समारोह में मोदी बेहतरीन कूटनीति का प्रयोग कर रहे हैं। क्या है ये कूटनीति और इसका कैसा प्रयोग मोदी करने जा रहे हैं? आइये आपको बताते हैं।

2014 में अपने पहले कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने सार्क देशों के प्रमुखों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया था। लेकिन इस बार मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में BIMSTEC देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है। BIMSTEC देशों के प्रमुखों को आमंत्रित कर मोदी ने कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान और चीन को सन्देश देने की कोशिश की है।

अपने शपथ ग्रहण समारोह में मोदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को आमंत्रित ना करके सन्देश दिया है कि पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को माफ़ नहीं किया है और अभी भी भारत की पाकिस्तान से नाराज़गी है। 2014 में अपने पहले कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में मोदी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को आमंत्रित किया था, लेकिन इस बार मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को इग्नोर कर एक बड़ा सन्देश देने की कोशिश की है।
 
जैसा कि भारत हमेशा से कहता आया है कि आतंकवाद और बातचीत दोनों एक साथ पाकिस्तान के साथ नहीं चल सकते। इसी को ध्यान में रखते हुए नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को नहीं बुलाकर पूरी दुनिया के सामने एक कूटनीतिक सन्देश दिया है कि पाकिस्तान के लिए भारत के सभी दरवाजे अभी फिलहाल बंद हैं। भूटान जैसे छोटे देश को बुलाकर, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान को आमंत्रित ना करके प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। इमरान खान को शपथ ग्रहण समारोह में ना बुलाकर नरेन्द्र मोदी ने साफ़ जता दिया है कि पाकिस्तान अब भरोसे लायक नहीं बचा है।

BIMSTEC देशों के प्रमुखों को बुलाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को भी कूटनीतिक सन्देश दिया है। दरअसल, BIMSTEC में बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान जैसे छोटे देश शामिल हैं। इन देशों पर चीन और भारत दोनों ही देशों का प्रभाव रहता है। ऐसे में अपने शपथ ग्रहण समारोह में नरेन्द्र मोदी ने इन छोटे पड़ोसी देशों को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित कर सम्मान का दर्जा दिया है। भारत इन देशों के साथ अपनी घनिष्ठता बढ़ाना चाहता है, ताकि इन देशों पर चीन का प्रभाव कम हो और भारत इन देशों का नेतृत्व कर सके।

भारत के पड़ोसी और बंगाल की खाड़ी से सटे हुए इन देशों की भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से काफ़ी उपयोगिता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बंगाल की खाड़ी ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले कुछ समय से चीन अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इन देशों को कर्ज़ देकर और या फ़िर यहां पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का लालच देकर चीन इन दोनों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि इन देशों का साथ लेकर भारत की घेराबंदी की जा सके।
 
चीन के इस सम्भावित प्लान के ख़तरे को मद्देनज़र रखते हुए ही नरेन्द्र मोदी ने कूटनीति के तहत इन देशों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है ताकि अपने दूसरे कार्यकाल में इन देशों के साथ सम्बन्ध सुधारने की शुरूआत हो सके। BIMSTEC के देशों के साथ भारत का काफ़ी व्यापार होता है। वहीं चीन के मद्देनज़र भूटान, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देश सामरिक रूप से भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हैं। नरेन्द्र मोदी ने इन देशों को तरजीह देकर और पाकिस्तान को ना बुलाकर उसका बॉयकाट किया है, वहीं चीन के चंगुल में फंसते जा रहे नेपाल और श्रीलंका को बुलाकर उन्हें साधने की कोशिश की है। अब यह आने वाला समय ही बताएगा कि नरेन्द्र मोदी की आमंत्रण कूटनीति कितनी सफ़ल रहती है?