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​करारी हार के बाद कांग्रेस में ही उठे राहुल गांधी के प्रचार के तरीक़ों पर ‘सवाल’!

29 May 2019
कांग्रेस में राहुल गांधी से ‘नाराज़गी’ और नरेन्द्र मोदी की ‘तारीफ़’!
 
MAY 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी में इस्तीफ़ों का ‘नाटक’ चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर कई अन्य नेता हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़े की ‘पेशकश’ कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि 2014 में 44 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ 52 सीटों पर ही सिमट गई है। पार्टी में हार के बाद कांग्रेस में एक दूसरे पर ‘दोष’ देने का काम जारी है, लेकिन पूर्व केन्द्रीय मंत्री और केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के प्रचार अभियान पर ही ‘सवाल’ खड़े कर दिये हैं।
 
केरल के तिरुवंतपुरम से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए थरूर ने साफ़ कहा कि कांग्रेस को चुनाव प्रचार के दौरान 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का नुकसान उठाना पड़ा है। इतना ही नहीं, थरूर का कहना है कि कांग्रेस ने न्यूनतम आय योजना (NYAY) की शुरुआत तो बड़े जोरदार तरीक़े से की थी, लेकिन उसका प्रचार सही तरीक़े से नहीं किया। थरूर का मानना है कि यदि कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना के बारे में लोगों को सही से पता चलता, तो कांग्रेस आज इस स्थिति में नहीं होती।
 
लोकसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार हुआ है कि कांग्रेस के किसी नेता ने हार के लिए ‘सीधे’ तौर पर राहुल गांधी के प्रचार के तरीक़े की आलोचना की हो। थरूर का मानना है कि राहुल गांधी की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ थ्योरी से एक ग़लत सन्देश गया, जिसका ख़ामियाजा कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ा है। हमेशा विवादों में रहने वाले थरूर का मानना है कि कांग्रेस और भाजपा विरोधी दूसरे दलों को भाजपा की हिंदुत्व अवधारणा को चुनौती देनी होगी। थरूर का मानना है कि भाजपा की हिंदुत्व अवधारणा ने नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के दृष्टिकोण पर लगभग ‘जीत’ हासिल कर ली है।
 
राहुल गांधी के प्रचार के तरीक़ों पर निशाना साधने के बाद थरूर का कहना है कि राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए। उनका मानना है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद इस ‘मुश्किल घड़ी’ से कांग्रेस को बाहर सिर्फ़ राहुल गांधी ही निकाल सकते हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री थरूर के मुताबिक़ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हारी जरूर है, लेकिन कांग्रेस को ख़त्म मान लेना अभी बहुत ‘ज़ल्दबाजी’ होगी।
 
जहां एक तरफ़ शशि थरूर ने लोकसभा चुनाव में हार के लिए राहुल गांधी के चुनाव प्रचार के तरीक़े को ग़लत बताया तो वहीं दूसरी तरफ़ कांग्रेस के एक अन्य नेता एपी अब्दुल्लाकुट्टी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ़ की है। अब्दुल्लाकुट्टी ने भाजपा की जीत को मोदी के विकास एजेंडे की ‘स्वीकार्यता’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सफलता का सूत्र यह है कि उन्होंने गांधीवादी मूल्यों को अपनाया है। अब्दुल्लाकुट्टी ने केन्द्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान और उज्ज्वला योजना जमकर तारीफ़ की, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उनसे ‘स्पष्टीकरण’ मांगा है।
 
दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व पर उनकी ही पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाया है या फ़िर नरेन्द्र मोदी की किसी कांग्रेस नेता ने पहली बार तारीफ़ की है। लेकिन शशि थरूर जैसे कद्दावर नेता ही जब राहुल गांधी के प्रचार के तरीक़ों पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो राहुल गांधी के लिए यह सोचना का समय है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के ख़िलाफ़ प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उनके नेतृत्व पर सवाल उनकी ही पार्टी में खड़े हो रहे हैं।
 
2014 और अब 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कांग्रेस नेताओं में हो सकता है कि राहुल गांधी के प्रति नाराज़गी हो, लेकिन डर के कारण वे कुछ भी किसी से कह नहीं पा रहे हैं। अब देखना होगा कि शशि थरूर के अलावा किसी और नेता में इतना साहस है कि वे लोकसभा चुनाव में हार के लिए राहुल गांधी के पार्टी में काम के तरीकों पर सवाल खड़ा कर सके।