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​चीन में उइगर मुस्लिमों पर ‘अत्याचार’ और मुस्लिम देशों की ‘चुप्पी’!

30 May 2019
उइगर मुस्लिमों के मामले में चीन की ‘कूटनीति’ रही सफ़ल
 
MAY 30 (WTN) – विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन में मानवाधिकारों का दमन किसी से भी छिपा नहीं है। चीन में सेंसरशिप होने के बाद भी समय-समय पर ख़बरें बाहर आती रहती हैं कि चीन में राष्ट्रवाद के नाम पर मानवाधिकारों का हनन कोई नहीं बात नहीं है। वहीं चीन में मानवाधिकार हनन के मामले में मुस्लिमों के साथ हो रहे अन्याय भी कोई नई बात नहीं है। इन दिनों मुसलमानों के लिए रमजान का महीना चल रह है, लेकिन चीन के मुसलमानों के लिए रमजान का यह महीना चुनौतियां लेकर आता है।

मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि रमजान के महीने में चीनी प्रशासन मुस्लिम अल्पसंख्यक उइगर समुदाय के लोगों पर जमकर अत्याचार करता है। चीन में मुस्लिमों को रमजान के महीने में सूर्यास्त से पहले खाने-पीने के लिए मज़बूर किया जाता है। चीन के मुस्लिम बाहुल्य शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों द्वारा चलाए जा रहे रेस्टोरेंट्स को दिन में खोले रखने के लिए मज़बूर किया जा रहा है। आरोप है कि उइगर मज़दूरों को रोजा तुड़वाकर प्रताड़ित किया जाना चीन में आम बात है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में मुस्लिमों को दाढ़ी रखने की इजाज़त नहीं होती है। चीन में मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने से रोका जाता है। इतना ही नहीं, कोई ना कोई कारण बताकर चीन में मस्जिदों को नष्ट किया जा रहा है। आरोप है कि क़रीब 30 लाख उइगर मुसलमानों को चीन के शिनजियांग प्रांत के डिटेंशन कैम्प में रखा गया है, लेकिन चीनी सरकार का कहना है कि ये डिटेंशन कैम्प नहीं बल्कि प्रशिक्षण कैम्प हैं और इनका उद्देश्य आतंकवाद का ख़ात्मा है।

पूरी दुनिया के सामने चीन उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार कर रहा है, लेकिन दुनिया के मुस्लिम देश इस मामले में किसी भी स्तर पर चीन का विरोध करते नहीं दिख रहे हैं। बात करें सऊदी अरब की तो सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों के संरक्षक की उपाधि रखता है, लेकिन चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के मामले में उसकी चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। सऊदी अरब, चीन की आर्थिक प्रगति में तेल की आपूर्ति करता है, लेकिन इतना होने के बाद भी सऊदी अरब ने चीन के सामने एक तरह से सरेंडर कर दिया है, जिसके कई कारण हैं।

दरअसल, आर्थिक और कूटनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, चीन में उइगर मुसलमानों के साथ हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज़ करते आए हैं। चीन के दौरे पर गये सलमान ने चीन के मामले में साफ़ कहा था, “सऊदी अरब आतंकवाद ख़त्म करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के चीन के अधिकार का सम्मान करता हैं।”

दरअसल, चीन का विरोध ना करने के पीछे सऊदी अरब का अपना खुद का स्वार्थ है। साल 2009 में चीन, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए सऊदी अरब से तेल आयात करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया था। वहीं साल 2018 में चीन ने सऊदी अरब से 46 अरब डॉलर का सामान खरीदा था। इन्हीं व्यापारिक रिश्तों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में सब जानते हुए भी विरोध नहीं करता है।

मुस्लिमों पर किया जा रहे अत्याचारों के आरोपों के बाद चीन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के 57 सदस्य देशों की लॉबिंग पर ध्यान दे रहा है। चीन की ही लॉबिंग का नतीजा है कि OIC के 57 सदस्य देशों ने चीन के उइगर मुसलमानों के साथ हो रहे बर्ताव को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला घोषित कर दिया है। कहा जा रहा है कि चीन ने अपनी इस कोशिश में OIC सदस्य देशों को आर्थिक प्रलोभन से लेकर धमकी तक दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ख़ासकर सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अपील कर रहा है ताकि अन्य मुस्लिम देशों को चीन के पक्ष में किया जा सके।

दरअसल, कई मुस्लिम देश चीन के मुस्लिमों के प्रति रवैये से चिंतित हैं, लेकिन वे आगे इसका विरोध करने से डरते हैं। इन देशों को डर है कि चीन ने जो अरबों डॉलर्स का निवेश उन देशों में कर रखा है वो चीन का विरोध करने पर ख़तरे में आ जाएगा। इधर, भारत में मुस्लिमों के मामलों पर दखलंदाजी करने वाले पाकिस्तान ने भी चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों पर आंखें बंद कर ली हैं। हालांकि, तुर्की ने चीनी सरकार के उइगर मुस्लिमों पर किया जा रहे अत्याचार का विरोध किया था, क्योंकि उइगर तुर्की मूल के लोग हैं। तुर्की ने जब सार्वजनिक रूप से चीन का विरोध किया था तो चीन तुर्की पर भड़क गया था।

अब बात करें कूटनीतिक मामलों की तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब की अमेरिका से काफ़ी क़रीबी रही है, लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खाशोग्जी की इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में हुई हत्या ने दोनों देशों के बीच की दोस्ती में दरार पैदा कर दी। खाशोग्जी की हत्या के पीछे तुर्की और अन्य देशों ने सऊदी अरब के नेतृत्व का षड़यंत्र बताया था। कहा जाता है कि खाशोग्जी की हत्या के बाद सऊदी अरब कूटनीतिक तौर पर अलग पड़ गया था, जिसके बाद सऊदी अरब ने चीन के साथ सम्बन्धों को मज़बूत करना शुरू किया और इसी कारण से चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ सऊदी अरब ने चुप्पी साध रखी है।