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​जानिए क्या है अमेरिका का जीएसपी कार्यक्रम और डोनाल्ड ट्रम्प ने क्यों किया भारत को इससे बाहर?

01 Jun 2019
जीएसपी का अमेरिका रूख सख्त, भारत ने कहा नहीं होगा ज़्यादा नुकसान

JUNE 01 (WTN) – व्यापारिक मानसिकता वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जीएसपी व्यापार कार्यक्रम के तहत भारत को मिले लाभार्थी विकासशील देश का दर्ज़ा ख़त्म कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस क़दम के बाद एक बार फ़िर से भारत और अमेरिका के बीच के व्यापारिक सम्बन्धों पर आंशिक ग्रहण लग गया है। आख़िर जीएसपी व्यापार कार्यक्रम क्या है और इससे अमेरिका ने भारत को क्यों अलग किया है? साथ ही इससे भारत को क्या नुकसान हो सकता है, आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Generalized System of Preferences (GSP) अमेरिका का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार तरजीही कार्यक्रम है। अमेरिकी नीतियों के मुताबिक़ इस कार्यक्रम का लक्ष्य विकासशील लाभार्थी देशों के हज़ारों उत्पादों को अमेरिका में बिना शुल्क प्रवेश की अनुमति देकर सम्बन्धित देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। अमेरिका ने दुनिया के 120 से भी ज़्यादा देशों को यह सुविधा दे रखी है जहां से क़रीब 4800 सामान का आयात होता है और इस सामान पर अमेरिका में आयात शुल्क नहीं लगता है। अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 1 जनवरी 1976 को जीएसपी का गठन किया था।

जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में भारत समेत कई विकासशील देशों के उत्पादों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगता है। जानकारी के मुताबिक़, जीएसपी के अंतर्गत भारत को 5.6 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के निर्यातित माल पर छूट मिलती है। अब जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को जीएसपी से बाहर कर दिया है, तो ऐसे में भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले सामान पर अमेरिका में निर्धारित आयात शुल्क देना होगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश रहा है।

अब आपको बताते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को जीएसपी से बाहर करने का फ़ैसला आख़िर क्यों लिया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के मुताबिक़ उन्होंने ये फ़ैसला इसलिए लिया है, क्योंकि उन्हें भारत से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह (भारत) अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। ट्रम्प का तर्क है कि भारत में अमेरिकी उत्पादों पर पाबंदियों के कारण अमेरिका को व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन्हीं आरोपों के कारण अमेरिका का कहना है कि भारत जीएसपी के मापदंड पूरे करने में असफ़ल रहा है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि भारत में आयात शुल्क बाक़ी देशों की तुलना में बहुत ज़्यादा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्म ने एक बार उदारहण देते हुए कहा था कि अमेरिका से भारत को निर्यात होने वाली बाइक हार्ले डेविडसन पर भारत में 100 प्रतिशत टैरिफ शुल्क लगता है, जबकि भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले इसी तरह के सामान पर अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेता है। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका भी अब भारतीय आयात पर बराबरी का टैरिफ लगाएगा। ट्रम्प ने जीएसपी कार्यक्रम से भारत को बाहर करने का फ़ैसला अमेरिका के तमाम बड़े सांसदों की अपील ठुकराते हुए लिया है। सांसदों का तर्क था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस क़दम से अमेरिकी उद्योगपतियों को हर साल क़रीब 30 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने 4 मार्च को कहा था कि अमेरिका, जीएसपी के तहत भारत को मिले लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा खत्म करने पर विचार कर रहा है और इस सम्बन्ध में भारत को मिला 60 दिन का नोटिस तीन मई को समाप्त हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा फ़ैसला लेने के बाद 5 जून से भारत को जीएसपी के तहत मिला लाभार्थी का दर्जा ख़त्म हो जाएगा। दरअसल, चीन से जारी ट्रेड वॉर के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प व्यापार घाटा कम करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के बारे में ट्रम्प का कहना है कि भारत ने अपने बाज़ारों को अमेरिका के लिए उतना सुलभ नहीं बनाया है, जितना सुलभ अमेरिका ने भारत के लिए अपने बाज़ारों को बनाया है।

अब इस बारे में भारत का क्या रूख है वो आपको बताते हैं। इस पूरे मामले में भारत का कहना है कि उसके अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते काफ़ी मज़बूत हैं और व्यापार से जुड़े इन मुद्दों पर अमेरिका से चर्चा जारी है। लेकिन मेडिकल उपकरणों के मामले में भारत कोई भी समझौता नहीं करेगा। भारत-अमेरिका व्यापार के जानकारों का मत है कि भारत को मिलने वाले जीएसपी के फ़ायदों का आर्थिक मूल्य बहुत ज़्यादा नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल भारत ने जीएसपी के तहत अमेरिका को 560 करोड़ डॉलर के सामान का निर्यात किया था। इस निर्यात पर सिर्फ़ 19 करोड़ डॉलर के आयात शुल्क की बचत हुई थी। ऐसे में भारत का तर्क है कि जीएसपी से बाहर होने से भारत को ज़्यादा नुकसान होने वाला नहीं है।