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मोदी सरकार जल्द ही ‘अभेद’ करेगी भारतीय सीमाएं!

03 Jun 2019
राफेल, अपाचे और चिनूक से बढ़ेगी भारतीय ‘वायु सैन्य शक्ति’, सीमाएं होंगी ‘सुरक्षित’

JUNE 03 (WTN) – अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कामों और इरादों से साफ़ कर दिया था कि देश और देश के नागरिकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद कहा जा रहा है कि मोदी सरकार की राष्ट्रवाद की नीति के कारण ही भाजपा को इतनी बड़ी सफलता हासिल हो सकी है। आतंकियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक और एअर स्ट्राइक करके मोदी सरकार ने अपने इरादों को पूरी दुनिया के सामने जाहिर कर दिया था। अब जबकि एक बार फ़िर से भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार केन्द्र में पांच सालों तक रहेगी, प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा के इरादों के कारण, आने वाले कुछ ही समय में भारतीय सीमाएं और भी ज़्यादा सुरक्षित होने जा रही हैं। राफेल फाइटर जेट से लेकर अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर, चिनुक हेलिकॉप्टर, अत्याधुनिक ASSAULT राइफलें और एस-400 डिफेंस सिस्टम भारत के पास होंगे, जिससे जिससे भारतीय सीमाओं की सुरक्षा अभेद हो जाएगी।

सबसे पहले आपको बता दें कि भारत को जल्द ही राफेल फाइटर जेट की डिलिवरी फ्रांस से होने वाली है। जानकारी के मुताबिक़, इस साल फ्रांस से राफेल की पहली खेप के 4 फाइटर जेट सितम्बर के महीने तक भारत को मिल सकते हैं। राफेल फाइटर जेट के लिए भारत आधी रक़म का भुगतान कर चुका है। अनुबन्ध के अनुसार अक्टूबर 2022 तक भारत को सभी 36 राफेल फाइटर जेट मिल जाएंगे। वायुसेना की योजना है कि पाकिस्तान और चीन से सम्भावित ख़तरे को देखते हुए, राफेल फाइटर जेट के एक-एक स्क्वाड्रन को अम्बाला और हासिमरा में तैनात किया जाए। राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से भारत की हवाई ताक़त में पाकिस्तान की तुलना में काफ़ी इजाफ़ा होगा।

‘अपाचे’ अटैक हेलिकॉप्टर और ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर भी इस साल भारतीय वायुसेना में शामिल होकर देश की वायु शक्ति में इजाफ़ा करेंगे। भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर ख़रीदने की डील की है। कहा जा रहा है कि इनके भारतीय वायुसेना में शामिल होने से बॉर्डर इलाकों में भारत की ऑपरेशन की शक्ति में वृद्धि होगी।

पिछले महीने मई में अमेरिका ने भारतीय वायुसेना को अपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर की पहली खेप सौंपी थी। भारतीय वायुसेना की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाए गये अपाचे हेलिकॉप्टर दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। अपाचे हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ने भरने में सक्षम हैं और इसी कारण से यह पहाड़ी इलाकों में छिपकर वार करने में भारतीय वायुसेना के काफ़ी काम आ सकते हैं। कहा जा रहा है कि अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर की तैनाती पठानकोट एयरबेस पर हो सकती है।

वहीं बात करें चिनूक हेलिकॉप्टर की तो इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने भारत को 4 चिनूक हेलिकॉप्टर्स की पहली खेप सौंपी थी। इस साल के आख़िरी तक सभी 15 चिनूक हेलीकॉप्टर्स भारतीय वायुसेना को मिल जाएंगे। चिनूक हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना के लिए काफ़ी मददगार हैं। इनका उपयोग दुर्गम और ऊंचाई वालों इलाकों में जवानों से लेकर हथियारों और रसद सामग्री को पहुंचाने में किया जा सकता है। चिनूक हेलिकॉप्टर रात में भी उड़ाने भरने और ऑपरेशन करने में भारतीय वायुसेना के लिए काफ़ी मददगर साबित हो सकते हैं। चिनूक हेलिकॉप्टर की तैनाती चण्डीगढ़ एयरबेस पर हो सकती है।

भारतीय सेना के जवानों के पास अब INSAS की जगह अत्याधुनिक ASSAULT राइफलें होंगी। मोदी सरकार ने जवानों के लिए 72,000 अत्याधुनिक और मज़बूत ASSAULT राइफलें ख़रीदने के लिए अमेरिका से डील की थी। जल्द ही इन राइफलों की डिलेवरी भारत को हो जाएगी। रखरखाव में सुविधाजनक 72 हज़ार ASSAULT राइफलें पाकिस्तान और चीन बॉर्डर पर तैनात जवानों को मिलेंगी। वहीं कश्मीर में आतंकियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन में लगे सेना के जवानों को भी ASSAULT राइफलें मिल सकती हैं।

भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डील भी भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। एस-400 की डील भारत ने रूस से पिछले साल ही कर ली थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध के कारण डील पर संशय के बादल हैं। प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार को सैन्य कूटनीति के तहत अमेरिकी अड़चनों को दूर करना होगा, क्योंकि अगले साल से रूस एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डिलिवरी शुरू करने वाला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एस-400 मिसाइल सिस्टम्स के जरिए भारत 400 किलोमीटर की दूरी तक एक साथ 36 मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम पाकिस्तान और चीन से हमले की स्थिति में भारत को एक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

यानी कि साफ़ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्देनज़र मोदी सरकार कोई भी ढील बरतने की मूड़ में नहीं है। राष्ट्रवाद के लिए पहचाने जानी वाली मोदी सरकार किसी भी क़ीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहती है। इसलिए मोदी सरकार देश में ही रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दे रही है। एक निश्चित रणनीति के तहत मोदी सरकार की योजना भारत को सैन्य ताकत बनाना है ताकि भारत, एशिया की सुपर पावर बनने के लिए चीन को बराबरी की टक्कर दे सके।