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​जानिए भारत में क्यों कम हो रहे हैं मोबाइल फोन उपभोक्ता?

04 Jun 2019
‘इस’ कारण से भारत में हर महीने कम हो रहे हैं मोबाइल फोन उपभोक्ता!
 
JUNE 04 (WTN) – भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या यूरोप की कुल जनसंख्या से भी ज़्यादा है। रिलायंस जियो के मोबाइल नेटवर्क के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद से देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। लेकिन एक समय मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि के बाद, अब भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है!

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में मार्च के महीने में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या घटकर 116.18 करोड़ पर आ गई। यदि फरवरी के महीने से तुलना की जाए तो मार्च के महीने में फरवरी की तुलना में 2.18 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता कम हुए हैं। इतना ही नहीं, मार्च महीने के आख़िरी में देश में कुल फोन घनत्व घटकर 90.11 रह गया, जबकि फरवरी में फोन घनत्व 91.86 था।

भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आना अपने आप में काफ़ी सोचनीय है। हालांकि, इस बारे में TRAI का तर्क कुछ और ही है। ट्राई का मानना है कि मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों द्वारा मासिक न्यूनतम रिचार्ज प्लान की बाध्यता के कारण कुछ समय के लिए मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा होने से वे मोबाइल कनेक्शन हट गये है जो कि सक्रिय नहीं थे।

वैसे इस क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में कमी कोई चिंता की बात नहीं है। उपभोक्ताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। लेकिन यदि लगातार मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में कमी दर्ज की जाती है तो यह चिन्ता का कारण बन सकता है। ट्राई का भी इस बारे में साफ़ दृष्टिकोण है कि मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में आई कमी कोई चिन्ता का कारण नहीं है और नियामक को इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं है।

वहीं यदि मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों के उपभोक्ताओं पर नज़र डाली जाए तो स्थिति और भी साफ़ होती है। ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक़, मार्च के महीने में वोडाफोन-आइडिया के 1.45 करोड़ उपभोक्ता कम हुए। वहीं भारती एयरटेल के 1.51 करोड़ उपभोक्ता इस दौरान कम हो गये। हालांकि, जहां बाक़ी मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों के उपभोक्ताओं में कमी दर्ज की गई वहीं रिलांयस जियो ने 94 लाख नये ग्राहक जोड़े।

कारण जो भी हो, लेकिन यदि मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार कमी दर्ज की गई तो इस पर ट्राई को विचार करना ही पड़ेगा। दरअसल, भारत में एक समय सिम काफ़ी सस्ती थीं, जिसके कारण एक व्यक्ति के पास कई सारे मोबाइल नम्बर हो गये थे। हालांकि, मोबाइल उपभोक्ता के पास नम्बर कई सारे होते थे लेकिन वो उपयोग में एक या दो ही नम्बर लेता था। वहीं रिलांयस जियो के मोबाइल नेटवर्क में प्रवेश के बाद देश में डेटा इतना सस्ता हो गया कि आज 99 प्रतिशत मोबाइल उपभोक्ताओं के पास स्मार्टफोन है। रिलांयस जियो के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण बाकी मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों ने भी अपने डेटा प्लान को सस्ता कर दिया था, जिसके बाद 2017 और 2018 में देश में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई।

लेकिन अन्य दूसरी कम्पनियां, जियो के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाईं और अपने घाटे को पूरा करने के लिए उन्होंने मासिक न्यूनतम रिचार्ज शुरू कर दिया। ऐसा होने से मोबाइल उपभोक्ताओं ने उन मोबाइल नम्बरों को रिचार्ज कराना बंद कर दिया जिस पर वे ज़्यादा सक्रिय नहीं थे। इसी कारण से कुछ समय से देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ और महीनों तक यही स्थिति रहेगी, जब तक कि मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की वे सिम बंद नहीं हो जाती हैं जो कि सक्रिय नहीं हैं। यही कारण है कि मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की अक्रिय सिमों के बंद होने से मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है।