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​बैंक से निर्धारित सीमा से ज़्यादा कैश निकासी पर लग सकता है टैक्स!

10 Jun 2019
‘डिजिटल ट्रांजैक्शन’ को बढ़ावा देने मोदी सरकार ले सकती है 'बड़ा फ़ैसला'!

JUNE 10 (WTN) – मोदी सरकार देशहित के लिए कठोर, त्वरित और दूरगामी फ़ैसले लेने के लिए जानी जाती है। इसी कड़ी में मोदी सरकार अपनी महत्वाकांक्षी डिजिटल इण्डिया स्कीम को आगे बढ़ाने के लिए कुछ नये फ़ैसले से सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि देश में कैश की बजाए मनी ट्रांजैक्शन ज़्यादा से ज़्यादा चेक के ज़रिये या ऑन लाइन हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा करने से मनी ट्रांजैक्शन की पारदर्शिता रहेगी। इसी कड़ी में मोदी सरकार डिजिटल मनी ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए कुठ ठोस क़दम उठा सकती है।

दरअसल, कैश के जरिये लाखों रुपये के लेनदेन पर मोदी सरकार की नज़र है। सरकार एक लिमिट से ज़्यादा कैश बैंक से निकालने पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार एक साल में 10 लाख रुपये से ज़्यादा कैश निकालने पर टैक्स लगाने की सम्भावनाएं तलाश रही है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 10 लाख रुपये से ज़्यादा की सालाशा कैश निकासी की ज़रूरत आमतौर पर आम व्यक्ति को नहीं पड़ती है। वहीं आजकल व्यापारियों ने भी डिजिटल ट्रांजैक्शन की तरफ़ रुख कर लिया है, तो ऐसे में उनको भी 10 लाख रुपये से ज़्यादा की कैश निकासी की ज़रूरत नहीं रहती है।

हालांकि, इस योजना पर विचार चल रहा है लेकिन इसमें कोई अन्तिम निर्णय नहीं लिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कैश निकाशी पर टैक्स लगाने की सिफ़ारिश पहले भी हो चुकी है। साल 2016 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में मुख्यमंत्रियों के एक उच्च-स्तरीय समूह ने भी 50,000 रुपये से अधिक की कैश निकासी पर फ़िर से टैक्स लगाने की सिफारिश की थी।

जैसा कि आप जानते हैं कि बैंक या पोस्ट ऑफिस में 50,000 रुपये से ज़्यादा कैश जमा करने या फ़िर निकालने पर पैन कार्ड नम्बर देना अनिवार्य है। उसी तरह से एक निर्धारित राशि से ज़्यादा रकम जमा करने या फ़िर निकालने पर आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इस मामले में तर्क दिया जा रहा है कि आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य करने से व्यक्तिगत और टैली टैक्स रिटर्न को ट्रैक करने में आसानी होगी।

इस सबके पीछे मोदी सरकार की दूरगामी महत्वाकांक्षी योजना है। दरअसल, मोदी सरकार क़ाग़जी मुद्रा के उपयोग को कम करना चाहती है। वहीं काले धन पर नज़र रखने और उस पर लगाम लगाने के लिए ही डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिये जाने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि देश की जनता ज़्यादा से ज़्यादा डिजिटल तरीक़े से ट्रांजैक्शन करे।  

नोटबंदी, मोदी सरकार का एक बहुत बड़ा महत्वाकांक्षी निर्णय था। नोटबंदी सफल रही है या फ़िर असफल इस पर बहस हो सकती है, लेकिन मोदी सरकार का नोटबंदी करने का मक़सद था काले धन पर लगाम लगाना। नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में गुणात्मक तरीक़े से वृद्धि देखी गई है। 

अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि देश में पैसों का ट्रांजेक्शन कैश की जगह पर चेक से या फ़िर डिजिटल तरीक़े से होने लगेगा तो इससे पारदर्शिता आएगी, इससे किसको कितना पैसा मिला और किसने दिया यह साफ़ हो जाएगा। हो सकता है कि मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में इस तरह की किसी योजना की घोषणा कर सकती है, जिसमें बैंक से निर्धारित मात्रा से ज़्यादा नकद निकालने पर टैक्स देना पड़े। अब देखना होगा कि यदि मोदी सरकार ने इस तरह की कोई घोषणा की तो इसका विरोध होता है कि नहीं।