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​यदि अब की टैक्स चोरी तो भुगतना पड़ेंगे ‘परिणाम’!

18 Jun 2019
टैक्स चोरी करना हुआ अब ‘गम्भीर अपराध’!

JUNE 18 (WTN) – यदि आप टैक्स चोरी करते हैं या फ़िर टैक्स चोरी में सहायता करते हैं तो सावधान रहिये। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं इसके लिए आप इस लेख को ध्यान से पढ़िए। दरअसल, भारत में टैक्स चोरी करने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। टैक्स चोरी के कारण देश को हर साल करोड़ों रूपयों के राजस्व की हानि होती है। ऐसे में टैक्स चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कड़े क़दम उठाने की तैयारी में है। टैक्स चोरी के प्रति गम्भीरता दिखाते हुए अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नये दिशा निर्देशों के मुताबिक़, ब्लैकमनी और बेनामी क़ानून के तहत किए गए अपराधों को अब गम्भीर माना जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये अपराध अभी तक गम्भीर नहीं माने जाते थे।

यानी कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नये दिशा निर्देशों के मुताबिक़ यदि अब कोई व्यक्ति या कम्पनी टैक्सी चोरी करता है तो इसके उसे गम्भीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। टैक्स चोरी करने पर अब सिर्फ़ टैक्स पेमेंट, पेनाल्टी और ब्याज चुकाने से आरोपों का समाधान नहीं होगा। इनकम टैक्स की नई गाइडलाइंस, जो कि 17 जून 2019 से लागू हो गई है, उसके अनुसार टैक्स चोरी के सभी मामलों को अब गम्भीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नये नियमों के मुताबिक़ 13 तरह के मामलों की सूची बना गई है, जिनमें टैक्स चोरी के मामलों को अब गम्भीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। अब इन नये नियमों के मुताबिक़ ही टैक्स चोरी से जुड़े मामलों का निपटारा होगा। अभी तक यह 13 मामले गम्भीर अपराध की श्रेणी में नहीं आते थे।

नये नियमों के अनुसार यदि इनकम टैक्स की धारा 115-0 या चैप्टर XVII-B के तहत आप टैक्स नहीं चुकाते हैं तो यह अपराध A कैटेगरी में आता है। वहीं सोर्स से टैक्स एकत्रित करके अगर कोई व्यक्ति या कम्पनी टैक्स नहीं चुकाता है तो इसी भी अब गम्भीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कैटेगरी B में वे व्यक्ति या कम्पनी आएंगे जो टैक्स चोरी के लिए विलफुल डिफॉल्ट करते हैं। वहीं टैक्स चोरी के लिए जिन्होंने आवश्यक दस्तावेज़ नहीं दिये हैं या फ़िर अपने खातों का ब्यौरा नहीं दिया है या फ़िर सत्यापन के लिए फर्ज़ी दस्तावेज़ दिये हैं, इन सभी को अब गम्भीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

वहीं यदि यह साबित हो जाए कि किसी टैक्सपेयर ने दूसरों से टैक्स चोरी करवाई है तो उसे भी जुर्माना भरकर सज़ा से बचने की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही यही नियम उन करदाताओं पर भी लागू होगा, जिन्होंने ख़रीदी-बिक्री की झूठी पर्चियां बनाई है या फ़िर होटलों आदि में ठहरने के फर्जी बिल बनाए है। वहीं बेनामी लेनदेन विरोधी क़ानून के तहत आने वाले अपराधों में भी जुर्माना भरकर सज़ा से छूट पाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीबीडीटी की पहली गाइडलाइंस में अघोषित विदेशी खातों और विदेशी सम्पत्तियों से सम्बन्धित अपराधों पर बड़ा जुर्माना भरने के बाद सज़ा से छूट पाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इसके लिए शर्त थी कि बाकायदा टैक्सपेयर ने जांच में सहयोग किया हो और वो टैक्स चुक दे।

इसके बाद साल 2015 में काला धन विरोधी कानून आया, उसके मुताबिक़ नये क़ानून में टैक्स चोरी करने वालों को सीमित मौक़ा दिया गया था। इसके तहत 30 प्रतिशत ब्याज और बड़ा जुर्माना देकर सज़ा से बचा जा सकता था। लेकिन अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के संशोधित दिशा निर्देशों में थोड़ी और कड़ाई बरती गई है। नये दिशा निर्देशों में काला धन विरोधी क़ानून के तहत आने वाले अपराधों एवं अघोषित विदेशी खातों एवं सम्पत्तियों से सम्बन्धित अपराधों में जुर्माना चुकाकर सज़ा से बचने की अनुमति नहीं दी गई है।
 
यानी कि पहले टैक्स चोरी के कई गम्भीर मामलों में बड़ा जुर्माना भरकर सज़ा से छूट का प्रावधान था, लेकिन अब इस तरह के टैक्स चोरी के मामलों को गम्भीर अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2017 के अप्रैल से नवम्बर तक के आठ महीनों के दौरान टैक्स चोरी के हज़ारों मामलों में जुर्माना लेकर टैक्स चोरों को सज़ा से मुक्त कर दिया गया था। लेकिन कहा जा रहा है कि अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रिवाइज्ड गाइडलाइंस के आ जाने से अगले कुछ महीनों में अभियोजन के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है।