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मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से काफ़ी ‘आशाएं’

24 Jun 2019
एक बड़े पैकेज की ‘आशा’ में रियल एस्टेट सेक्टर, मंदी की मार से बचने लगाई सरकार से ‘गुहार’
 
JUNE 24 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि अगले महीने मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद सभी की बहुत सी आशाएं मोदी सरकार से हैं कि वो अपने इस बजट में काफ़ी राहतें आम लोगों को देगी। इसी कड़ी में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों को भी मोदी सरकार से आशा है कि इस सेक्टर में जारी मंदी को दूर करने के लिए मोदी सरकार कुछ ख़ास उपाय करेगी, जिससे एक बार फ़िर से इस सेक्टर में उछाल देखने को मिले।

नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में काफ़ी मंदी का दौर देखा जा रहा है। इसका कारण है कि नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन के इन्वेस्टमेंट में काफ़ी कमी आई है, जिसके कारण इस सेक्टर में पारदर्शी तरीक़े से काम नहीं करने वाले बिल्डरों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी के बाद से मोदी सरकार ने मनी ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता लाने के कई नियम बनाए हैं, जिसके बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन के इन्वेस्टमेंट में लोग डर रहे हैं।

जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार की साल 2022 तक सभी को घर देने की योजना है। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर को मोदी सरकार के बजट से इकोनॉमी राहत पैकेज की उम्मीद है, जिससे लोग एक बार फ़िर से घर ख़रीदने के लिए आगे आएं। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों की मांग है कि मोदी सरकार को रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी को ख़त्म करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं करने की ज़रूरत है। ऐसा इसलिए, क्योंकि रियल एस्टेट सेक्टर पर कई दूसरे सेक्टर निर्भर हैं। यदि घरों की ख़रीदी कम होगी तो इससे रियल एस्टेट सेक्टर पर निर्भर दूसरे सेक्टरों को भी मंदी की मार झेलना पड़ेगी। 
 
रियल एस्टेट सेक्टर की मांग है कि मोदी सरकार को होम लोन की दरों को कम करना चाहिए, जिससे घर ख़रीदने वालों और निवदेशों दोनों को फ़ायदा होगा। इस बजट से सेक्टर की मांग है कि रियल एस्टेट सेक्टर को इण्डस्ट्री का स्टेटस मिलना चाहिए, ऐसा होने से रियल एस्टेट सेक्टर को फण्ड जुटाने में आसानी होगी। सेक्टर की मांग है कि क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी में भी सरकार को बदलाव करना चाहिए।वहीं रियल एस्टेट सेक्टर चाहता है कि इस सेक्टर में फ़िर से गति लाने के लिए जीएसटी में बदलाव किया जाए।

रियल एस्टेट सेक्टर की मांग है कि सरकार को टैक्स स्ट्रक्चर में सुधार करना चाहिए और 5 लाख से 10 के स्लैब में टैक्स घटाना चाहिए। ऐसा करने से लोगों को ख़र्च करने के लिए हाथों में ज़्यादा पूंजी आएगी, जिससे वो होमलोन पर घर ख़रीदने की सोच सकते हैं। सेक्टर की मोदी सरकार से एक बहुत बड़ी डिमाण्ड है कि सरकार को बजट में किराये के मकानों की योजना पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए किराये के घर बनाने वाले डेवलपर्स को ऐसी योजनाओं से होने वाली आय पर 10 साल तक टैक्स छूट देना चाहिए।

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार का सपना है कि साल 2022 तक सभी को घर दिया जाए। लेकिन हक़ीकत है कि देश में घरों की कमी है, वहीं सभी की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे घर बना सकें या फ़िर ख़रीद सकें। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पट्टे पर घर देने वाला कारोबार क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की ज़रूरत है। अब देखना होगा कि मोदी सरकार रियल एस्टेट सेक्टर की इन मांगों पर क्या कुछ फ़ैसला बजट में लेती है।