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शायद लोकलुभावन ना हो इस बार मोदी सरकार का बजट!

26 Jun 2019
बजट में ‘कड़े’ फ़ैसले से सकती है मोदी सरकार; टैक्स पेयर्स को मिल सकती है थोड़ी ‘राहत’

JUNE 26 (WTN) – 2019 के लोकसभा चुनाव काफ़ी ऐतिहासिक थे। भारत के लोकसभा चुनाव के इतिहास में इस बार ऐसा पहले बार हुआ था जब कांग्रेस के अलावा किसी अन्य राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की जनता ने एक बार फ़िर से विश्वास जताया, और भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की फ़िर से सरकार बनी। लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद मोदी सरकार से देश की जनता को काफ़ी आशाएं हैं। 5 जुलाई को मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। मोदी सरकार के इस बजट से देश की आम जनता को काफ़ी उम्मीदें हैं कि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता को बजट में राहत देंगे।
 
लेकिन क्या सही में ऐसा होगा कि मोदी सरकार आम जनता को राहत देगी, या फ़िर यह पूर्ण बहुमत की सरकार जनता से टैक्स वसूलेगी और कड़े फ़ैसले लेगी। आइये नज़र डालते हैं कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में क्या कुछ हो सकता है।

हर बजट में टैक्स पेयर्स जनता को उम्मीद रहती है कि सरकार उन्हें टैक्स में कुछ छूट देगी। वैसे लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए एनडीए सरकार ने इस साल फरवरी में पेश किये अंतरिम बजट में ही टैक्स पेयर्स के लिए एक बड़ा तोहफ़ा दिया था, जिसमें एक फुल टैक्स रिबेट शुरू करके 5 लाख रुपए तक की इनकम वाले टैक्स पेयर्य को थोड़ी राहत दी थी।

कहा जा रहा है कि इस बजट में भी टैक्स स्लैब रेट में बदलाव करके अन्य टैक्स पेयर्य को भी टैक्स रिबेट बेनिफिट दिया जा सकता है। हो सकता है कि सरकार, टैक्सेबल लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दे। वहीं 5 प्रतिशत टैक्स स्लैब को बढ़ाकर 5 लाख रुपए से 7.5 लाख रुपए के आसपास किया जा सकता है। 20 प्रतिशत टैक्स स्लैब को बढ़ाकर 7.5 लाख रुपए से 12 लाख रुपए के आसपास किये जाने की भी सम्भावना है। सबसे ऊंचे 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब को बढ़ाकर 12 लाख रुपए के लिमिट के पार भी किया जा सकता है।

टैक्स पेयर्स की मांग है कि आईटी एक्ट के 80C के तहत टैक्स डिडक्शन लिमिट को बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया जाना चाहिए, इससे टैक्स पेयर्य को काफ़ी लाभ मिलेगा ख़ास तौर पर वेतनभोगी लोगों के लिए यह फ़ायदेमंद होगा। वहीं 80C लिमिट में वृद्धि से उन लोगों को फ़ायदा होगा जिन्होंने होम लोन लिया हुआ है।

मोदी सरकार ई-पेमेंट के जरिये लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ उपाय इस बजट में कर सकती है। कहा जा रहा है कि सरकार, इनकम टैक्स और जीएसटी टैक्स पेयर्स को कुछ टैक्स राहत दे सकती है। वहीं सरकार टैक्स के कैश पेमेंट को हतोत्साहित करने के लिए भी कुछ उपाय कर सकती है।

कहा जा रहा है कि मोदी सरकार अलग-अलग नियमों एवं शर्तों के साथ एक बार फ़िर से कैश विथड्रॉल टैक्स (CWT) लगा सकती है। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि CWT एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपए या उससे ज़्यादा की रक़म पर लगाया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि CWT लगाने का मोदी सरकार का उद्देश्य काले धन के प्रसार पर अंकुश लगाना और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना हो सकता है। जैसा कि आप जानते हैं कि आरबीआई ने NEFT और RTGS पर लगने वाले चार्ज को कुछ दिनों पहली ही ख़त्म कर दिया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार अपनी तरफ़ से भी कुछ क़दम उठा सकती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि साल 2022 तक देश में सभी के पास अपना घर हो। इसी सपने को पूरा करने के लिए मोदी सरकार, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेघरों को घर देने की प्लानिंग कर रही है। इसी कड़ी में मोदी सरकार से लोगों को उम्मीद है कि जो पहली बार घर ख़रीद रहे हैं उन्हें टैक्स में राहत दी जानी चाहिए। वैसे मोदी सरकार ने अपनी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) की आख़िरी तारीख़ को बढ़ाकर 31 मार्च 2020 कर दिया था, लेकिन कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इसे और भी आगे बढ़ा सकती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि आजकल हर दिन पेट्रोल और डीज़ल के दामों की समीक्षा होती है, उसके आधार पर हर दिन पेट्रोल और डीज़ल के दाम तय होते हैं। डीज़ल के दामों पर बहुत कुछ महंगाई भी निर्भर करती है, क्योंकि डीज़ल के दाम बढ़ने से परिवहन महंगा होता है, और इससे रोज़मर्रा की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। कहा जा रहा है कि इस बार के बजट में मोदी सरकार पेट्रोल और डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए कुछ क़दम उठा सकती है।

यूं तो मोदी सरकार के इस बजट से देश की जनता को काफ़ी उम्मीदे हैं, लेकिन वित्त क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट लोक लुभावन नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार देश की आर्थिक प्रगति के लिए शुरूआती तीन बजट में कड़े फ़ैसले ले सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिल सके, और विकास कार्यों के लिए टैक्स के जरिये पैसा जुटाया जा सके। नोटबंदी और जीएसटी जैसे कठोर फ़ैसले लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी किसी भी तरह के कड़े फ़ैसले लेने से नहीं डरते हैं। इसी आधार पर कहा जा रहा है कि शायद इस बार का बजट लोक लुभावन ना होकर जनता से टैक्स वसूलने वाला हो।