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एक बहुत बड़े परिवर्तन की ओर कांग्रेस!

02 Jul 2019
राहुल गांधी की नाराज़गी के कारण कांग्रेस में बड़े फेरबदल के आसार!

JULY 02 (WTN) – 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जिस तरह से हार हुई है, उसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था, और पार्टी सिर्फ़ 42 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को आशा थी कि वो इस चुनाव में 2014 से बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन ऐसा ना हो सका। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर चुके हैं।

राहुल गांधी को मनाने का दौर जारी है कि वे मान जाएं और कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज़ रहें, लेकिन राहुल गांधी हैं कि ज़िद पकड़े बैठे हैं कि वे फ़िलहाल अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते हैं। युवक कांग्रेस के नेताओं से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को मनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी किसी की भी नहीं सुन रहे हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी को लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने पार्टी की जो ज़मीनी स्थिति उन्हें बताई थी, हक़ीक़त उससे अलग थी। राहुल गांधी कांग्रेस रूलिंग राज्यों के मुख्यमंत्रियों से ख़ासतौर से नाराज़ बताए जाते हैं, क्योंकि उन्हें (राहुल गांधी) लगता है कि कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें उनके राज्यों में पार्टी की ख़राब हालत की जानकारी नहीं दी, और वास्तविकता को छिपाकर रखा।
 
राहुल गांधी की नाराज़गी और इस्तीफ़े की पेशकश के बाद कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में खलबली मची हुई है, जिसके बाद कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने राहुल गांधी से मुलाक़ात कर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने की गुजारिश की और कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने इस्तीफ़े राहुल गांधी को सौंप दिये, लेकिन इतना होने के बाद भी राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने पर अड़े हुए हैं।
 
कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी इस बात से दुखी बताए जाते हैं कि चुनाव में ऐतिहासिक पराजय के बाद भी पार्टी के किसी भी मुख्यमंत्री ने इस्तीफ़ा तक नही दिया। सूत्रों के मुताबिक़ राहुल गांधी मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से काफ़ी नाराज़ बताए जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस की बुरी तरह से शिकस्त हुई है।

राजस्थान में जहां कांग्रेस को सभी 25 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस 29 में से सिर्फ़ एक ही सीट पर जीत हासिल कर सकी। इन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से नाराज़गी का यह आलम है कि राहुल गांधी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के ‘पुत्रमोह’ को दोषी बता चुके हैं।

मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को पराजित कर सत्ता हासिल की थी, जिसके बाद कहा जा रहा था कि इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और कांग्रेस को दोनों ही राज्यों में करारी हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान में जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे चुनाव हार गये, तो वहीं मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता को हार का सामना करना पड़ा। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी की ऐतिहासिक हार के बाद राहुल गांधी को उम्मीद थी कि इन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा देकर एक उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, लेकिन ना तो राजस्थान और ना ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफ़ा दिया।

राहुल गांधी क्यों नाराज़ हैं यह तो साफ़ हो गया है, और राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नहीं बने रहे रहेंगे यह भी तय है। पर राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहने के बाद कांग्रेस पार्टी के संगठन में बहुत बड़ा परिवर्तन हो सकता है। यह तय है कि जो भी कांग्रेस के नया अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगा। गांधी परिवार का क़रीबी होने के कारण उसके द्वारा लिये गये फ़ैसले गांधी परिवार के फ़ैसले ही माने जाएंगे। ऐसे में हो सकता है कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटते ही पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल कराएं, जिससे कांग्रेस के नेताओं में कड़ा संदेश जाए ति जीत के लिए अब बातें नहीं बल्कि काम करना होगा।