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​यातायात नियमों को तोड़ने पर अब देना होगा ‘तगड़ा जुर्माना’!

16 Jul 2019
सरकार का दावा: नये मोटर व्हीकल संशोधन बिल से सड़क हादसों में आएगी कमी

JULY 16 (WTN) – यदि आप बिना हेलमेट पहनकर गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड करने, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने या ड्रिंक करके गाड़ी चलाने के ‘आदी’ हैं तो अब आपको इन सभी जुर्मों के लिए लिए ‘तगड़ा’ जुर्माना भरना पड़ेगा। ऐसा क्यों, आइये इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं। दरअसल, सड़क हादसों पर ‘लगाम’ लगाने के लिए लोकसभा में नया मोटर व्हीकल संशोधन बिल पेश किया गया है। सरकार का तर्क है कि यातायात नियमों के उल्लंघन में जुर्माना ज़्यादा होने से लोगों में एक ‘डर’ पैदा होगा, जिससे लोग सावधानी से गाड़ी चलाने की ‘आदत’ डालेंगे।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया में सबसे ज़्यादा आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस भारत में ही बनते हैं। एक जानकारी के मुताबिक़ भारत में 30 प्रतिशत ड्राइविंग लाइसेंस ‘बोगस’ हैं। सरकार का ‘प्रयास’ है कि बोगस ड्राइविंग लाइसेंस पर लगाम लगाई जा सके। वहीं रोड हादसों में कमी लाने के लिए मोदी सरकार नया मोटर व्हीकल संशोधन बिल ला रही है। सरकार का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य सड़क हादसों में कमी लाकर लोगों की ज़िन्दगी को ‘सुरक्षित’ करना है। देखा गया है कि भारत में लोग बड़ी ही ‘लापरवाही’ से गाड़ियां चलाते हैं, जिनके कारण सड़क हादसे होते हैं। इन्ही लापरवाहियों के कारण होने वाले सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए सरकार ‘कड़े प्रावधान’ ला रही है, जिससे सड़क हादसों को कम किया जा सके।
 
नये मोटर व्हीकल संशोधन बिल में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माने को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का प्रावधान है। वहीं बिना हेलमेट गाड़ी चलाने पर 1,000 रुपये जुर्माना, और तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जब्त किया जा सकता है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस गाड़ी चलाने पर जुर्माने को बढ़ाकर 500 रुपये से 5,000 रुपये किया गया है। यदि कोई गाड़ी को निर्धारित गति से तेज़ चलाता है तो इस जुर्म के लिए जुर्माने को 500 रुपये से बढ़ाक र 5,000 रुपये कर दिया गया है।
 
वहीं सीट बेल्ट नहीं लगाने पर अब जुर्माना 1,000 रुपये होगा, जबकि पहले यह जुर्माना सिर्फ़ 100 रुपये था। यदि आप मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करते हुए पकड़े गये तो इसके लिए अब 1,000 रुपये की जगह पर 5,000 रुपये जुर्माना देना पड़ सकता है। नये बिल में प्रावधान है कि यदि चालक ने किसी आपातकालीन गाड़ी को रास्ता नहीं दिया तो पहली बार इस तरहा का जुर्म करने पर 10,000 रूपये के जुर्माने का प्रावधान है।
 
देखा गया है कि भारत में नाबालिगों को उनके अभिभावक गाड़ी चलाने देते हैं, जिससे कई बार दुर्घटनाएं होती हैं। नये बिल में प्रावधान है कि यदि कोई नाबालिग गाड़ी चलाते पकड़ा जाता है तो उसके अभिभावक या गाड़ी के मालिक को ‘दोषी’ माना जाएगा। नए मोटर व्हीकल बिल में इस अपराध के लिए 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ 3 महीने की जेल का प्रावधान है। इतना ही नहीं, नाबालिग के गाड़ी चलाए पाए जाने पर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन ‘रद्द’ करने का भी प्रावधान बिल में है।
 
नये बिल में सरकार ने कुछ ‘ज़िम्मेदारियां’ भी तय की हैं। जैसे नये विधेयक में ग़लत रोड डिज़ाइन करने, निर्माण और रखरखाव को लेकर ठेकेदारों पर ‘जुर्माना’ लागू करने का प्रावधान बिल में किया गया है। यदि इस तरह के किसी मामले में ठेकेदार दोषी पाया जाता है तो उस पर एक लाख रूपये के जुर्माने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नये बिल में सड़क हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे में वृद्धि प्रस्तावित है। अब सड़क हादसे में मारे गये मृतकों के परिजनों को मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये मिलेंगे। वहीं गम्भीर रूप से घायलों को 2.5 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चुंकि यह मामला ‘समवर्ती सूची’ का है, इसलिए राज्य सरकारों को इस बिल में ‘फेरबदल’ करने की आज़ादी रहेगी। इस नये बिल को 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों ने मंज़ूरी दी है। वहीं संसद की ज्वाइंट कमेटी और स्टैण्डिंग कमेटी ने भी बिल पर विचार किया है, जिसके बाद ही इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया है।
 
अब देखना होगा कि राज्यसभा में यह बिल पास हो पाता है कि नहीं? वहीं सड़क सुरक्षा के कड़े क़ानून बनने के बाद सड़क हादसों में कमी आ पाती है कि नहीं? यदि इस नये क़ानून से देश में सड़क हादसों में कमी आती है तो इसका श्रेय मोदी सरकार को दिया जा सकता है। आशा की जा सकती है कि नये कड़े क़ानून के बाद लोगों में ‘डर’ पैदा होगा, और वे नियमों का पालन करते हुए ‘सावधानी’ से गाड़ी चलाएंगे।