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भाजपा सांसदों को प्रधानमंत्री मोदी की ‘नसीहत’ के हैं कई मायने!

16 Jul 2019
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अभी से बनाई ‘रणनीति’!
 
JULY 16 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काम के प्रति काफ़ी सख़्त माने जाते हैं, और प्रधानमंत्री मोदी को काम के प्रति लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है। समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रियों, भाजपा सांसदों और अधिकारियों को काम के प्रति लापरवाही ना बरतने के प्रति नसीहत और हिदायत देते रहते हैं। कुछ इसी तरह की नसीहत और हिदायत प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फ़िर से भाजपा सांसदों को दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के भाजपा सांसदों को समझाइश देते हुए कहा है कि सासंदों को राजनीति से हटकर काम करना चाहिए और अपने इलाके के अधिकारियों के साथ बैठक कर जनता की समस्याओं के बारे में बात करनी चाहिए।

मंत्रियों की गैरहाज़िरी पर सख़्ती दिखाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो मंत्री रोस्टर ड्यूटी में उपस्थित नहीं रहते हैं, इसकी पूरी जानकारी शाम तक उन्हें बताना सुनिश्चित किया जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को समझाइश देते हुए कहा कि वे सरकारी काम और योजनाओं में बढ़ चढ़कर भाग लें। इतना ही नहीं सासंदों को सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लेना चाहिए। लेकिन जब संसद चल रही हो तो सांसदों को सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा सांसदों को सुझाव दिया कि सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के लिए कोई एक इनोवेटिव काम ज़िला प्रशासन के साथ करें।
 
प्रधानमंत्री मोदी भाजपा सांसदों को सक्रिय रहने की हिदायत क्यों रहे हैं इसके पीछे काफ़ी बड़ी वजह है। जैसा कि आप जानते हैं कि साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया, और भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के नायक रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी। राजनीति के जानकारों के मुताबिक़ 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोटिंग की थी, जिसके कारण भाजपा को एक बार फ़िर से पूर्ण बहुमत हासिल हो सका है। भारतीय राजनीति के विश्लेषकों के अनुसार इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कई सांसद सिर्फ़ प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के कारण ही जीत हासिल कर सके हैं, नहीं तो उन सांसदों की उनके संसदीय क्षेत्र में छवि काफ़ी नकारात्मक थी।

यह सच है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को फ़िर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोटिंग की थी, जिसके कारण जनता ने इस ओर शायद ज़्यादा ध्यान ही नहीं दिया कि भाजपा प्रत्याशी कैसा है। सूत्रों के मुताबिक़ इस लोकसभा चुनाव में कई भाजपा सांसदों की उनके संसदीय क्षेत्र में रिपोर्ट नकारात्मक थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का जादू जनता पर ऐसा चला कि संसदीय क्षेत्र में सक्रिय ना रहने वाले और काम ना करने वाले भाजपा प्रत्याशी भी लोकसभा का चुनाव जीत गये।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दस साल पूरे हो जाएंगे। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव के वक़्त एनडीए सरकार के ख़िलाफ़ दस साल की सत्ता विरोधी लहर रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि इस सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए भाजपा के सांसद अभी से ही अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में सक्रिय रहें, और ऐसे काम करें जिससे जनता का सीधे तौर पर फ़ायदा हो।

यदि भाजपा सांसद सक्रिय रहेंगे और काम करेंगे तो आम जनता का उनके प्रति नज़रिया लोकसभा चुनाव 2024 के समय सकारात्मक रहेगा, जिससे भाजपा सांसदों की सक्रियता से 10 साल की सत्ता विरोधी लहर को काफी कम किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस जमाने में देश की जनता काफ़ी सक्रिय और सजग है, ऐसे में यदि अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में भाजपा सांसद सक्रिय नहीं रहेंगे तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मोदी नहीं चाहेंगे कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय भाजपा सांसद एक बार फ़िर से सिर्फ़ उनके (मोदी) काम और नाम पर जनता से वोट मांगे। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोच है कि भाजपा सांसद अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहें, जनता के काम करें और जनता की परेशानियों के समय उनके साथ खड़े रहें। ऐसा करने से भाजपा सांसदों की उनके संसदीय क्षेत्र में सकारात्मक छवि बनेगी, जिससे 2024 के लोकसभा चुनाव में दस साल की सत्ता विरोधी लहर का ज़्यादा असर भाजपा को नहीं झेलना पड़ेगा।
 
प्रधानमंत्री मोदी की भाजपा सासंदों को नसीहत के काफ़ी दूरगामी मायने हैं। जब अभी से भाजपा सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे तभी 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसका फ़ायदा मिल सकेगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो देश की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के काम और नाम को देखते हुए भाजपा के पक्ष में जमकर वोटिंग की। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में दस सालों की सत्ता विरोधी लहर का सामना करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के काम और नाम के अलावा भाजपा सांसदों की अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में सक्रियता भी काफ़ी मायने रखेगी। जब यह सब होगा तभी 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा एक बार फ़िर से जीत का सपना देख सकती है, क्योंकि यदि सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में निष्क्रियता दिखाई तो भाजपा के लिए मिशन-2024 काफ़ी मुश्किल हो सकता है।