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‘सुरक्षा कारणों’ को लेकर टिक-टॉक ऐप भारत में हो सकता है प्रतिबन्धित!

22 Jul 2019
भारत में एक बार फ़िर से बैन हो सकता है टिक-टॉक ऐप!

JULY 22 (WTN) – भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफोन है। करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफोन होने के कारण भारत में कई ऐप रातों रात लोकप्रिय हो गये हैं। इन्हीं ऐप्स में से एक ऐप है टिक-टॉक। थोड़े ही समय में टिक-टॉक ऐप भारत में करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया है। टिक-टॉक के लोकप्रिय होने का कारण है शॉर्ट वीडियो बनाने और शेयर करने की सुविधा। लेकिन टिक-टॉक ऐप जितना ज़्यादा लोकप्रिय है, यह ऐप उतना ही विवादित भी है। दरअसल, इस ऐप के ज़रिये अश्लीलता, हिंसा और वैमनस्य फैलाने के आरोप लगते रहते हैं, जिसके बाद एक बार फ़िर इस ऐप पर बैन लगने की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं।

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विवादास्पद सोशल मीडिया ऐप टिक-टॉक के साथ ही हेलो ऐप से सुरक्षा कारण को लेकर जवाब तलब किया है। सरकार ने टिक-टॉक और हेलो से पूछा है कि क्या यह ऐप्स भारत के अंदर डेटा स्टोर करने पर विचार कर रहे हैं या नहीं? इतना ही नहीं, इन ऐप्स से यह भी पूछा गया है कि आठ साल से कम उम्र के यूज़र्स को सम्भावित ख़तरनाक सामग्री के सम्पर्क में आने से रोकने के लिए इन कम्पनियों द्वारा क्या क़दम उठाए जा रहे हैं?

जानकारी के मुताबिक़, यदि टिक-टॉक और हेलो जैसे ऐप्स को बैन होने से बचना है तो उन्हें 22 जुलाई यानि की आज तक इस बारे में अपना जवाब दाखिल करना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आर्थिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक ख़त लिखकर आरोप लगाया है कि टिक-टॉक और इसी तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि स्वदेशी जागरण मंच के लिखे ख़त के बाद ऐप संचालकों को नोटिस भेजा गया है।

टिक-टॉक और हेलो ऐप से आईटी मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि भारत के यूज़र्स से सम्बन्धित किस तरह का डेटा इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के द्वारा एकत्रित किया जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हेलो ऐप पर आरोप है कि इसने अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 11 हजार मॉफ्र्ड (बदले हुए) राजनीतिक विज्ञापनों को डालने के लिए एक बड़ी राशि का भुगतान किया था, इसी के कारण आईटी मंत्रालय ने इससे स्पष्टीकरण मांगा है।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को नाबालिग माना जाता है। ऐसे में सरकार ने टिक-टॉक ऐप से सवाल किया है कि भारत में टिक-टॉक ऐप का इस्तेमाल करने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 13 साल रखने के पीछे क्या तर्क है। हालांकि, इस तरह के सवाल उठने पर टिक-टॉक ऐप ने बच्चों को ऐप पर प्रतिबन्धित करने के लिए ऐज-गेट पेश किया है। इसके बाद मंत्रालय ने टिक-टॉप से पूछा कि यह ऐज-गेट 18 साल के कम आयु के यूज़र्स को भी प्रतिबन्धित करता है कि नहीं। 
 
टिक-टॉक कम्पनी का कहना है कि भारत, कम्पनी के मज़बूत बाज़ारों में से एक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टिक-टॉक ऐप इस समय भारत की 15 भाषाओं में उपलब्ध काफ़ी पॉपुलर ऐप है। लेकिन समय-समय पर टिक-टॉक पर अश्लील और हिंसात्मक वीडियो प्रसारित होने के आरोपों के बाद इसी साल अप्रैल महीने में मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने अन्तरिम आदेश में टिक-टॉक ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद गूगल प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर ने इसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चायनीज़ ऐप टिक-टॉक के क़रीब 100 करोड़ यूज़र्स पूरी दुनिया में हैं। वहीं भारत में ही इस ऐप के क़रीब 30 करोड़ यूज़र्स हैं। अप्रैल महीने में जब इस ऐप पर भारत में बैन लगा था तो इस ऐप की मालिकाना कम्पनी बाइटडांस को हर रोज क़रीब 5 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा था।
 
अब देखना होगा कि सुरक्षा के मद्देनज़र और अश्लीलता और हिंसा फैलाने के आरोप में क्या सरकार टिक-टॉक के भारत में प्रयोग पर प्रतिबंध लगाती है कि नहीं। यदि ऐसा होता है तो इस ऐप के बैन होने से इसके करोड़ों भारतीय यूज़र्स को निराश होना पड़ेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि टिक-टॉक ऐप के ज़रिये लोग फैमस तो हो ही रहे हैं, साथ में पैसा भी काम रहे हैं।