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​अब ट्रेन के जनरल कोच में भी ‘रिज़र्व’ होंगी सीटें!

23 Jul 2019
जनरल कोच में यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने रेलवे की ‘नई’ पहल

JULY 23 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में ट्रेनों के जनरल डिब्बों में सफ़र करना किसी मुसीबत से कम नहीं है। जनरल डिब्बों के सीमित होने और यात्रियों के ज़्यादा होने के कारण उसमें बैठने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की और मारपीट तक हो जाती है। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि जनरल डिब्बों में भी पहले ही बैठने के लिए सीट बुक हो सकती है तो यह पढ़कर आपको आश्चर्य हुआ होगा। दरअसल, कुछ इसी तरह का सफल प्रयोग मुम्बई में किया गया है। क्या है यह प्रयोग आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

देश के दिल्ली और मुम्बई जैसे रेलवे स्टशनों पर जनरल डिब्बों में यात्रा के लिए यात्रियों की भारी भीड़ जुटती है। जनरल डिब्बों की संख्या सीमित होने के कारण उसमें चढ़ने के लिए यात्रियों में मारपीट तक हो जाती है। जनरल डिब्बों में बैठने के लिए यात्रियों को ट्रेन चलने से घण्टों पहले लाइन लगाकर खड़े रहना पड़ता है। आरोप है कि इन स्टेशनों पर कुली और आरपीएफ के कुछ सिपाही पैसे लेकर जनरल डिब्बों की सीटें बेच देते हैं।

इस तरह की कई समस्याएं और शिकायतें सामने आने के बाद आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने ट्रायल के तौर पर मुम्बई से लखनऊ के बीच चलने वाली पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमीट्रिक सिस्टम लागू करने की योजना बनाई। डीजी अरुण कुमार के मुताबिक़, इस तकनीक के इस्तेमाल से भीड़ के क्यू मैनेजमेंट में मदद मिली है और प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की नौबत खत्म हुई। इस तकनीक के प्रयोग से यात्री बड़े ही आसानी से जरनल डिब्बों में सवार होने लगे हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बायोमीट्रिक सिस्टम में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर जनरल डिब्बों में सीटें मिलती हैं। इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल(आरपीएफ) मुम्बई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से पुष्पक एक्सप्रेस में बायोमीट्रिक सिस्टम का ट्रायल कर रहा है। इस प्रयोग के सफल होने के बाद धीरे-धीरे अब अन्य ट्रेनों में भी इस उपाय को लागू कर भीड़ प्रबंधन की तैयारी की जा सकती है।

इस सिस्टम के मुताबिक़ जब यात्री रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगा तो उसे सम्बन्धित ट्रेन में सवार होने के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम का प्रयोग करना होगा। इसके लिए यात्री को बायोमीट्रिक मशीन में अपने प्रिंगर प्रिंट देना होंगे। अपने फिंगर प्रिंट देने के बाद यात्री के लिए सम्बन्धित ट्रेन की जनरल बोगी में सीट रिज़र्व हो जाएगी। एक बार सीट रिज़र्व होने के बाद यात्री को ट्रेन के प्लेटफार्म पर लगने के बाद फिर से अपना फिंगर प्रिंट मैच कराना होगा, जिसके बाद आरपीएफ की ओर से बोगी में यात्री को सीट मिल जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जनरल डिब्बे में यात्रियों के बैठने की जितनी क्षमता होगी, उतनी ही फिंगर प्रिंट मशीन द्वारा सीट रिज़र्व के लिए ली जाएगी। इस तरह पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यात्रियों को आसानी से जनरल डिब्बों में सीट मिल जाएगी। हालांकि, जरनल कोच की सारी सीटें भरने के बाद बाकी यात्री जनरल डिब्बे में खड़े होकर यात्रा कर सकते हैं।

कहा जा रहा है कि आने वाले समय में भीड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर जनरल डिब्बों में सीटों को रिज़र्व करने के लिए बायोमीट्रिक मशीन का सहारा लिया जाएगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल के निर्देश के बाद जरनल डिब्बों में यात्रा करने वाले लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए ही आरपीएफ की ओर से यह पहल की गई है ताकि यात्रियों की भीड़ को मैनेज किया जा सके।

फिलहाल मुम्बई के चार स्टेशनों पर बायोमीट्रिक मशीनें लगा दी गई हैं और पुष्पक एक्सप्रेस में पिछले चार महीने से जारी ट्रायल सफल रहा है। जानकारी के मुताबिक़ अब ज़रूरत के अनुसार उन सभी ट्रेनों की जनरल बोगियों में यात्रियों के प्रवेश के लिए बायोमीट्रिक सुविधा लागू करने की तैयारी है, जिसमें भारी भीड़ के कारण मारपीट की नौबत आ जाती है।