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सार्वजनिक स्थानों पर की स्मोकिंग तो लग सकता है तगड़ा जुर्माना!

24 Jul 2019
पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग करने वालों की अब नहीं है खैर!

JULY 24 (WTN) – यदि आपको सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करने की आदत है तो यह ख़बर आपके लिए एक चेतावनी है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, अब सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करना आपको महंगा पड़ सकता है, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग पर लगने वाले जुर्माने की राशि में जल्द ही वृद्धि हो सकती है। जानकारी के अनुसार सरकार COTPA  (Cigarettes and Other Tobacco Products Act ) एक्ट में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस एक्ट में बदलाव कर सरकार सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करने के जुर्म में जुर्माने की राशि को 200 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये से भी ज़्यादा कर सकती है।
 
केन्द्र सरकार कोटपा एक्ट में कई अन्य बदलाव भी करने जा रही है। जैसे अब नाबालिग को तम्बाकू उत्पाद बेचने पर और भी ज़्यादा जुर्माना लग सकता है। वहीं शिक्षण संस्थानों के आसपास तम्बाकू उत्पाद बेचने पर भी भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों से 100 मीटर की दूरी तक तम्बाकू के उत्पाद नहीं बेचे जा सकते हैं। ऐसा करते पाये जाने पर जुर्माने का प्रावधान है।

पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने कोटपा एक्ट के तहत जुर्माने से क़रीब 5 करोड़ रुपये की रक़म वसूली थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोटपा एक्ट के तहत जुर्माना वसूलने में तमिलनाडु सबसे आगे है। वहीं इस एक्ट के तहत जुर्माना वसूलने के मामले में गुजरात दूसरे स्थान पर है। बात करें बिहार की तो बड़े राज्यों में बिहार से बहुत ही कम जुर्माना कोटपा एक्ट के तहत वसूल किया गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Cigarettes and Other Tobacco Products Act को साल 2003 में भारतीय संसद ने अधिनियमित किया था। इस एक्ट में सिगरेट और तम्बाकू के अन्य उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति, विज्ञापन और वितरण में व्यापार और वाणिज्य के नियमन के लिए प्रावधान किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस अधिनियम को 39 वीं विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा पारित प्रस्ताव को प्रभावी करने के लिए भारतीय संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था। इस एक्ट में तम्बाकू के धुएं के अनैच्छिक जोखिम से गैर-धूम्रपान करने वालों को सुरक्षा प्रदान करने के उपाय लागू  किये गये हैं।

कोटपा एक्ट को द सिगरेट (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1975 [11] के स्थान पर लागू किया गया है। इस एक्ट में सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग के अलावा अन्य तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन पर भी रोक लगाई गई है। जो भी व्यक्ति तम्बाकू उत्पादों का विज्ञापन करता है, पहले बार दोषी पाये जाने पर उसे 2 साल तक जेल या जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है।

जैसा कि आप जानते हैं कि स्मोकिंग सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंधित है। सरकार की मंशा है कि ऐसा करने वालों को और भी हतोत्साहित करने के लिए कड़े प्रावधान किये जाने की ज़रूरत है। देखा गया है कि स्मोकिंग करने वालों के कारण स्मोकिंग ना करने वालों को सिगरेट और बीड़ी के धुएं से परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार का तर्क है कि जुर्माने की राशि बढ़ाए जाने से सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करने वाले डर के कारण ऐसा नहीं करेंगे। सरकार की मंशा तो अच्छी है, लेकिन बड़ा सवाल है कि जिन ज़िम्मेदारों के पास यह ज़िम्मेदारी है क्या वे सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करने वालों पर जुर्माना लगाकर उस ज़िम्मेदारी को सही ठंग से निभा रहे हैं?