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कहीं आप मोबाइल फोन के ‘बंधक’ तो नहीं बन गए हैं?

25 Jul 2019
कहीं आप तो नहीं हैं नोमोफोबिया के शिकार?

JULY 25 (WTN) – आधुनिक इंटरनेट युग में आजकल लगभग हर किसी के पास स्मार्ट मोबाइल फोन है। स्मार्टफोन के जरिये आजकल कहीं जाए बिना ही कई काम ऑनलाइन हो जाते हैं। लेकिन देखा गया है कि स्मार्टफोन के कारण दिनों दिन इंसान की कई आदतें बदलती और बिगड़ती जा रही हैं। एक अध्ययन के मुताबिक़, मोबाइल फोन के ज़्यादा इस्तेमाल से इंसान आलसी होने के साथ-साथ अपने मस्तिष्क का भी कम उपयोग करने लगा है, जो कि चिंता का एक कारण है।
 
यदि आपको बार-बार अपना मोबाइल फोन चेक करने की आदत हैं तो सम्भलिए, क्योंकि आप एक बीमारी से ग्रसित हैं। यह पढ़कर चौक गये होंगे आप कि मोबाइल फोन बार-बार चेक करना क्या कोई बीमारी हो सकती है, तो क्या है यह पूरा मामला आइये आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, देखा गया है कि कई लोगों को बार-बार मोबाइल फोन चेक करने की आदत होती है। नोटिस किया गया है कि कई लोगों को घबराहट होती है कि कहीं उनके मोबाइल की बैटरी तो कम नहीं हो गई है, कहीं फोन का नेटवर्क तो नहीं चला गया है, यदि मोबाइल म्यूट मोड में है तो कोई कॉल या मैसेज तो नहीं आया है।

यदि इन सभी कारणों से आप भी परेशान रहते हैं या फ़िर आपको घबराहट होती है तो ज़रा सावधान, क्योंकि आप एक बीमारी से पीड़ित हैं। दरअसल, बार-बार मोबाइल फोन देखने की आदत एक तरह की बीमारी या फोबिया है, जिसे नोमोफोबिया कहा जाता है। नोमोफोबिया का मतलब है कि नो-मोबाइल-फोन-फोबिया। 
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूके में किये गये एक अध्ययन के मुताबिक़, 53 प्रतिशत मोबाइल फोन यूज़र्स ऐसे हैं, जिनके पास मोबाइल फोन मौजूद न होने के कारण उन्हें परेशानी होने लगती है कि उनका मोबाइल कहां है और सब कुछ ठीक चल रहा है कि नहीं। अध्ययन के मुताबिक़, पाया गया है कि क़रीब 60 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं।

यदि आप अपने मोबाइल फोन के कारण चिंता करते हैं या चिड़चिड़ करते हैं, सांस लेने में आपको परेशानी होती है, आपको सिहरन होती है, आपको जल्दी गुस्सा आता है, आपका किसी काम में मन नहीं लगता है, या अचानक दिल की धड़कन बढ़ जाती है तो यह नोमोफोबिया के ही लक्षण हैं। यह सब तो नोमोफोबिया के शारीरिक लक्षण हैं, इस फोबिया के कुछ भावनात्मक लक्षण भी हैं; जैसे घबराहट होना और डिप्रेशन में चले जाना, आत्मविश्वास का कम होना, किसी पर निर्भर रहना और खुद को अकेला समझना।

यदि आपको बार-बार मोबाइल फोन चेक करने की आदत लग गई है तो आप नोमोफोबिया के शिकार हो गये हैं। दरअसल, यह एक बीमारी ना होकर एक तरह की लत है, जिससे आप अपनी इच्छाशक्ति से छुटकारा पा सकते हैं। यदि आपको बार-बार मोबाइल फोन देखने की आदत लग गई है तो सबसे पहले अपने मोबाइल फोन की नोटिफिकेशन को बंद कर दें। बिना काम के सोशल मीडिया ऐप्स को अनइन्सटॉल कर दें या फ़िर उन्हें म्यूट कर दें। स्मार्टफोन की जगह पर एक सामान्य सा मोबाइल फोन रखें ताकि आप कई तरह के नोटिफिकेशन्स से बच सकें। पूरी कोशिश करें कि बार-बार मोबाइल ना देखना पड़ा। यदि ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो अपने मोबाइल फोन को ज़्यादातर बंद ही रखें।

सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी इच्छाशक्ति से ही कोई व्यक्ति नोमोफोबिया से छुटकारा पा सकता है। वैसे तो यह फोबिया या फिर कहें लत जल्दी लगती है, लेकिन इसे छूटने में काफ़ी वक़्त लगता है। यदि आप इस फोबिया का शिकार हो गये हैं तो हमारी आपको सलाह है कि आप जल्द से जल्द इससे छुटकारा पाने की कोशिश करें, क्योंकि यदि आपने समय रहते इस फोबिया से खुद को आज़ाद नहीं किया तो आपके दिमाग पर गम्भीर मानसिक परिणाम हो सकते हैं।