HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

​जानिए क्या है विक्टर फोर्स?

31 Jul 2019
कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेंगे महेन्द्र सिंह धौनी!
 
JULY 31 (WTN) –2011 क्रिकेट विश्वकप में भारत को अपनी कप्तानी में जीत दिलाने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज़ महेन्द्र सिंह धौनी इन दिनों विक्टर फोर्स में अपनी तैनाती को लेकर चर्चाओं में हैं। महेन्द्र सिंह धौनी ने आज यानी कि 31 जुलाई को 106 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन (पैरा) ज्वाइन कर ली है। विक्टर फोर्स को ज्वाइन करने के दौरान महेन्द्र सिंह धौनी कश्मीर में तैनात रहेंगे। आख़िर क्या है यह विक्टर फोर्स जिसका हिस्सा महेन्द्र सिंह धौनी बने हैं? आइये आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
 
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल महेन्द्र सिंह धौनी की कश्मीर में जबरन ड्यूटी नहीं लगाई है। महेन्द्र सिंह धौनी ने वेस्टइण्डीज़ दौरा छोड़कर विक्टर फोर्स में तैनाती का विकल्प चुना है। धौनी काफ़ी लम्बे समय से टेरिटिरियल आर्मी बटालियन (पैरा) ज्वाइन करने के बाद ट्रेनिंग लेने की योजना बना रहे थे, लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के व्यस्त कार्यक्रम के कारण धौनी इसके लिए समय नहीं निकाल सके। धौनी 31 जुलाई से 15 अगस्त तक विक्टर फोर्स के साथ कश्मीर में ट्रेनिंग में रहेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय राइफल्स, भारतीय सेना का एक प्रमुख अंग हैं। विक्टर फोर्स इसी राष्ट्रीय राइफल्स का एक हिस्सा है जोकि भारतीय सेना के सबसे ख़तरनाक मिशन में से एक है। राष्ट्रीय राइफल्स एक आतंकवाद विरोधी और राजद्रोह विरोधी बल है। राष्ट्रीय राइफल्स में आधे जवान भारतीय सेना की पैदल टुकड़ी से आते हैं, और आधे जवान भारतीय सेना के अन्य हिस्सों से आते हैं। राष्ट्रीय राइफल्स को जम्मू और कश्मीर में तैनात किया जाता है। यह बल कश्मीर में उग्रवाद से लड़ने के लिए और क्षेत्र में कमज़ोर स्थानीय सुरक्षा बलों को बेहतरीन बनाने के लिए समर्पित है। साल 1990 में गठित राष्ट्रीय राइफल्स को भारतीय सेना के तत्कालीन जनरल एस.एफ.रोड्रिग्स और उसके बाद जनरल बी.सी.जोशी ने संवारा।

भारतीय सेना की यह टुकड़ी काउंटर इंसरजेंसी फोर्स (CIF) के तौर पर काम करती है। इसे काउंटर टेरेरिस्ट फोर्स के तौर पर भी जाना जाता है। इस फोर्स की तैनाती जम्मू कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद को देखते हुए की गई थी। राष्ट्रीय राइफल को पांच प्रमुख यूनिट्स में बांटा गया है। रोमियो फोर्स (सीआईएफ-आर) - यह फोर्स राजौरी और पुछ में तैनात है। डेल्टा फोर्स (सीआईएफ-डी) -  यह डोडा में तैनात है। विक्टर फोर्स (सीआईएफ-वी) -  यह अनंतनाग, पुलवामा और बड़गाम में तैनात है। किलो फोर्स (सीआईएफ-के) -  यह कुपवाड़ा, बारामूला और श्रीनगर में तैनात है। यूनीफॉर्म फोर्स (सीआईएफ-यू) -  यह उधमपुर और बनिहाल में तैनात है।
 
जैसा कि हमने आपको बताया कि कश्मीर घाटी के अनंतनाग पुलवामा और बड़गाम में विक्टर फोर्स की तैनाती है, इसमें इनफैंट्री के जवान तैनात किये जाते हैं। इसके अलावा ऑर्डिनेंस, एअर डिफेंस और इंजीनियरिंग विंग के जवान भी इसमें तैनात होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विक्टर फोर्स की ट्रेनिंग एकदम अलग होती है। जिन शहरों, गांवों या जंगलों में उग्रवाद की समस्या होती है, वहां इन्हें तत्काल तैनात किया जाता है। ऐसा इसलिए, क्येांकि उनकी ट्रेनिंग ही इसी पर आधारित होती है। महेन्द्र सिंह धौनी की तैनाती इसी विक्टर फोर्स में होगी, जहां पर वे पेट्रोलिंग, गार्ड और पोस्ट की ड्यूटी करेंगे।
 
राष्ट्रीय राइफल्स को एक अर्धसैनिक बल के रूप में बनाया गया था। इस बल में सेना के अधिकारियों और जवानों की अनेक रेजिमेंट्स को शामिल किया गया है, जैसे राजपूताना राइफल्स, गोरखा रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, मराठा लाइट इन्फैंट्री, सिख लाइट इन्फैंट्री और सिख रेजिमेंट। राष्ट्रीय राइफल्स में अधिकारियों और सैनिकों को 2 से 3 साल की अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। जानकारी के मुताबिक़, राष्ट्रीय राइफल्स कर्मियों को नियमित रूप से सेना के जवानों की तुलना में अतिरिक्त लाभ औऱ 25 प्रतिशत ज़्यादा वेतन हासिल होता है।