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दो वक़्त की रोटी को तरसी पाकिस्तान की ग़रीब जनता

02 Aug 2019
आईएमएफ की कड़ी शर्तों के बाद पाकिस्तान की जनता का जीना हुआ ‘मुश्किल’

AUG 02 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली पूरी दुनिया के सामने जगजाहिर हो चुकी है। दिनों-दिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ख़राब हो गई है। कंगाली की कगार पर पहुंचे पाकिस्तान को आईएमएफ यानी कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से कड़ी आर्थिक शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है। इस बेलआउट पैकेज की कड़ी आर्थिक शर्तों के कारण इन दिनों पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। नये वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में ही पाकिस्तान में महंगाई की दर डबल डिजीट में पहुंच गई है, जो कि पिछले क़रीब 6 सालों में सबसे ज़्यादा है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान में इस महीने में महंगाई दर 10.34 प्रतिशत रही है। वहीं जून के महीने में यह दर 8.9 प्रतिशत थी।
 
भारत में आतंकी गतिविधियों में पैसा बर्बाद करने वाले पाकिस्तान की आर्थिक हालत साल दर साल ख़राब होती जा रही है। किसी भी देश में महंगाई दर का डबल डिजीट में पहुंचना चिंता का कारण होता है, लेकिन पाकिस्तान के शासन को लगता है इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। आज से पहले नवम्बर 2013 में भी पाकिस्तान में महंगाई दर डबल डिजीट में पहुंच गई थी और पाकिस्तान में उस समय महंगाई दर 10.90 प्रतिशत थी।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने इस साल आईएमएफ से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज लिया है। इस बेलआउट पैकेज की शर्तें काफ़ी ही कठिन हैं, जिसके तहत पाकिस्तान सरकार को वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कड़े फ़ैसले लेने पड़ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जानकारों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आईएमएफ पैकेज की कड़ी शर्तों को अपनाने के बाद पाकिस्तान में महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगी।

आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक़ पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और बिजली की क़ीमतों में वृद्धि की है। इतना ही नहीं आईएमएफ की शर्तों के अनुसार इमरान ख़ान सरकार ने टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लिए कुछ ज़रूरी क़दम भी उठाए हैं, जिसके बाद इन्हीं सब कारणों से पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तानी रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले काफ़ी कमज़ोर हुआ है। पाकिस्तान रुपये के अवमूल्यन के कारण विनिर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाला आयातित कच्चा माल भी महंगा हुआ है, इसके कारण भी पाकिस्तान में महंगाई बढ़ी है।

पाकिस्तान के लोगों के लिए आने वाले दिन और भी परेशानी वाले हो सकते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आईएमएफ की और अन्य कड़ी शर्तों को लागू करने के बाद पाकिस्तान में महंगाई दर 11 से 13 प्रतिशत तक पहुंचाने की आशंका है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई के लिए खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में हुई वृद्धि भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है। इतना ही नहीं पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल के दाम और भी बढ़ सकते हैं, जिसके बाद महंगाई और भी बढ़ना स्वाभाविक है।
 
वित्तीय कुप्रबंधन, सरकार में सेना की दखलंदाज़ी और आईएमएफ की कठिन शर्तें दिनों-दिन पाकिस्तान में महंगाई बढ़ा रही हैं। यदि समय रहते इमरान ख़ान सरकार ने वित्तीय प्रबंधन की तरफ़ ध्यान नहीं दिया तो पाकिस्तान की ग़रीब जनता को दो वक़्त की रोटी मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान को अब चीन जैसे उसके मित्र देशों से भी उतनी आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है जो कभी मिला करती थी। ऐसे में पाकिस्तान की जनता के सामने महंगाई की मार को सहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नज़र नहीं आता है।