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अब चीन को धोखा दे रहा है पाकिस्तान!

11 Sep 2019
अमेरिका के दवाब में चीन की सीपीईसी परियोजना पर पाकिस्तान में लगा ‘ग्रहण’!
 
SEP 11 (WTN) – आतंक को बढ़ावा देने वाले देश पाकिस्तान की प्रवृत्ति हमेशा से ही धोखा देने की रही है। पाकिस्तान ने भारत और अफगानिस्तान जैसे देशों को हमेशा ही धोखा दिया है। एक असफ़ल देश के रूप में पूरी दुनिया में पहचाना जाना वाला पाकिस्तान अब चीन को धोखा दे रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान इन दिनों भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। भारत पर दवाब की कूटनीति के तहत चीन हमेशा से ही पाकिस्तान का साथ देता रहा है, लेकिन पाकिस्तान जैसा धोखेबाज देश अब अपने सबसे पुराने सहयोगी चीन को धोखा दे रहा है।
 
दरअसल, पाकिस्तान ने चीन की अरबों डॉलर की महत्वाकांक्षी बेल्ट एण्ड रोड (बीआरआई) के तहत चल रहीं परियोजनाओं की रफ़्तार धीमी कर दी है, जो कि चीन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी की शुरूआत साल 2014 में हुई थी। चीन की क़रीब 60 अरब डॉलर की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चीन के शिनजियांग राज्य से दक्षिणी पाकिस्तान के ग्वादर शहर को जोड़ा जाना था।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि के पाकिस्तान के लिए चीन काफ़ी महत्वपूर्ण देश है। भारत पर कूटनीतिक और सामरिक दबाव बनाने के लिए चीन और पाकिस्तान हमेशा से ही एक दूसरे की सही और ग़लत नीतियों का समर्थन करते रहे हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान की तत्कालीन नवाज़ शरीफ़ सरकार ने चीन के साथ सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा करने की सहमति जताई थी।

पाकिस्तान में सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत ग्वादर बंदरगाह का विकास, पावर प्लांट्स, सड़क निर्माण समेत कई योजनाएं शामिल हैं। लेकिन पाकिस्तान सरकार की सुनियोजित लेटलतीफ़ी के कारण पहले चरण की कई परियोजनाएं अभी तक अधूरी पड़ी हैं, जबकि पहले चरण की परियोजनाओं को पूरा करने की अन्तिम समय सीमा इसी साल की है। जहां पहले चरण की परियोजनाएं ही पूरी नहीं हो सकी हैं, तो दूसरे चरण की परियोजनाओं की बात करना ही बेमानी है। सीपीईसी के तहत दूसरे चरण की परियोजनाओं के तहत विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक ढांचा बनाया जाना है।
 
विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन की महत्वपूर्ण परियोजना सीपीईसी को पाकिस्तान बिना किसी कारण के तो झटका नहीं दे रहा है। वैसे पाकिस्तान ने इस परियोजनाओं में देरी के लिए कोई वजह नहीं बताई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार आर्थिक और राजनीतिक रणनीति और कूटनीति के तहत ही इन परियोजनाओं को समय सीमा में पूरा नहीं करना चाहती है।
 
जानकारों के मुताबिक़, चीन की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर फ़िलहाल कोई प्रगति नहीं हो सकती है, यह बात चीन भी जानता है। चीन यह अच्छी तरह से जानता है कि पाकिस्तान ने फ़िलहाल सीपीईसी की परियोजनाओं को काम को या तो रोका हुआ है, या फ़िर उनके पूरी होने की गति काफ़ी कम है।  

यह सभी जानते हैं कि विश्व व्यापार में वर्चस्व के लिए इन दिनों अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार चल रहा है। पूंजीवादी देश अमेरिका हमेशा से ही साम्यवादी देश चीन की नीतियों के ख़िलाफ़ रहा है। ऐसे में अमेरिका हमेशा से नहीं चाहता है कि पाकिस्तान में चीन का आर्थिक या कूटनीतिक प्रभाव बढ़े। यह बात पाकिस्तान भी अच्छी तरह से जानता है कि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका समेत अमेरिका के प्रभाव वाले विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वित्तीय संस्थानों के नियंत्रण में है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन सीपीईसी योजना के तहत पाकिस्तान के संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग कर रहा है। सीपीईसी में चीनी निवेश के कारण बड़ी तादात में चीनी उपकरण और सामान का आयात किया जा रहा है, जिससे पाकिस्तान का करंट अकाउण्ट घाटा और विदेशी क़र्ज़ बहुत ज़्यादा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की जुलाई में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का कुल विदेशी क़र्ज़ मार्च के महीने में 85.4 अरब डॉलर के बराबर पहुंच गया था। इस क़र्ज़ में क़रीब 25 प्रतिशत हिस्सा चीन से लिया गया है।
 
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की मुख्य वजह पाकिस्तान सरकार का आर्थिक कुप्रबंधन है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आयात में वृद्धि और क़र्ज़ अदायगी के कारण पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भण्डार लगभग खाली हो चुका है। पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2018-19 में विदेशों से 16 अरब डॉलर का क़र्ज़ लिया था ताकि विदेशी मुद्रा की कमी को किसी भी तरह से पूरा किया जा सके। चीन को मिले 16 अरब डॉलर के क़र्ज़ का 42 प्रतिशत हिस्सा चीन से आया था। इसके बाद भी विदेशी मुद्रा भण्डार की आपूर्ति ना होने के बाद पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज हासिल करने में सफ़लता हासिल की थी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने काफ़ी कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज मन्ज़ूर किया है, जिसके बाद सीपीईसी में किये जा रहे ख़र्च को लेकर पाकिस्तान इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के निगाहों में है, जिस पर की अमेरिका का प्रभाव है। साफ़ ज़ाहिर है कि बेतहाशा क़र्ज़ के कारण पाकिस्तान ने सीपीईसी की कई परियोजनाओं की रफ़्तार कम कर दी है। पाकिस्तान के अधिकारी फ़िलहाल सीपीईसी की परियोजनाओं पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान की नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान के क़र्ज़ को देखते हुए कई पाबंदियां लगाई हैं।
 
सीपीईसी की योजनाओं में ढिलाई के पीछे के यह तो थे आर्थिक कारण, लेकिन जानकारों के मुताबिक़ इसके पीछे कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक कारण भी हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में वहां की सेना का वहां की सरकार पर काफ़ी नियंत्रण रहता है। पाकिस्तान की सेना अब सीपीईसी की आलोचना वाली रिपोर्ट्स प्रकाशित करने की ढील दे रही है, जबकि दो साल पहले कोई भी अख़बार सीपीईसी की आलोचना वाले लेख छापने की हिम्मत नहीं कर पाता था। पाकिस्तान सरकार की नीतियों में दखल करने वाली पाकिस्तान सेना ने सीपीईसी की आलोचना को अप्रत्यक्ष रूप से मन्ज़ूरी दे दी है, इसका मतलब है कि वह अब इस बारी भरकम परियोजना से ख़ुद के क़दम पीछे खींचना चाहती है।
 
दरअसल, पाकिस्तान में अब चीन की सीपीईसी परियोजना के ख़िलाफ़ विरोध शुरू हो गया है। एक समय था जब पाकिस्तानियों को लगता था कि सीपीईसी परियोजना पाकिस्तानियों के लिए क्रान्तिकारी परिवर्तन लेकर आएगी। लेकिन धीरे-धीरे पाकिस्तानियों के समझ आ रहा है कि चीन की इस परियोजना से उनका उतना भला नहीं होना है, जितना कि वे सोच रहे हैं। पाकिस्तानियों का अब यह सोचना है कि सीपीईसी परियोजना पूरी तरह से चीन की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करती है।
 
चीन की सीपीईसी परियोजना का बलूचिस्तान में जमकर विरोध हो रहा है। कुछ दिनों पहले ग्वादर के एक लग्ज़री होटल में बलूचों ने हमला किया था, जिसमें चीनी नागरिक बाल-बाल बचे थे। चीन समय-समय पर पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं जाहिर कर चुका है, लेकिन आतंकियों की पनाह स्थली पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी पाकिस्तान सरकार भी नहीं ले सकती है।
 
वहीं अमेरिका, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ शान्ति समझौते में पाकिस्तान की मदद चाहता है। ऐसे में पाकिस्तान इस मौक़े को अमेरिका के क़रीब जाने में इस्तेमाल करना चाहता है। अमेरिका शुरू से ही चीनी की सीपीईसी परियोजना का विरोध करता रहा है, जिस कारण पाकिस्तान ने अमेरिका की चिंताओं को देखते हुए फ़िलहाल चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना को ठण्डे बस्ते में डाल दिया है।
 
साफ़ जाहिर है कि पाकिस्तान सरकार एक तरह से चीन को धोखा दे रही है। चीन और अमेरिका, इन दोनों ही देशों को पाकिस्तान खुश रखना चाहता है ताकि उसकी आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक मदद होती रहे। लेकिन इस समय पाकिस्तान के सामने कठिन सवाल यह है कि वो भारत को साधने के लिए चीन का साथ दे, या फ़िर आर्थिक मदद हासिल करने के लिए अमेरिका की बातें माने। ख़ैर जो भी हो, लेकिन सीपीईसी में चीन के अरबों डॉलर इनवेस्ट कराकर और अब परियोजना के कामों की रफ़्तार धीमी कर पाकिस्तान ने चीन को एक तरह से धोखा ही दिया है।