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क्या भारत फ़िर से ईरान से शुरू कर सकता है तेल आयात?

17 Sep 2019
सऊदी तेल संयंत्र संकट के बाद भारत की चिंता बढ़ी

SEP 17 (WTN) – दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी अरामको के दो संयंत्रों पर सऊदी अरब में ड्रोन हमला होने के बाद से पूरी दुनिया को होने वाली तेल सप्लाई को तगड़ा झटका लगा है। हमले के बाद से कच्चे तेल की क़ीमतों में क़रीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। कच्चे तेल के दामों में इतनी वृद्धि 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद पहली बार हुई है। लेकिन पूरी दुनिया को चिन्ता है कि यदि समय रहते सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल नहीं हुई, तो पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति बुरी तरह से बाधित होगी। ऐसे में भारत जैसे देशों की चिन्ता काफ़ी बढ़ गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर हमले के बाद सऊदी अरब का कुल आधा उत्पादन प्रभावित हुआ है, वहीं वैश्विक आपूर्ति के पांच प्रतिशत हिस्से के उत्पादन में बाधा आई है। इतना ही नहीं, सऊदी अरब ने आपातकाल के लिए जो 20 लाख बैरल प्रति दिन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता रखी है, वह उसका भी इस्तेमाल किन्हीं कारणों से नहीं कर पाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब एकमात्र ऐसा देश है, जिसने इमरजेंसी के  लिए इतनी ज़्यादा अतिरिक्त क्षमता रखी है।
 
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस हमले से पहले OPEC (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) की कुल वैश्विक आपूर्ति 3.21 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbpd) थी। इसमें से अकेले सऊदी अरब 2.27 mbpd की आपूर्ति करता था। 
 
इन दिनों तेल उत्पादन में दिनों-दिन कटौती देखने को मिल रही है। OPEC और रूस पहले से ही उत्पादन में कटौती कर रहे हैं, ताकि क़ीमतों में और गिरावट को रोका जा सके। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि कुछ समय पहले बाज़ार में तेल की ओवरसप्लाई हो गई थी। इस कटौती के द्वारा आपूर्ति में 1.2 mbpd की कमी लाने का लक्ष्य था, जिसमें से ज़्यादातर कटौती सऊदी अरब से ही की गई है। लेकिन अब इमरजेंसी में उस फ़ैसले को तत्काल पलटा नहीं जा सकता है। रूस जैसे गैर OPEC देश भी सिर्फ़ 1 से 1.5 लाख bpd अतिरिक्त उत्पादन कर सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमलों के बाद तेल की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तेल की आपूर्ति के लिए ईरान के पास अतिरिक्त क्षमता है, लेकिन उस पर अमेरिकी ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिसके काऱण उसके तेल का इस्तेमाल बाकी दुनिया नहीं कर सकती है। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद से ईरान के तेल निर्यात में 20 mbpd की गिरावट आ चुकी है।

इधर दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला की तेल इण्डस्ट्री पर भी अमेरिका का प्रतिबंध लगा हुआ है। जानकारी के मुताबिक़, पिछले वर्षों में वेनेजुएला के उत्पादन में काफी गिरावट आई है। यदि अमेरिका प्रतिबंध हटा भी देता है, तो भी वहां की सरकारी कम्पनी PDVSA उत्पादन बढ़ा पाने में सक्षम नहीं है।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ सालों में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक देश बन गया है और वो अब सऊदी अरब से भी आगे निकल चुका है। जून के महीने में अमेरिका ने सऊदी अरब से ज़्यादा कच्चा तेल निर्यात किया है। सऊदी अरब के तेल संकट के बाद तेल की क़ीमतें बढ़ने पर अमेरिका के शेल उत्पादक तेज़ी से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इसमें भी कई महीने लग जाएंगे।

पूरी दुनिया को आशा है कि जल्द से जल्द सऊदी अरब के क्षतिग्रस्त तेल संयंत्रों को ठीक कर लिया जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो सके। लेकिन इस सबके बीच बड़ा सवाल है कि यदि तेल आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल होने में परेशानी होती है, तो क्या भारत, अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए ईरान से कच्चा तेल का आयात फ़िर से शुरू कर सकता है?
 
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध के बाद से भारत, ईरान से तेल आयात नहीं कर पा रहा है। ईरान भारतीय रूपयों में भी तेल निर्यात के लिए तैयार है। ऐसे में कच्चे तेल के दामों में बेतहाशा वृद्धि के बाद आम जनता को राहत देने के लिए क्या मोदी सरकार ईरान से तेल आयात फ़िर से शुरू कर सकती है?

आपात स्थिति में मोदी सरकार यदि ऐसा करती है तो इससे भारत में तेल के दामों में हो रही बेतहाशा वृद्धि पर रोक लगेगी। पर यदि भारत ऐसा करता है तो स्वाभाविक है कि इससे अमेरिका नाराज़ होगा। ख़ैर परिस्थिति तो यही कहती है कि यदि तेल के दामों में बेतहाशा वृद्धि होती है, तो पहले से ही मंदी में चल रही भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए भारत सरकार अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए ईरान से तेल आयात कर सकती है।