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जानिए आख़िर क्यों ई-सिगरेट पर सरकार ने लगाया है प्रतिबन्ध?

19 Sep 2019
ई-सिगरेट के इस्तेमाल से आ सकता है हार्ट अटैक, ब्लड क्लॉटिंग की हो सकती है समस्या

SEP 19 (WTN) – नशा कोई भी हो, वो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होता है। तम्बाकू, हुक्का, बीड़ी और सिगरेट के रूप में पारम्परिक नशा सालों से होता आ रहा है। लेकिन आधुनिक जम़ाने में नशा भी अब पारम्परिक ना होकर इलेक्ट्रॉनिक हो गया है। आपने ई-सिगरेट और ई-हुक्के के बारे में तो सुना ही होगा। जैसा कि आप जानते हैं कि आधुनिक युवा पीढ़ी में ई-सिगरेट का क्रेज काफ़ी बढ़ता ही जा रहा था।

मेट्रो सिटीज़ के युवा वर्ग में धीरे-धीरे ई-सिगरेट का नशा करने की प्रवृत्ति बढ़ने के बाद, केन्द्र सरकार ने अब ई-सिगरेट पर बैन लगा दिया है। आख़िर क्यों सरकार ने ई-सिगरेट पर बैन लगाया है? क्या होती है ई-सिगरेट? क्या यह पारम्परिक सिगरेट से ज़्यादा हानिकारक है? आपके मन में इस तरह के कई सवाल उठ रहे होंगे, तो इन सभी सवालों के जवाब हम आपको देते हैं।

ई-सिगरेट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए केन्द्र सरकार ने ई-सिगरेट के उपयोग, उसके बनाने और बेचने, उसके निर्यात, स्टाक, विपणन और विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। जो भी व्यक्ति ई-सिगरेट पर बनने वाले नये नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा, उसे एक साल तक की जेल और/या 1 लाख रुपये के जुर्माना का प्रस्ताव है। वहीं एक से ज़्यादा बार नियम तोड़ने पर 5 लाख रुपये जुर्माना और/या 3 साल तक जेल प्रस्तावित है।

आप सोच रहे होंगे कि पारम्परिक बीड़ी और सिगरेट पर सरकार प्रतिबंध नहीं लगाती है, लेकिन क्या कारण है कि सरकार ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगा दिया है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-सिगरेट, पारम्परिक सिगरेट से ज़्यादा हानिकारक होती है। सबसे पहले आपको बताते हैं कि आख़िर ई-सिगरेट होती क्या है और यह काम कैसे करती है? ई-सिगरेट यानी कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) का सबसे सामान्य रूप है।
 
दरअसल, ई-सिगरेट एक उपकरण होता है जो कि बैटरी से सन्चालित होता है। ई-सिगरेट शरीर में निकोटिन पहुंचाने के लिए बैटरी से उत्पन्न बिजली का इस्तेमाल करती है। पारम्परिक सिगरेट में तम्बाकू के पत्तों को जलाया जाता और उसके धुएं को मुंह में लिया जाता है। लेकिन ई-सिगरेट में तम्बाकू के पत्तों को जलाया नहीं जाता है। इसमें एक एलईडी बल्ब होता है, जो कि बैटरी की मदद से जलता है। इसी बल्ब की मदद से निकोटीन गर्म होकर लिक्विड भाप बनाता है। ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने वाले निकोटीन की इसी भाप को मुंह में खींचते हैं, ना कि पारम्परिक सिगरेट की तरह तम्बाकु के धुएं को।

आपकी जानकारी के लिए एक महत्वपूर्ण बात बता दें कि पारम्परिक सिगरेट और ई-सिगरेट में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि पारम्परिक सिगरेट में तम्बाकू का इस्तेमाल होता है, जबकि ई-सिगरेट में निकोटीन का इस्तेमाल होता है। ई-सिगरेट का इस्तेमाल करे वाले तम्बाकू से होने वाले नुकसान से तो बच जाते हैं, लेकिन निकोटीन से होने वाले नुकसान से नहीं बच पाते हैं।

लम्बे समय तक ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ई-सिगरेट के इस्तेमाल से ब्लड क्लॉटिंग की गम्भीर बीमारी हो सकती है। वहीं ई-सिगरेट में निकोटीन की मात्रा ज़्यादा होती है, जिस कारण से ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, ई-सिगरेट के इस्तेमाल से तनाव और अवसाद की भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ई-सिगरेट के लगातार सेवन से हार्ट अटैक का भी ख़तरा रहता है।

पर आप सोच रहे होंगे कि जब पारम्परिक सिगरेट से भी स्वास्थ्य को हानि होती है, तो आख़िर क्यों नहीं सरकार ने पारम्परिक सिगरेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 का उल्लंघन है। इस एक्ट के तहत एक ख़ास तरह का निकोटीन ही स्मोकिंग के लिए स्वीकार्य है। वहीं जिस कैटेगरी की निकोटीन ई-सिगरेट में इस्तेमाल होती है वह प्रतिबन्धित है।

ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध की योजना काफ़ी समय से बन रही थी। साल 2018 में केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध लगाने पर विचार करने के लिए कहा था। जिसके बाद 15 राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश ने ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। साफ़ ज़ाहिर है कि ई-सिगरेट के हानिकारक प्रभाव से इसके इस्तेमाल करने वालों को बचाने के लिए ही केन्द्र सरकार ने ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध लगा दिया है।