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नरेन्द्र मोदी की ‘विदिशा’ कूटनीति से ‘दिशा हीन’ हुआ पाकिस्तान का कश्मीर एजेण्डा

28 Sep 2019
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति से पूरी दुनिया में खुली पाकिस्तान की पोल

SEP 28 (WTN) – भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कितने चतुर, समझदार और परिपक्व राजनेता हैं, इसके बारे में सभी भारतीय जानते हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक रणनीति के कारण ही नरेन्द्र मोदी विपक्ष को बुरी तरह से हराने में सफ़ल रहे हैं। लेकिन जितने चतुर नरेन्द्र मोदी देश की राजनीति में हैं, उससे कहीं ज़्यादा चतुर और समझदार नरेन्द्र मोदी विदेश नीति में हैं।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाकर ऐतिहासिक फ़ैसला लिया है, ताकि राज्य की जनता को और भी ज़्यादा सुविधाएं मिल सकें। लेकिन भारत सरकार के इस आंतरिक फ़ैसले के बाद इसका विरोध करते हुए पाकिस्तान ने पूरी दुनिया में शोर मचाकर इस मुद्दे का विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की हर नापाक चाल को नाकामयाब कर रहे हैं। पाकिस्तान ने दुनिया के हर राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मंच पर कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की, लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति ने पाकिस्तान के हर मंसूबे को फेल कर दिया है।

लेकिन संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में जिस "विदिशा कूटनीति" से प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पोल खोली है, ऐसे मिसाल शायद ही मिले। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सम्मेलन में जहां भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में शान्ति और सद्भाव की बात की, वहीं इमरान ख़ान कश्मीर में दंगे से लेकर परमाणु युद्ध तक की बात करते नज़र आए। अपने भाषण में इमरान ख़ान ने कश्मीर मुद्दे पर जमकर प्रोपेगैंडा करने की कोशिश की, लेकिन मौक़ा मिलने पर भारत ने पाकिस्तान की पूरी दुनिया के सामने पोल खोलकर रख दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को चतुराई और योजनाबद्ध तरीक़े से पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में इमरान ख़ान के युद्धोन्माद भरे भाषण के बाद भारत ने Right to Reply के तहत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को जोरदार जवाब दिया है। भारत यदि चाहता तो भारतीय विदेश सेवा के किसी बड़े अधिकारी के ज़रिये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को Right to Reply के तहत जवाब देता, लेकिन भारत ने कूटनीति के तहत इसकी ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र में अपनी सबसे नई ऑफिसर विदिशा मैत्रा को दी।

विदिशा मैत्रा UN में भारत की प्रथम सचिव हैं और यूएन मिशन में वो भारत की सबसे नई अधिकारी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लगता है कि कूटनीति के तहत ही यूएन मिशन में भारत की सबसे नई अधिकारी विदिशा मैत्रा को यह ज़िम्मेदारी दी, ताकि पूरी दुनिया के सामने यह सन्देश दिया जाए कि इमरान ख़ान और उनकी युद्धोन्माद की बातें भारत के लिए कोई बड़ी बात नहीं है, और इमरान ख़ान की इन गैर ज़िम्मेदार बातों का जवाब यूएन मिशन में भारत की सबसे नई अधिकारी ही दे सकती है। 2008 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी विदिशा ने जिस तरह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को जवाब दिया है, उसकी हर कहीं तारीफ़ हो रही है।

भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी विदिशा मैत्रा ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की जमकर धज्जियां उड़ाई। भारत का पक्ष रखते हुए विदिशा ने कहा, “क्या इमरान ख़ान इस बात से इनकार कर सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी करार दिए गए 130 आतंकी और 25 आतंकी संगठन इस समय पाकिस्तान में हैं? पाकिस्तान दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी करार दिए गए शख्स को पेंशन देता है और ऐसे शख्स को संयुक्त राष्ट्र ने अल कायदा और ISIS जैसे आतंकियों की लिस्ट में रखा है।”
 
भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाने पर विदिशा ने इमरान ख़ान को जमकर लताड़ा। विदिशा ने भारत सरकार का पक्ष रखने हुए कहा, “मानवाधिकार की आवाज़ बुलंद करने का दावा करने वाले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत से घटकर सिर्फ़ 3 प्रतिशत रह गई है।” विदिशा ने आगे कहा, “पाकिस्तान को अपना इतिहास नहीं भूलना चाहिए और याद रखना चाहिए कि 1971 में उन्होंने अपने लोगों के साथ क्या किया था।” विदिशा मैत्रा ने इमरान ख़ान की पूरी दुनिया के सामने पोल खोलते हुए कहा, “क्या प्रधानमंत्री इमरान ख़ान न्यूयॉर्क शहर को ये बात बताना नहीं चाहेंगे कि वे ओसामा बिन लादेन के खुलेआम समर्थक रहे हैं?”

इतना ही नहीं विदिशा ने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा कि इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का ग़लत इस्तेमाल किया है और उनका भाषण नफरत से भरा है। विदिशा ने इमरान ख़ान को उनकी ज़िम्मेदारी का अहसास दिलाते हुए कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जिस तरह से बार-बार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते हैं, वो एक राजनेता का व्यवहार नहीं है  बल्कि एक छोटे नेता का व्यवहार है।”
 
इतना ही नहीं, विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर कटाक्ष करते हुए उन्हें नियाजी सम्बोधित करते हुए कहा. “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह समझना चाहिए कि आज के लोकतंत्र में नरसंहार की कोई जगह नहीं है।” विदिशा ने पाकिस्तान को उसका इतिहास याद दिलाते हुआ कहा, “पाकिस्तान को 1971 की घटनाएं नहीं भूलनी चाहिए, जब लेफ्टिनेंट जनरल ए.के.नियाजी ने बांग्लादेश में अपने ही नागरिकों पर क्या जुल्म ढाया था।”

विदिशा मैत्रा ने इमरान ख़ान को उनकी औकात याद दिलाते हुए कहा, “जहां पाकिस्तान आतंकवाद और नफरत की बात कर रहा है, वहीं पर भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा है। भारत के लोगों को वैसे शख्स से भाषण की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है, जो नफरत की विचारधारा का पालन करते हुए आतंक को उद्योग का रूप दे चुका है।”
 
जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सबसे नई ऑफिसर विदिशा मैत्रा के ज़रिये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और उनकी विचारधार को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया है और भारत सरकार का पक्ष मज़बूती के साथ रखा है, कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ख़ुद को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का भी एक बड़ा कूटनीतिक खिलाड़ी साबित कर दिया है। भारतीय विदेश सेवा की एक जूनियर अधिकारी विदिशा मैत्रा ने जिस तरह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को उनकी हैसियत याद दिलाई है, इस ना तो इमरान ख़ान और ना ही पूरा पाकिस्तान कभी भूल पाएगा।