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ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने पर सबसे करें ‘यह’ काम!

18 Oct 2019
आपकी ‘इन ग़लतियों’ से आपका बैंक अकाउण्ट हो सकता है ख़ाली

OCT 18 (WTN) – एक समय था जब बैंकिंग सम्बन्धित कामों के लिए आपका काफ़ी वक़्त बैंक में लगने वाली लाइनों में बीतता था। बैंक से सम्बन्धित कामों के लिए समय के साथ-साथ बैंक आने-जाने में पैसा तो ख़र्च होता ही था, नौकरी-व्यापार का काम छोड़कर बैंक में वक़्त ख़राब होता था। लेकिन देश में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा आने के बाद से बैंक उपभोक्ताओं को काफ़ी सहूलियतें मिली हैं। बैंक के जिन कामों के लिए काफ़ी वक़्त बैंक में ख़राब करना पड़ना था, वे ही काम आजकल इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिये आसानी से स्मार्टफ़ोन और कम्प्यूटर पर हो जाते हैं।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय यूज़र्स की असावधानी के कारण उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जीहां, ऐसे कई केस हो चुके हैं जिसमें इंटरनेट बैंकिंग यूज़र्स की ग़लती के कारण उसके अकाउण्ट की जानकारी हैकर्स को पता चल गई और उसके अकाउण्ट से शॉपिंग कर ली गई। ऐसे में यदि आप भी इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए भी सावधान और सतर्क रहने की काफ़ी ज़रूरत है। क्योंकि यदि आपने ग़लती की या फ़िर असावधानी बरती, तो आपके बैंक अकाउण्ट को हैकर्स खाली कर सकते हैं।

ऑनलाइन फ्राड से यूज़र्स सिर्फ़ और सिर्फ़ ख़ुद की सावधानी से ही बच सकते हैं। सबसे पहले तो यदि आपको बैंक के नाम कोई भी ई-मेल, मैसेज या फ़िर कॉल आए तो सावधान रहें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंक कभी भी ई-मेल, मैसेज या फ़िर कॉल के ज़रिये उपभोक्ताओं से उनकी निजी जानकारी नहीं मांगते हैं और ना ही निजी जानकारी को कन्फर्म करते है। याद रखिये कि यदि आपको बैंक से सम्बन्धित कोई भी काम है, तो आप बैंक को उन्हीं नम्बर्स से कॉल करें, जो कि उनकी अधिकृत वेबसाइट्स पर लिखे होते हैं। या फ़िर उन्हीं नम्बर्स के ज़रिये बैंक से सम्पर्क करना चाहिए जो आपको किसी विश्वसनीय सोर्स से मिले हों।
 
यदि आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसमें आपका सावधान रहना काफ़ी ज़रूरी है। हमेशा अपने स्मार्टफ़ोन या फ़िर घर के इंटरनेट कनेक्शन से ही बैंकिंग सम्बन्धित काम करें। ऑफिस या नेट कैफे के ज़रिये यदि इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल ज़रूर करें। बैंक की वेबसाइट टाइप करने के बाद ही उसे ओपन करें और पासवर्ड आदि के लिए वर्चुअल कीबोर्ड का इस्तेमाल करें। याद रखें कि बैंक की वेबसाइट https से शुरू होना चाहिए।
 
इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतने के बाद भी यदि आपको लगे कि आपके बैंक अकाउण्ट से सम्बन्धित जानकारी का कुछ ग़लत इस्तेमाल हुआ है, तो सबसे पहले अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक कराएं। इसके बाद आपके साथ हुए फ्रॉड की पूरी जानकारी तुरन्त ही पुलिस को दें।  
 
यदि आपके साथ बैंकिग फ्रॉड हुआ है तो इसके शिकायत बैंक और पुलिस स्टेशन में करने के दौरान आपके पास पिछले 6 महीने का स्टेटमेंट, फ्रॉड से सम्बन्धित एसएमएस, ई-मेल या कॉल का रिकॉर्ड होना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक ​के नियमों के मुताबिक, स्कैमिंग या फिशिंग के ज़रिए होने वाले फ्रॉड की जानकारी तीन दिन के अन्दर ही बैंक को देना चाहिए। यदि पीड़ित ऐसा करता है तो इससे उसका कोई नुकसान नहीं होगा। वहीं यदि अगर फ्रॉड होने के 7 दिनों के अन्दर आप ​सूचित करते हैं तो फ़िर इस मामले में आपकी लेनदारी ​सीमित रहेगी।
 
रिज़र्व बैंक के नियमों के मुताबिक़, अगर आपने बैंक को इस तरह के किसी फ्रॉड की जानकारी समय से दे दी है, तो नियमानुसार बैंक को 10 दिन के अन्दर आपकी रक़म आपके बैंक अकाउण्ट में डाल देना चाहिए। वहीं इस मामले से जुड़े विवाद का निपटारा भी 90 दिनों में हो जाना चाहिए।

तो हमारी आपको सलाह है कि इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतें और कभी भी किसी भी तरह के ई-मेल, मैसेज या कॉल के ज़रिये अपनी व्यक्तिगत या फ़िर बैंक अकाउण्ट सम्बन्धित जानकारी ना दें। वहीं यदि ग़लती से भी आप ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो इसकी शिकायत जल्द से जल्द सम्बन्धित बैंक और पुलिस स्टेशन में करें। याद रखिए, आपकी सावधानी में ही आपकी सुरक्षा है।