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मोदी सरकार ला रही है अब तक का सबसे ऐतिहासिक क़ानून!

26 Oct 2019
आपकी सम्पत्ति की रक्षा के लिए मोदी सरकार का ‘बड़ा क़दम’

OCT 26 (WTN) – 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कई समय तक इस बात की चर्चा रही थी कि मोदी सरकार अचल सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई ऐतिहासिक क़ानून बनाने जा रही है। साहसिक निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह का कोई भी फ़ैसला अपने पहले कार्यकाल में नहीं लिया। लेकिन नोटबंदी, जीएसटी, तीन तलाक़ और अनुच्छेद 370 जैसे बड़े फ़ैसले लेने वाले नरेन्द्र मोदी अब अचल सम्पत्ति के मामले में एक ऐसा क्रान्तिकारी फ़ैसला लेने वाले हैं, जिससे प्रॉपर्टी की ख़रीद-फ़रोख़्त में फर्जीवाड़ा और बेनामी सम्पत्ति जैसी परेशानियां हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएंगी।
 
दरअसल, मोदी सरकार एक बहुत बड़ा निर्णय लेने जा रही है, जिसके तहत प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए क़ानून बनाया जा रहा है। इस नये क़ानून के तहत प्रॉपर्टी यानी कि अचल सम्पत्ति के मालिकाना हक़ के लिए उसे आधार कार्ड से लिंक कराना ज़रूरी होगा। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फ़ैसले से देश में मकान और ज़मीन की ख़रीददारी में धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी और इससे बेनामी सम्पत्ति का खुलासा होगा।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए मोदी सरकार ने क़ानून पर ड्राफ्ट तैयार कराया है। इसके लिए बाक़ायदा पांच सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमिटी भी गठित हो चुकी है। इस क़ानून के सिलसिले में कमिटी राज्यों से समन्वय करेगी, क्योंकि प्रॉपर्टी से जुड़े मामले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में होते हैं।। कहा जा रहा है कि प्रॉपर्टी ओनरशिप के मामले में केन्द्र सरकार एक मॉडल क़ानून बनाकर राज्यों को देगी।
 
आप सोच रहे होंगे कि मोदी सरकार द्वारा लागू किये जा सकने वाले इस नये क़ानून से किसे और क्या फ़ायदा होगा? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो भी व्यक्ति अपन अचल सम्पत्ति को आधार नम्बर से लिंक कराएगा, यदि उसकी सम्पत्ति पर कोई कब्ज़ा करता है तो उसे छुड़ाने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी। या फ़िर सरकार किसी की ज़मीन का अधिग्रहण करती है तो सम्पत्ति के आधार से लिंक होने से सही व्यक्ति को इसका मुआवज़ा मिल सकेगा।
 
वहीं यदि किसी की सम्पत्ति आधार से लिंक नहीं है तो उसकी किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी सरकार नहीं लेगी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अचल सम्पत्ति को आधार नम्बर से लिंक कराना वैकल्पिक होगा। जो लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी सम्पत्ति की रक्षा करे और उसकी गारण्टी ले तो ऐसे व्यक्तियों को अपनी अचल सम्पत्ति को आधार नम्बर से लिंक कराना ही होगा। इस चर्चित क़ानून को दो तरीक़ों से लागू किया जाएगा। पहला तरीक़ा यह होगा कि सम्पत्ति बेचते समय या ट्रांसफर करते समय उसे आधार से लिंक कराना होगा। वहीं दूसरा तरीक़ा होगा कि इसे ज़िलेवार लागू कराया जाएगा।
 
जानकारी के मुताबिक़, इस प्रक्रिया के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस में खसरा नम्बर के आधार पर टाइटल जनरेट कराना होगा और इसे आधार नम्बर से लिंक कराना होगा। इस नये क़ानून के बारे में कहा जा रहा है कि इसके लागू होने से ज़मीन का रिकॉर्ड अपडेट हो सकेगा। वहीं नया क़ानून बनने के बाद पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे बायोमैट्रिक तरीक़े से घर बैठे ही प्रॉपर्टी बेची जा सकेगी। हालांकि, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में एक महीने का वक़्त लगेगा।
 
दावा किया जा रहा है कि प्रॉपर्टी को आधार नम्बर से लिंक कराने से प्रॉपर्टी मालिक को बहुत फ़ायदा होगा। इससे एक तरफ़ तो अवैध कब्जों से सुरक्षा मिलेगी और यदि कब्जा हो भी जाता है तो उस कब्जे को हटाने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी, वहीं प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराने से प्रॉपर्टी मालिक को आसानी से लोन मिल सकेगा। वहीं प्रॉपटी के आधार नम्बर से लिंक होने से ज़मीन सम्बन्धित विवाद ख़त्म होंगे।

यदि मोदी सरकार इस तरह का कोई क़ानून ला रही है, तो इससे सरकार को सबसे ज़्यादा फ़ायद होगा। सबसे पहले तो आधार नम्बर से प्रॉपर्टी लिंक कराने से स्पष्ट हो सकेगा कि किस ज़मीन पर किसका मालिकाना हक़ है। वहीं ऐसा होने से प्रॉपर्टी की सूचनाएं पारदर्शी होंगी और ज़मीन के मालिक और प्रॉपर्टी सम्बन्धित सूचनाएं रियल टाइम अपडेट होंगी। चूंकि आधार नम्बर से प्रॉपर्टी लिंक होगी तो ज़मीन पर दावा सम्बन्धित विवाद कम होंगे। यदि मोदी सरकार प्रॉपर्टी को आधार नम्बर से लिंक कराने का कोई क़ानून बनाने जा रही है तो इसे मोदी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा फ़ैसला कहा जा सकता है।