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जल्द आसान हो सकती है दुर्घटना बीमा दावा करने की प्रक्रिया

04 Nov 2019
ग्राहकों की सुविधा के लिए IRDAI उठा सकती है बड़ा क़दम
 
NOV 04 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि गाड़ियों का दुर्घटना के बाद उसका बीमा हासिल करने की प्रक्रिया कितनी पेचीदा, कठिन और लम्बी है। ऐसे में मोटर इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट को आसान बनाने की प्रक्रिया को और भी आसान बनाने के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने सेल्फ-असेस्मेंट डैमेज की लिमिट को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
 
कहा जा रहा है कि यदि ऐसा होता है तो जल्द ही मोटर इंश्योरेंस के 75 हज़ार रुपये तक के क्लेम पर नुकसान के मूल्यांकन के लिए किसी सर्वेयर की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। वहीं दावा किया जा रहा है कि ऐसा होने से ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस क्लेम में समय भी कम लगेगा और इससे उनका काम भी जल्दी हो जाएगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि फ़िलहाल 50,000 रुपये से ऊपर के मोटर इंश्योरेंस और 1 लाख रुपये से ज़्यादा के अन्य दावों के लिए इंश्योरेंस सर्वेयर और लॉस एसेसर्स की सेवाएं लेना ज़रूरी है। आपको पता हो कि जब बीमा के दावे के आकलन के लिए सर्वेयर की नियुक्ति की जाती है तो उसे दावे की समीक्षा और रिपोर्ट जमा करने के लिए तीस दिन क समय दिया जाता है। लोगों को शिकायत है कि इससे दावों के निस्तारण और निराकरण में देरी होती है, क्योंकि बीमा कम्पनी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही कोई फ़ैसला लेती है।

दावों के निस्तारण और निराकरण में देरी की शिकायतें मिलने के बाद हो सकता है कि IRDAI की सिफ़ारिशों को मान लिया जाए। यदि ऐसा होता है तो मोटर इंश्योरेंस के लिए 75 हज़ार रुपये और नॉन- मोटर इंश्योरेंस के मामलों में 1.50 लाख रुपये तक का दावा ग्राहक ख़ुद कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले दो समितियों मल्होत्रा समिति और भण्डारी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में सर्वे के लिए नुकसान की सीमा को बढ़ाए जाने का सुझाव दिया था। इन समितियों ने यह भी सुझाव दिया था कि बीमा कम्पनियों के अन्दर मौजूद कार्यबल को नुकसान की इस सीमा तक के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ऐसा होने से दावों के निस्तारण में तेज़ी आएगी।
 
वैसे कई बीमा कम्पनियां वीडियो के आधार पर भी दावों का निपटारा कर रही हैं। इस प्रक्रिया में ग्राहक की ओर से ख़ुद मोबाइल फोन के ज़रिए नुकसान का वीडियो बनाकर बीमा कम्पनियों को भेजा जाता है। इसके अलावा दावों के निपटारे के लिए कई बीमा कम्पनियों ने सर्विस सेन्टर्स के साथ भी टाई-अप किया है।

इधर इसके अलावा IRDAI ने सर्वेयर और लॉस एसेसर्स की लाइसेंसिंग के लिए प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। IRDAI ने यह प्रस्ताव किया है कि किसी भी मौजूदा लाइसेंस धारक या प्रशिक्षु के तौर पर पंजीकृत कोई भी व्यक्ति और जरूरी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले व्यक्ति को अब कोई लाइसेंसिंग-पूर्व परीक्षा देने की ज़रूरत नहीं होगी।

साफ़ ज़ाहिर है कि IRDAI का इरादा लोगों को बीमा क्लेम में आने वाले परेशानियों को दूर करना है। वैसे यदि मोटर इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट में किसी तय राशि तक के दावे के लिए सर्वेयर की ज़रूरत को ख़त्म किया जाता है तो इससे ग्राहकों के साथ-साथ बीमा कम्पनियों को भी फ़ायदा होगा।