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चीन सरकार का फरमान; पराये पुरुषों के साथ उइगर मुस्लिम महिलाओं का एक ही बिस्तर पर सोना ज़रूरी

11 Nov 2019
उइगर मुस्लिम महिलाओं के साथ ‘अनैतिक कामों’ का समर्थन करती चीन सरकार

NOV 11 (WTN) – 'विस्तारवादी' मानसिकता वाला देश चीन हमेशा से ही मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए बदनाम रहा है। एकदलीय साम्यवादी व्यवस्था वाले देश चीन ने 1989 में लोकतंत्र के लिए आन्दोलन कर रहे अपने ही देश के लोगों को सेना के टैंकों से मरवा दिया था, इसकी गवाह पूरी दुनिया है। 1989 से लेकर 2019 तक के 30 सालों के सफ़र में चीन में मानवाधिकारों का हनन चरम पर पहुंच गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ जारी चीन सरकार की 'प्रताड़ना' लगातार जारी है। उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ चीन में प्रताड़ना इतने 'निम्नतम स्तर' तक पहुंच गई है कि उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी पुरुषों के साथ एक बिस्तर पर सोने के लिए 'मजबूर' किया जा रहा है।
 
दुनिया की 'सर्वोच्च ताक़त' बनने की सोच रखने वाली चीनी सरकार का 'दमन चक्र' अपने ही देश के उत्तर पश्चिम क्षेत्रों में रहने वाले उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ घिनौने स्वरूप में पहुंच गया है, जो कि अपमानजक, अनैतिक और आपत्तिजनक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने क़रीब डेढ़ लाख उइगर मुस्लिमों को कैम्पों में बंदी बनाया हुआ है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा। इतना ही नहीं, कैम्पों में बंद उइगर मुस्लिमों बंदियों के घरों पर मौजूद महिलाओं के साथ रहने के लिए चीनी पुरुषों को भेजा जा रहा है और उइगर महिलाओं को चीनी पुरुषों के साथ एक ही बिस्तर पर सोना भी पड़ता है।
 
चीन उइगर मुस्लिम महिलाओं के लिए "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" नाम का एक 'भद्दा' और 'आपत्तिनजक' कार्यक्रम चला रहा है और इसी कार्यक्रम के तहत उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी पुरुषों के साथ एक ही बिस्तर पर सोने के लिए 'मजबूर' किया जा रहा है। दुनियाभर में निर्वासन की ज़िन्दगी जीन को मजबूर उइगर मुस्लिम, चीन में जारी इस प्रोगाम का जमकर विरोध कर रहे हैं और इसे उइगर मुस्लिमों महिलाओं का अपमान बता रहे हैं, लेकिन 'दमनकारी' नीतियों में विश्वास रखने वाली चीन की साम्यवादी सरकार इसे उचित ठहरा रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीनी सरकार की 'अनैतिक' कारगुजारियों की ख़बरें चीन में सेंसरशिप होने के कारण बाक़ी दुनिया को पता नहीं चल पाती हैं इसलिए चीन के इस "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" जैसे अनैतिक कार्यक्रम की जानकारी भी पूरी दुनिया को काफ़ी समय के बाद पता चल सकी है, नहीं तो चीन के जिनजियांग प्रान्त के उइगर स्वायत्तशासी इलाक़ों में यह भद्दा कार्यक्रम क़रीब 3 साल से जारी है।

विवादित "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" कार्यक्रम को चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा बनाया गया है और इस कार्यक्रम को सफ़ल बनाने के लिए पार्टी कैडर के एक लाख अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। चीनी सरकार के इस भद्दे प्रोग्राम में कम्युनिस्ट पार्टी कैडर्स को 'रिश्तेदार' कहा जाता है, जो अकेली उइगर मुस्लिम महिलाओं के घरों में पूरे अधिकार से जाते हैं और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं।

जानकारी के मुताबिक़, एक 'रिश्तेदार' यानी कि एक चीनी अधिकारी को कई उइगर मुस्लिमों के घरों में जाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है। यह विशेषकर वो घर होते हैं, जिनके पुरुष सदस्य चीन के कैम्पों में भेजे जा चुके हैं। दरअसल, चीनी सरकार के यह कैम्प एक तरह की जेल की तरह ही होते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ज़्यादातर उइगर इलाकों में अधिकांश पुरुषों को इन कैम्पों में भेजा जा चुका है। अब इन इलाकों में स्थित घरों में या तो महिलाएं बची हैं या फिर बच्चे।
 
इस बारे में चीन सरकार का मानना है कि उइगर मुस्लिम जिस तरह धर्म के प्रति कट्टर हैं और अलग राजनीतिक विचारधारा रखते हैं यह सब बातें चीन के लिए ख़तरनाक है। इसी कड़ी में चीन उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ दमनकारी क़दम उठाता आया है, जिसमें मस्जिदों को तोड़ना, उर्दू या उइगर भाषा पर रोक और उइगर बच्चों को अलग कर देने जैसे काम शामिल हैं।

चीन सरकार के अनैतिक "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" कार्यक्रम में चीनी पुरुष अधिकारी यानी कि रिश्तेदार जिस भी उइगर मुस्लिम महिला के घर में जाते हैं, वहां पर उन्हें जाने से कोई भी नहीं रोक सकता है। उइगर महिलाओं को उन्हें अपने घर में रखना बाध्यकारी है और महिला को उस चीनी पुरुष के साथ अपने ही बिस्तर पर सोना पड़ता है। यह पुरुष कम से कम 6 दिन महिलाओं के साथ रहते हैं।

इन चीनी पुरुषों की कोशिश होती है कि अकेली रह रहीं उइगर महिलाओं को भावनात्मक तौर पर क़रीब लाया जा सके और उन्हें चीन की मुख्यधारा सो जोड़ा जा सके। चीनी सरकार के इस भद्दे कार्यक्रम में रात के समय उइगर मुस्लिम महिलाओं को मजबूरी में चीनी पुरुषों के साथ एक ही बिस्तर पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उइगर मुस्लिम महिलाओं को सख्त हिदायत है वे अपने बिस्तर में चीनी पुरुषों को सुलाएं।

छह दिनों तक उइगर मुस्लिम महिलाओं के साथ रहने के दौरान चीनी पुरुष जो कि रिश्तेदार कहे जाते हैं काफ़ी बारीक़ तरीक़े से उइगर महिला और उसके विचारों पर नज़र रखते हैं। इस दौरान उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी पुरुष द्वारा पूछे गये सभी सवालों के जवाब देना ज़रूरी होता है। दरअसल, इन 6 दिनों के दौरान चीनी पुरुष उइगर मुस्लिम महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से जमकर प्रताड़ित करते हैं और उनका शोषण करते हैं।

अपने ही नागरिकों पर सेना के टैंक चलवाने वाली चीन की कम्युनिस्ट सरकार का उइगर मुस्लिम महिलाओं में इतना ख़ौफ़ है कि यह महिलाएं इस अनैतिक कार्यक्रम का चाहकर भी विरोध नहीं कर सकती हैं। उइगर मुस्लिम महिलाओं को इस व्यवस्था को मानना ही पड़ता है और इस व्यवस्था का विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित और दण्डित भी किया जाता है।
 
लेकिन संवेदनहीन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने इस व्यवस्था को देश के लिए बेहतर बताया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का तर्क है कि रिश्तेदार बनकर गए चीनी पुरुष अधिकारी हर परिवार में अच्छे और बेहतर इंसान के रूप में घुलने-मिलते हैं। उइगर मुस्लिम महिलाओं के विरोध की बाद भी चीन इनकार करता रहता है कि इस प्रोग्राम का कहीं भी कोई भी विरोध हो रहा है।

साल 2016 से ही चीन में उइगर मुस्लिम महिलाओं को चीनी पुरुषों के साथ एक ही बिस्तर पर सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है, लेकिन चीन की सरकार को इसमें कुछ भी ग़लत नहीं लगता है। लेकिन बड़ा सवाल उठता है कि पूरी दुनिया में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच मुस्लिमों की रहनुमाई का नेता बनने की होड़ मची हुई है, लेकिन चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे इस अनैतिक कृत्य पर यह देश चुप्पी साधे बैठे हैं। साफ़ ज़ाहिर होता है कि चीन जैसे शक्तिशाली देश के सामने इन देशों की हिम्मत नहीं है कि वे उइगर मुस्लिम महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार का विरोध कर सकें।

विस्तारवादी मानसिकता वाला देश चीन कश्मीर मामले में तो भारत पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगाता रहता है, लेकिन चीनी सरकार ख़ुद के देश में पिछले तीन सालों से उइगर मुस्लिम महिलाओं के साथ अनैतिक काम किये जा रही है। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट सरकार एक डर के साये में जी रही है, क्योंकि वो जानती है कि उसके द्वारा सालों से किये जा रहे अन्याय के ख़िलाफ़ चीन में अंदरूनी असंतोष है। इसी कारण से चीन की कम्युनिस्ट सरकार हर उस आवाज़ को दबाने की कोशिश करती रहती है, जिससे उसे ख़तरा महसूस होता है और इसी कारण से चीन की कम्युनिस्ट सरकार उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ अमानवीय कार्यक्रम चला रही है।