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निवेश और नौकरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ‘मास्टर प्लानिंग’

21 Nov 2019
विदेशी कम्पनियों को ज़मीन मुहैया कराएगी मोदी सरकार, बढ़ेंगे रोज़गार

NOV 21 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण भारत समेत दुनिया की क़रीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को झटका लगा है। लेकिन भारत जैसी तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण काफ़ी नुकसान हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि आर्थिक मंदी के कारण ना केवल भारत के निर्यात पर असर पड़ा है, बल्कि मंदी के कारण जीडीपी ग्रोथ रेट भी को होती जा रही है, और इन्हीं सब कारणों से कम्पनियां को घाटा हो रहा है और रोज़गार संकट खड़ा हो गया है।

इन्हीं सब परेशानियों से निपटने के लिए मोदी सरकार एक बड़े मास्टर प्लान पर काम कर रही है। कहा जा रहा है कि यदि यह मास्टर प्लान कामयाब होता है, तो इससे देश की जीडीपी को ना केवल गति मिलेगी, बल्कि इससे बड़ी तादात में रोज़गार पैदा होंगे।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार विश्व की 324 बड़ी कम्पनियों को भारत में निवेश करने के लिए ज़मीन देने पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, इन मैन्युफैक्चरिंग कम्पनियों में कई देशों की टॉप कम्पनियां शामिल हैं। दरअसल, अमरीका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण दोनों ही देश एक दूसरे के सामानों पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं, जिससे सामान महंगे हो रहे हैं। अब टैरिफ बढ़ने से अमरीका में चीन का सामान महंगा हो रहा है, जिससे चीन में स्थित कम्पनियों का निर्यात घट रहा है। इस परिस्थिति में 324 बड़ी कम्पनियां चीन से बाहर निकल कर दूसरे देशों में फैक्टरी और प्लांट लगाने के बारे में सोच रही हैं,और मोदी सरकार इन्हीं 324 कम्पनियों को भारत में ज़मीन देकर उन्हें भारत से अपना कारोबार शुरू करने का ऑफर देने जा रही है।

दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार के कारण उम्मीद की जा रही थी कि इससे भारत को काफ़ी फ़ायदा होगा, लेकिन उम्मीदों के विपरित भारत को सिर्फ़ 5,300 करोड़ रुपयों का ही फ़ायदा हुआ है। वहीं ट्रेड वॉर के कारण सम्भावना जताई जा रही थी कि इससे भारत का निर्यात 11 अरब डॉलर बढ़ जाएगा, लेकिन मंदी के कारण भारत इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका है। भारत की तुलना में टैरिफ वॉर का सबसे ज़्यादा फ़ायदा ताइवान, मेक्सिको और वियतनाम जैसे देशों को हुआ है।

लेकिन अब मोदी सरकार अपनी नई आर्थिक रणनीति के तहत विदेशी कम्पनियों को भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित कर रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस के मामले में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। विश्व बैंक की ओर से जारी होने वाली इस लिस्ट में भारत अभी 63वें पायदान पर है और हर साल भारत की स्थिति में सुधार हो रहा है।

दरअसल, भारत में विदेशी कम्पनियों को अपना व्यापार शुरू करने के लिए मोदी सरकार मैन्युफैक्चरिंग कम्पनियों के लिए एक विशेष तरह का लैण्ड बैंक तैयार करने की प्लानिंग कर रही है, जिससे विदेशी कम्पनियों को व्यापार करने के लिए आसानी से ज़मीन मिल पाएगी। दरअसल, हाल फ़िलहाल किसी भी विदेश कम्पनी को भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए सबसे ज़्यादा परेशानी ज़मीन अधिग्रहण में ही आती है, क्योंकि इन कम्पनियों को ज़मीन की डील ख़ुद ही करना पड़ती है।

जानकारों के मुताबिक़, यदि विदेशी निवेशकों के लिए स्पेशल लैण्ड बैंक तैयार हो जाता है, तो यह कम्पनियां आसानी से ज़मीन सरकार से ले सकेंगी जिससे इन कम्पनियों की समय की बर्बादी नहीं होगी। कम्पनियों को आसानी से ज़मीन देने की प्लानिंग के साथ-साथ मोदी सरकार निवेश करने वाली कम्पनियों को तरह-तरह के इनसेंटिव देने के बारे में भी विचार कर रही है।

यदि मोदी सरकार अपनी इस प्लानिंग में सफ़ल हो जाती है और विदेश की यह 324 बड़ी कम्पनियां भारत में निवेश करती हैं और अपना प्लांट या फैक्ट्री भारत में लगाती हैं तो इससे देश में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। यदि यह कम्पनियां भारत में अपना व्यापार करने में सफ़ल रही तो अन्य विदेशी कम्पनियां भी अपना कारोबार भारत में करने में रूचि दिखाएंगी, जिससे देश की जीडीपी में वृद्धि होगी और लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा।