HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

करिये ज़रा इंतज़ार, काफ़ी सस्ते में मिल सकते हैं सोने के ज़ेवरात!

03 Dec 2019
स्टॉक क्लीयर करने बिना हॉलमॉर्किंग वाले ज़ेवरातों पर मिल सकता है भारी डिस्काउण्ट

DEC 03 (WTN) – भारतीय महिलाओं में सोने के गहने के प्रति कितनी दीवानगी होती है यह बात तो सभी जानते ही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के बाद भारत में हर साल सोने की सबसे ज़्यादा खपत होती है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल क़रीब 849 मैट्रिक टन सोने की खपत होती है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि सोने के दाम हर दिन तय होते हैं, और चुंकि सोना एक क़ीमती धातु है और विदेश से इसका आयात किया जाता है, इसलिए इसके दाम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

लेकिन यदि आप हाल फ़िलहाल में सोना ख़रीदने का विचार कर रहे हैं, तो ज़रा इंतज़ार करना आपके बजट और जेब के लिए बेहतर होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि हो सकता है कि आने वाले दिनों में ज्वेलर्स, सोने के ज़ेवरातों पर बम्पर छूट दें। क्या है यह पूरा मामला, इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्र सरकार ने 15 जनवरी 2021 से सोने के गहनों पर हॉलमॉर्किंग को अनिवार्य कर दिया है, ऐसे में कहा जा रहा है कि इसका सर्राफ़ा बाज़ार पर भी असर पड़ेगा और ग्राहकों को इसके पहले सस्ते में सोने के ज़ेवरात मिल सकते हैं।

हॉलमॉर्किंग अनिवार्य होने पर बुलियन डीलर्स और सर्राफ़ा कारोबारियों का कहना है कि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ज्वेलर्स पहले पुराने सोने के गहने, जो कि बिना हॉलमॉर्क के हैं, उन पर भारी छूट दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्वेलर्स अगर ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें बिना हॉलमॉर्क वाले पुराने गहने पिघलाना पड़ेंगे और फ़िर उन पर हॉलमार्क करवाना होगा। और यदि वे ऐसा करते हैं तो इससे उन्हें गहनों की बनवाई में आने वाला ख़र्च का नुकसान होगा। इसी कारण से कहा जा रहा है कि आने वाले समय में लोगों को सोने के ज़ेवरात सस्ते में मिल सकते हैं।

सर्राफ़ा बाज़ार के जानकारों के मुताबिक़, सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने की समय-सीमा जैसे-जैसे क़रीब आती जाएगी वैसे-वैसे नॉन-हॉलमार्क ज़ेवरातों पर डिस्काउण्ट बढ़ता जाएगा। लेकिन इससे उन सर्राफ़ा व्यापारियों को काफ़ी नुकसान होगा जिनके पास बिना हॉलमार्किंग वाले ज़ेवरात ज़्यादा मात्रा में हैं। इस तरह के नुकसान का सामना ज़्यादातर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के ज्वेलर्स को उठाना होगा, क्योंकि इन्हीं इलाक़ों में ज़्यादातर बिना हॉलमार्किंग वाले गहनों की बिक्री होती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन इलाक़ों की जनता हॉलमॉर्किंग से होने वाली फ़ायदों से अनजान रहती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलमार्किंग धातु की शुद्धता का एक प्रमाण है। भारत में वर्तमान में यह ज्वेलर्स के लिए स्वैच्छिक है कि वो अपने ज़ेवरातों पर हॉलमॉर्किंग करें या नहीं। वित्त वर्ष 2018-19 में, देश में खपत किए गए 1,000 टन सोने में से लगभग 450 टन सोने को हॉलमार्क किया गया था। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा इतना ही रह सकता है। लेकिन 15 जनवरी 2021 से हॉलमॉर्क अनिवार्य होने से सोने के ज़ेवरात बिना हॉलमॉर्क के नहीं बिक सकेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार हॉलमार्किंग पर अगले साल 15 जनवरी तक एक अधिसूचना जारी कर ज्वेलर्स को ख़ुद को ब्यूरो ऑफ़ इण्डियन स्टैण्डर्ड्स (BIS) के साथ रजिस्ट्रेशन कराने और अपना मौजूदा स्टॉक निकालने के लिए एक साल का समय देगी। ऐसा होने से ज्वेलर्स के पास एक साल का समय होगा और वे बिना हॉलमॉर्क वाले ज़ेवरातों के स्टॉक को जल्द से जल्द क्लीयर कर सकेंगे। यही कारण है कि आने वाले समय में ग्राहकों को सस्ते दामों में सोने के ज़ेवरात मिल सकते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि BIS ने सोने के गहनों के लिए स्टैण्डर्ड के तीन मानक ग्रेड तय किये हैं। यह ग्रेड हैं 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट। आज की परिस्थिति में देश में क़रीबन 3 लाख ज्वेलर्स में से केवल 30,000 ज्वेलर्स को ही हॉलमार्क वाले आभूषण बेचने के लिए बीआईएस से लाइसेंस मिला हुआ है।

अब चुंकि हॉलमॉर्किंग अनिवार्यता के लिए पूरा एक साल का समय बाक़ी बचा हुआ है। ऐसे में इस बचे हुए समय में जहां एक तरफ़ ज्वेलर्स को हॉलमॉर्क वाले ज़ेवरात बनाने का समय मिलेगा, तो वहीं दूसरी तरफ़ ज्वेलर्स बिना हॉलमॉर्क वाले ज़ेवरातों को सस्ते दामों में बेचेंगे, जिससे उन्हें नुकसान ना उठाना पड़े। तो फ़िर कीजिए इंतज़ार सोने के ज़ेवरातों के सस्ता होने का।