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अमेरिका-चीन ट्रेड वार से जल्द होगा भारत को बड़ा फ़ायदा, लाखों लोगों को मिलेगा रोज़गार

12 Dec 2019
चीन से कारोबार समेट रहीं विदेशी कम्पनियां, भारत में दिखी ज़्यादा सम्भावनाएं
 
DEC 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार जारी है। दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वार से भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन चीन को इस ट्रेड वार के कारण काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वैसे तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ट्रेड वार थम जाएगा, लेकिन तब तक चीन को काफ़ी नुकसान ट्रेड वार से हो चुका होगा। लेकिन जहां ट्रेड वार से चीन को नुकसान हो रहा है, आने वाले समय में इसका फ़ायदा भारत को होने जा रहा है।

दरअसल, ट्रेड वार के कारण चीन में व्यापार कर रहीं विदेशी कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण से कई विदेशी कम्पनियां चीन से अपना कारोबार कम या ख़त्म कर भारत की तरफ़ रुख़ कर रही हैं या फ़िर रुख़ कर सकती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तरी चीन में पर्ल नदी के किनारे बसे हुइजू शहर में दक्षिण कोरिया की विश्व प्रसिद्ध कम्पनी सैमसंग का तीन साल पुराना ऑफिस अक्टूबर 2019 में बंद हो गया है। अब इस कारखाने को नोएडा और वियतनाम में ट्रांसफर कर दिया गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सैमसंग ने नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री का उद्घाटन किया था। ट्रेड वार के कारण भारी नुकसान का सामना कर रही सैमसंग ने जब से चीन में मौजूद अपना अन्तिम कारखाना बंद किया है, तभी से अन्य विदेशी कम्पनियां भी चीन से अपना व्यापार ख़त्म कर किसी दूसरे देश में जाने की तैयारी में हैं। कहा जा रहा है कि चीन की तुलना में विदेशी कम्पनियों को भारत में अब ज़्यादा फ़ायदा और आज़ादी दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में निवेश करने और अपना कारखाना खोलने के लिए चीन में स्थित विदेशी कम्पनियों को लुभाने के लिए मोदी सरकार उन्हें कई तरह की सुविधाएं देने की घोषणाएं भी कर चुकी है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि सैमसंग के प्रोडक्ट्स की भारत में हैं काफ़ी डिमाण्ड है। दक्षिण कोरिया की इस बड़ी कम्पनी की साख और दबदबा पूरी दुनिया में सालों से कायम है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में सैमसंग का एक बड़ा मार्केट शेयर है। स्मार्टफोन की बात करें तो अकेले इसी सेगमेंट में सैमसंग के पास 25 प्रतिशत मार्केट शेयर है। जानकारी के मुताबिक़, सैमसंग को भारत में कारोबार की बड़ी सम्भावनाएं दिख रही हैं। कहा जा रहा है कि जल्द ही सैमसंग भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट शिफ्ट कर सकता है।
 
दरअसल, चीन में लगातार घटते व्यापार के कारण सैमसंग जैसी कम्पनी को वहां से अपना व्यापार बंद करना पड़ रहा है। चीन स्मार्टफोन समेत मोबाइल सेगमेण्ट में दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है। साल 2013 में इस बाज़ार में सैमसंग की हिस्सेदारी क़रीब 13 प्रतिशत थी, लेकिन ट्रेड वार और चीन की दिग्ग्ज कम्पनियों के बढ़ते वर्चस्व के कारण सैमसंग की यह हिस्सेदारी घटकर अब सिर्फ़ एक प्रतिशत ही रह गई है। ऐसे में चीन में निवेश और व्यापार करने वाली विदेशी कम्पनियां भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट खोल सकती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनियों के अलावा ई-कॉमर्स कम्पनियां भी चीन में अपना कारोबार समेटने की प्लानिंग कर रही हैं। इसी कड़ी में दुनिया की जानी पहचानी ई-कॉमर्स कम्पनी अमेज़न भी चीन से अपना कारोबर बंद कर भारतीय बाज़ार पर अपना फोकस कर सकती है। सैमसंग और अमेज़न की तरह विश्व की कई अन्य बड़ी कम्पनियां भी जल्द ही चीन से अपना कारोबार समेट कर भारत की तरफ़ रुख़ कर सकती हैं, क्योंकि इन कम्पनियों को आशा है कि भारत में उन्हें व्यापार करने के लिए अच्छा बाज़ार और चीन से ज़्यादा आज़ादी मिलेगी।

साफ़ है कि यदि यह कम्पनियां भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाएंगी तो इससे देश में विदेशी निवेश बढ़ेगा और लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा। सैमसंग और अमेज़न जैसी कम्पनियों का अनुसरण कर कई अन्य विदेशी कम्पनियां भी चीन से अपना कारोबार बंद कर भारत में अपना कारोबर शुरू कर सकती हैं। आर्थिक मंदी से परेशान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इन विदेशी कम्पनियां का भारत में कारोबार करना किसी सुनहरे मौक़े से कम नहीं है। आशा की जानी चाहिए कि यह कम्पनियां जल्द से जल्द भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाएं, जिससे भारत में विदेशी निवेशी बढ़े और लोगों को रोज़गार मिले।