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वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बीच भी भारतीय करेंसी रुपये ने दिखाई अपनी ‘ताक़त’

22 Feb 2020
कमज़ोर होने के बाद भी अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले टॉप 5 में आया भारतीय रुपया

FEB 22 (WTN) – कई बार समाचार में आपने भारत की करेंसी रुपया और अमेरिकी करेंसी डॉलर के बीच सम्बन्धों के बारे में तो सुना और पढ़ा ही होगा। लेकिन आप में से ज़्यादातर लोगों को शायद यह नहीं पता होगा कि आख़िर दो देशों की करेंसी के बीच मज़बूत और कमजोरी का पैमाना क्या होता है? आइये इसके बारे में आज आपको विस्तार से बताते हैं। सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले में भारत की करेंसी रुपया दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है। हालांकि, साल 2020 में अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले में भारतीय रुपया 0.37 प्रतिशत तक कमज़ोर हुआ है।
 
एक रिपोर्ट द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक़, लैटिन अमेरिकी देश मैक्सिको की करेंसी पेसो अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले मज़बूती में टॉप पर बनी हुई है। बता दें कि मैक्सिको की करेंसी पेसो इस साल 1.2 प्रतिशत मज़बूत हुई है। वहीं, दूसरे नम्बर पर इंडोनेशिया की करेंसी रुपिया है, जो कि इस साल 0.84 प्रतिशत मज़बूत हुई है। इस सूची में तीसरे नम्बर पर फिलीपींस की करेंसी पेसो है। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले फिलीपींस की करेंसी पेसो 0.12 प्रतिशत मज़बूत हुई है। वहीं इस क्रम में चौथा नम्बर भारत की करेंसी रुपया है। हालांकि, इस साल रुपया 0.37 प्रतिशत कमज़ोर हुआ है।

चीन की करेंसी युआन इस सूची में पांचवें नम्बर पर है। बता दें कि भारत की ही तरह चीन की करेंसी भी अमेरिकी डॉलर की तुलना में कमज़ोर हुई है। नये साल 2020 में डॉलर के मुक़ाबले युआन 0.87 प्रतिशत कमज़ोर हुआ है। दुनिया में सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी ब्राजील की ब्राजीलियाई रियाल (Brazilian Real) है। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2020 में ब्राजीलियाई रियाल अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले 8 प्रतिशत से ज़्यादा कमज़ोर हो चुकी है।
 
अब आप सोच रहे होंगे कि किसी देश की करेंसी की तुलना अमेरिकी डॉलर में ही क्यों की जाती है। वहीं किसी देश की करेंसी का डॉलर की तुलना में मज़बूत या कमज़ोर होना क्या मायने रखता है? तो आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, पूरी दुनिया में ज़्यादातर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है। इसी कारण से पूरी दुनिया के देशों की करेंसी की मज़बूती की तुलना अमेरिकी डॉलर से की जाती है। बात करें भारत की करेंसी रुपये की, तो रुपये की क़ीमत पूरी तरह से आयात, निर्यात, डिमाण्ड और सप्लाई पर निर्भर करती है।
 
वहीं जैसा कि आप जानते ही होंगे कि हर देश के पास दूसरे देशों की मुद्रा का भण्डार होता है, जिसे विदेशी मुद्रा भण्डार कहा जाता है। इसी मुद्रा भण्डार का इस्तेमाल आयात-निर्यात में किया जाता है। अब समझ लीजिये कि भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यापारिक सौदा होता है। माना कि अमेरिका के पास इस समय 71,000 रुपये हैं, और भारत के पास 1,000 डॉलर। यदि व्यापारिक सौदे के वक़्त अमेरिकी करेंसी डॉलर की तुलना में भारत की करेंसी रुपया का भाव 71 रुपये है, तो इस स्थिति में दोनों ही देशों के पास बराबर की राशि है।
 
अब यदि भारत से कोई सौदा अमेरिका से होता है, और इस सौदे की क़ीमत भारत की करेंसी के अनुसार 7,100 रुपये है, तो इस सौदे के लिए भारत को 100 डॉलर चुकाने होंगे। अब जबकि भारत 100 डॉलर देकर अमेरिका से सौदा करेगा, तो ऐसे में भारत के विदेशी मुद्रा भण्डार में सिर्फ़ 900 डॉलर ही बचेंगे। वहीं अमेरिका के पास 71,000 रुपये तो हैं ही, साथ ही भारत के विदेशी मुद्रा भण्डार से अमेरिका के पास 100 डॉलर भी पहुंच जाएंगे। वहीं यदि अमेरिका भारत से कोई सामान 100 डॉलर में ख़रीदता, तो भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़कर 1,100 डॉलर हो जाएगा। साफ़ है कि जो देश जितना ज़्यादा निर्यात करता है, उस देश की करेंसी में उतनी ज़्यादा मज़बूती आती जाती है।

जैसा कि हमने आपको बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में ज़्यादातर सौदे अमेरिकी डॉलर में किये जाते हैं, तो ऐसे में विदेश से सामान मंगवाने के लिए सम्बन्धित देश के पास बड़ी तादात में अमेरिकी डॉलर होना ज़रूरी है। अब ज़्यादा अमेरिकी डॉलर्स के लिए देश को अमेरिका से ज़्यादा आयात करना पड़ता है। बता दें कि डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करने का पूरा दायित्व भारत के केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक पर है। बता दें कि रिज़र्व बैंक अपने भण्डार और विदेश से ख़रीदकर बाज़ार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। अब जबकि अमरेकी डॉलर की तुलना में रुपये ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, तो ऐसे में भारतीय रिज़र्व बैंक इस मौक़े का फ़ायदा उठा सकता है। क्योंकि इस दौरान रिज़र्व बैंक अपने डॉलर के भण्डार को बढ़ा सकता है, और ऐसा होने से भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका कम होगी।