एक बार फिर सामने आया चीन की वामपंथी सरकार का ‘जानलेवा लालच’!
FEB 26 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस संक्रमण चीन में एक महामारी बन चुका है। कोरोना वायरस से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,750 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें क़रीब 2,700 लोग अकेले चीन से हैं। वैसे चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस फैलने का कारण सीफूड मार्केट नहीं बल्कि कुछ और ही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि वुहान शहर में स्थित अपनी एक वायरोलॉजी प्रयोगशाला में चीन विध्वंसकारी जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था, और उसी प्रयोगशाला से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है।
वैसे चीन की वामपंथी सरकार ने स्पष्ट तौर पर इस दावे का खण्डन नहीं किया है। इधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के कारण चीन में तीस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है, लेकिन चीन में मीडिया पर पाबंदी और सेंसरशिप होने के कारण कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों के सही आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं। वैसे ख़ुद चीनी लोग भी कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के पीछे अपने देश की वामपंथी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। चीनी लोगों में आक्रोश है कि उनकी सरकार ने पहले तो इस भयानक संक्रमण को छिपाने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ़ उनकी सरकार ने उन डॉक्टर्स को प्रताड़ित किया, जो इस संक्रमण के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे थे, या फिर वे आगाह कर रहे थे।
लेकिन कोरोना वायरस पर चीन की वामपंथी सरकार के ग़ैरज़िम्मेदाराना रवैये के कारण चीन को काफ़ी बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अनुमान है कि कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को क़रीब 150 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। कोरोना वायरस के कारण कई देशों ने चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियां या तो कम कर दी हैं या फ़िर बंद कर दी हैं। वहीं दुनिया के कई देशों ने चीन के साथ हवाई सेवा भी स्थगित कर दी है। कोरोना वायरस संक्रमण का चीन में इतना डर है कि वुहान शहर समेत कई शहरों में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और कारखाने बंद पड़े हैं। कोरोना वायरस चीन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। और इसी कारण से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोरोना वायरस संक्रमण को कम्यूनिस्ट चीन के इतिहास में सबसे बड़ी हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है।
स्वाभाविक है कि ऐसा सब होने से चीन की अर्थव्यवस्था को दिनों-दिन नुकसान होता जा रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका के बाद चीन ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं निर्यात के दम पर पर ही चीन आज अमेरिका को आर्थिक रूप से टक्कर दे रहा है। ऐसे में जबकि चीन में आर्थिक गतिविधियां ठप सी पड़ गई हैं, चीन की वामपंथी सरकार किसी ना किसी तरह से आर्थिक गतिविधियों को फ़िर से शुरू करने की कोशिशों में है। चीनी की वामपंथी सरकार आर्थिक नुकसान से बचने के लिए जल्द से जल्द आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने का दवाब उद्योगपतियों पर बना रही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ऐसा होने से कोरोना वायरस संक्रमण के और भी तेज़ी से फैलने की आशंका है।
दरअसल, चीनी राष्ट्रपति और चीन के अन्य शीर्ष नेता यह चाहते हैं कि कारखानों और फैक्ट्रियों में उत्पादन जल्द से जल्द शुरू किया जाए, जिससे संकट का सामना कर रही चीन की अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से तेज़ी से आगे बढ़ सके। इसी कारण से चीन का शीर्ष वामपंथी नेतृत्व उद्योगपतियों पर दबाव डाल रहा है कि उत्पादन कार्य फ़िर से शुरू किया जाए। लेकिन उद्योगपतियों को डर है कि यदि कारखानों और फैक्ट्रियों में उत्पादन फ़िर से शुरू किया गया, तो इससे कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से फैलने की आशंका है।
मानवाधिकार हनन के लिए कुख्यात चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस संक्रमण के बाद भी इस लालच में है कि आर्थिक ग्रोथ रूकना नहीं चाहिए। चीन की वामपंथी सरकार को डर है कि कोरोना वायरस के कारण यदि कुछ दिन और उद्योगिक गतिविधियां ठप रहीं, तो चीन की अर्थव्यवस्था काफ़ी पिछड़ जाएगी, और देश को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। चीन की वामपंथी सरकार के दवाब के कारण ही वुहान से क़रीब 600 किलोमीटर दूर झेजियांग प्रांत में कई स्थानों पर उत्पादन गतिविधियां फ़िर से शुरू कर दी गई हैं। हालांकि, यहां पर उद्योगिक गतिविधियां शुरू तो हो गई हैं, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के डर के कारण वर्कर्स काम पर नहीं आ रहे हैं।
इधर, चीन के डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि अभी कोरोना वायरस संक्रमण पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण और भी बढ़ने की आशंका है। इसके बाद भी अगर कारखानों और फैक्ट्रियों में उत्पादन कार्य फिर से शुरू होता है, तो इससे कोरोना वायरस संक्रमण विकराल रूप दिखा सकता है। यदि चीन की वामपंथी सरकार ने जल्दबादी में और लालच में आर्थिक गतिविधियां फ़िर से शुरू करने की ग़लती की, तो इसका भयानक परिणाम चीन की जनता को भुगतना पड़ सकता है।
यह सही है कि दुनिया की नामी कम्पनियों की फैक्ट्रियां और कारखाने चीन में हैं, और चीन में उत्पादित माल दुनिया के कई देशों में सप्लाई होता है। मोबाइल से लेकर दवा बनाने वाली, और कार से लेकर इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने वाली कम्पनियां का उत्पादन चीन में इस समय या तो ठप पड़ा है या फ़िर बंद पड़ा है। स्वाभाविक है कि इससे चीन को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी लोगों की जान की क़ीमत सबसे बड़ी है। चीन की वामपंथी सरकार आर्थिक वृद्धि के लालच में कोरोना वायरस संक्रमण की भयावहता को नज़रअन्दाज़ करते हुए उत्पादन गतिविधियों को एक बार फिर से शुरू करने की कोशिशों में हैं। लेकिन यदि समय रहते कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो चीन की वामपंथी सरकार की आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की ग़लती चीन की जनता के लिए जानलेवा साबित होने वाली है।