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कोरोना वायरस संकट के कारण चीन को आर्थिक मोर्चे पर लगा तगड़ा झटका

17 Apr 2020

1979 के बाद चीन में आई सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट

APRIL 17 (WTN) - जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मानव सभ्यता इस समय अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी 200 से ज़्यादा देशों के लाखों नागरिकों को संक्रमित कर चुकी है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में 1,46,898 लोगों की मौत हो चुकी है। चूंकि कोरोना वायरस बीमारी एक संक्रमण की बीमारी है, इसलिए संक्रमण से बचने के लिए दुनिया के ज़्यादातर देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। अब स्वाभाविक है कि लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण चीन को काफ़ी तगड़ा झटका लगा है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन के वामपंथी शासन की ग़लती और लापरवाही के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में फैल गया है। यदि चीन की वामपंथी सरकार सतर्कता बरतती और कोरोना वायरस संक्रमण की जानकारी नहीं छिपाती, तो कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में इतना नहीं फैलता। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार को ख़ुद की ग़लती का खामियाजा अब ख़ुद ही भुगतना पड़ रहा है। जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के संकट के कारण चीन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस संक्रमण संकट के कारण चीन को अपने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 1970 के दशक के बाद से सबसे ख़राब आर्थिक गिरावट का सामना करना पड़ा है। कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी विपरीत प्रभाव पड़ा है। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन और विदेश से आयात-निर्यात पर असर पड़ने के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में चीन को खपत और निर्माण दोनों में भारी कमी का सामना करना पड़ा है। खपत और निर्माण दोनों में भारी कमी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसी कारण से माना जा रहा है कि पुरानी आर्थिक विकास को हासिल करने में चीन को लम्बा वक़्त लग सकता है।

अमेरिका के बाद चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पिछले कुछ सालों में चीन ने काफ़ी आर्थिक प्रगति की है। और इसी कारण से चीन कुछ ही सालों में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण फैक्ट्री और दुकानों के बंद होने, और आयात-निर्यात सीमित होने के साथ ही पर्यटन पर रोक लगने से जनवरी से मार्च की पहली तिमाही में विकास दर में 6.8% की गिरावट दर्ज़ की गई है।

चीन की अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, माना जा रहा है कि आगे भी कुछ समय के लिए चीन में यही स्थिति रहेगी। इधर, चीन सरकार को आशंका है कि कोरोना वायरस का असर दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ने के कारण निर्यातकों को और भी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। यदि जल्द ही अमेरिका और यूरोप में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को नियंत्रित नहीं किया गया और आर्थिक गतिविधियां पहले की तरह सामान्य नहीं हुईं, तो चीन के निर्यात पर और भी बुरा असर पड़ सकता है।

वैसे पूर्वानुमानों में चीन में 16% तक की गिरावट का अंदेशा लगाया गया था, लेकिन चीन में साल 1979 में हुए आर्थिक सुधार के बाद यह अब तक का सबसे ख़राब प्रदर्शन है। वैसे चीन में आर्थिक विकास की तेज़ी पर पिछले साल से ही ग्रहण लगा हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल कमज़ोर उपभोक्ता मांग के कारण निर्यात में कमी आने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टैरिफ युद्ध के कारण चीन में आर्थिक विकास दर 6.1% से काफ़ी कम रही थी। वैसे कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी संकट के कारण जो हालात चीन और दुनिया के अन्य देशों में हैं, उसे देखकर नहीं लगता है कि चीन चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही या साल के अंत तक बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को दुरुस्त कर पाने में सफल होगा।