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कोरोना संकट के समय यूरोपीय देशों की ख़स्ताहाल आर्थिक स्थिति का फ़ायदा उठा रहा चीन

21 Apr 2020

यूरोप में निवेश के ज़रिए अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में चीन की वामपंथी सरकार

APRIL 21 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी मानव सभ्यता के आमने इस वक़्त की सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाते वक़्त तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में 1,70,470 लोगों की मौत हो चुकी है। वैसे तो कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 200 से ज़्यादा देश प्रभावित हैं। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण ने यूरोप के देशों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण यूरोप के कई देशों की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे में इन देशों की ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था पर चीन की वामपंथी सरकार गिद्ध दृष्टि लगाए बैठी है। 

जी हां, पूरी दुनिया में लापरवाही, ग़लती या फिर कहें कि साज़िश के तहत कोरोना वायरस संक्रमण पूरी दुनिया में फैलाने के बाद चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का क़हर झेल रहे यूरोप में अपनी आर्थिक स्थिति मज़बूत करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन चीन की इस पूरी क़वायद से यूरोप के देश चिन्तित हैं कि चीन की चालाकी, महत्वाकांक्षा और चतुराई से कैसे निपटा जाए?

दरअसल, वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है; इसलिए, यहां चीन को निवेश के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। धीरे-धीरे चीन अपनी कंपनियों के ज़रिए यूरोप के कई देशों में निवेश के अवसरों का फ़ायदा उठा रहा है, और इन देशों में अपनी पैठ बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

लेकिन यूरोप के अर्थशास्त्र के कई जानकारों ने चेतावनी देते हुए कहा है; हालांकि, चीन की कंपनियों के निवेश से तुरंत कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन यदि किसी देश की तकनीक पर नियंत्रण किसी दूसरे देश की कंपनियों के पास हो, तो इसके आने वाले समय में भयानक परिणाम हो सकते हैं। इतना ही नहीं, NATO ( North Atlantic Treaty Organization) और EU (European Union) यानी यूरोपीय संघ पहले ही यूरोपीय देशों को चीन द्वारा अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर की ख़रीदी को लेकर चेतावनी दे चुके हैं और सावधान रहने को कह चुके हैं।

इस समय जबकि यूरोप के कई देशों की अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण संकट में है, ऐसे में चीन की वामपंथी सरकार अपनी कंपनियों के ज़रिए यूरोपीय इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की नीति पर काम कर रही है। चीन की वामपंथी सरकार की विस्तारवादी नीति को रोकने का माद्दा रखने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प समय-समय पर चीन के यूरोप में बढ़ते निवेश पर चिन्ता जाहिर कर चुके हैं। बता दें कि यूरोप के कई देश जो कि अमेरिका के सहयोगी रहे हैं वे 5जी नेटवर्क के विस्तार के लिए चीन की हुआवेई कंपनी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अमेरिका इस बारे में यूरोपीय देशों को आगाह कर चुका है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन काफ़ी चालाकी और योजनाबद्ध तऱीके से यूरोप के देशों में निवेश कर रहा है। चीन वहां पर बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर कपड़े और ज्वेलरी की छोटी कंपनियों तक में निवेश कर रहा है। वहीं, चीनी कंपनियां यूरोप के रिसर्च और डेवलपमेंट सेक्टर में भी भारी निवेश करने की प्लानिंग में हैं। दरअसल, पांच साल बाद चीन अपने कोर सेक्टरों की क्षमताओं के विस्तार में लगा है। ऐसे में चीन योजनाबद्ध तरीके से उत्तरी यूरोप पर ज़्यादा फोकस कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तरी यूरोप में इनोवेशन बेस्ड भारी कारोबार ज़्यादा है। 

लेकिन धीरे-धीरे यूरोप के देश चीन की वामपंथी सरकार की चालाकी को समझते जा रहे हैं। अमेरिका, NATO, EU और अन्य विशेषज्ञों की चेतावनियों के बाद यूरोप के देशों ने चीनी निवेश पर गम्भीरता दिखाते हुए इसके ख़िलाफ़ कुछ क़दम उठाने शुरू किए हैं। अब देखना होगा कि चीन की वामपंथी सरकार की चालाकी का क्या कुछ जवाब यूरोप के देशों के पास है? यदि समय रहते चीन की आर्थिक विस्तारवाद की नीति को यूरोप के देश नहीं समझ सके, तो आने वाले दिनों में इसके गम्भीर परिणाम इन देशों को भुगतने पड़ सकते हैं, जैसा कि एशिया और अफ्रीका के कई देश भुगत रहे हैं।