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काफ़ी सतर्कता के बाद ही शुरू हो सकती हैं यात्री गाड़ियां

23 Apr 2020

लॉकडाउन के बाद यात्री गाड़ियों का सुरक्षित संचालन रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती

APRIL 23 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला कोरोना वायरस संक्रमण इस समय मानव सभ्यता के अतित्व पर सबसे बड़ा ख़तरा है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और हठधर्मिता के कारण कोरोना वायरस संक्रमण 200 से ज़्यादा देशों में फैल गया है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से पूरी दुनिया में अभी तक क़रीब 1,84,248 लोगों की मौत हो चुकी है। जहां तक भारत का सवाल है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार की कुशल रणनीति के कारण कोरोना वायरस संक्रमण भारत में अन्य देशों की तुलना में बहुत हद तक नियंत्रण में है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी तुलनात्मक रूप से कम फैलने का कारण है लॉकडाउन। जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस बीमारी वास्तव में संक्रमण की बीमारी है, ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए लोगों के बीच दूरी बनाए रखना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इसी कारण से देश में यात्री गाड़ियां तक बंद हैं। अब जबकि 3 मई के बाद कुछ शर्तों साथ लॉकडाउन में छूट मिलने की आशा है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि 3 मई बाद शायद कुछ शर्तों के साथ यात्री गाड़ियां फिर से शुरू हो जाएं।

वैसे रेलवे ने 3 मई के बाद के रेलवे रिज़र्वेशन को अभी बंद रखा है। और यदि रेलवे लॉकडाउन के बाद जब भी ट्रेनें चलाएगा, तो वो केन्द्र सरकार की अनुमति के बाद ही ऐसा कर सकेगा। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार भी राज्यों से सलाह लेने के बाद ही यात्री गाड़ियों को चलाने का फैसला लेगा। लेकिन जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि जब भी यात्री गाड़ियों का संचालन शुरू होगा, वो काफ़ी एहतियात और सतर्कता के साथ शुरू होगा।

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, 3 मई के बाद पहले केवल कुछ चुनिंदा ट्रेनें ही चुनिंदा रूट्स पर चलाई जा सकती हैं। यह ट्रेन स्पेशल ट्रेन की तरह हो सकती हैं, और इनका किराया ज़्यादा रखा जा सकता है। इससे शुरू में ट्रेनों में भीड़ को कम रखने में मदद मिलेगी, और केवल वही लोग इन ट्रेनों में यात्रा कर पाएं जिनके लिए यात्रा करना बेहद ज़रूरी हो। वहीं इन ट्रेनों में यात्रा करने से पहले यात्रियों का बाकायदा हेल्थ चेकअप किया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे ने 19 मार्च से ही दिव्यांगों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य आधार पर टिकिटों पर मिलने वाले कंसेशन के अलावा अन्य सभी कंसेशन पर रोक लगाई हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों में भीड़ को कम करना था, और ख़ासकर बुजुर्गों को ट्रेनों की यात्रा से दूर रखना था। माना जा रहा है कि फिलहाल रेलवे अपने इस आदेश को जारी रखेगा जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को यात्रा से दूर रखा जाए।

इस बात की भी पूरी सम्भावना है कि रेलवे शुरू में सिर्फ़ स्लीपर क्लास के कोच वाली ट्रेने ही चलाए। और इसमें केवल उन्हीं लोगों को यात्रा करने दी जाए जिनके पास कन्फर्म टिकट हो। इस तरह की ट्रेन में ना तो जनरल कोच होंगे और न ही AC कोच। जनरल कोच में भीड़ होने के कारण कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की आशंका है, वहीं AC कोच में भी संक्रमण फैलने का ख़तरा काफ़ी ज़्यादातर है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे ने स्लीपर क्लास के 5 हज़ार से ज़्यादा कोच को आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया है। इसके लिए कोच की बीच की एक सीट को हटा दिया गया है। हालांकि, अभी आइसोलेशन वार्ड के तौर पर इन डब्बों की ज़रूरत नहीं पड़ी है। ऐसे में रेलवे इन स्पेशल कोच के ज़रिए स्लीपर-2 के रूप में स्पेशल क्लास की ट्रेन भी चला सकता है। रेलवे का मानना है कि इससे सोशल डिस्टनसिंग के नियमों का पालन हो सकेगा।

दरअसल, रेलवे के सामने अपने लाखों कर्मचारियों और यात्रियों को कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षित रखने की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। ट्रेन और रेलवे प्लेटफार्म पर कोरोना वायरस संक्रमण न फैले, इसके लिए रेलवे को स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करना भी काफ़ी ज़रूरी है। ऐसे में रेलवे काफ़ी एहतियात बरतने के बाद ही पूरी सावधानी से ही यात्री ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी में है।