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अब महिलाओं के सेक्स हार्मोन्स से हो रहा है पुरुषों का कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का इलाज!

29 Apr 2020

क्या महिलाओं के सेक्स हार्मोन्स बेहतर तरीके से लड़ पा रहे हैं कोरोना वायरस संक्रमण से?

APRIL 29 (APRIL) - कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया इस समय एक जंग लड़ रही है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया के कारण, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से अभी तक पूरी दुनिया में 2,18,139 लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी की कोई भी प्रामाणिक दवा अभी तक नहीं बन पाई है। हालांकि, डॉक्टर्स के प्रयासों से कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीज़ बड़ी तादात में ठीक हो रहे हैं।

लेकिन जैसा कि आपने पढ़ा और सुना भी होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी में महिलाओं की मृत्यु दर पुरुषों की तुलना में कम है। ऐसा ट्रेंड लगभग सभी देशों में कोरोना वायरससंक्रमण के शुरुआत से ही दिख रहा है। चीन, जहां से कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी पूरी दुनिया में फैली है वहां पर फरवरी के महीने में की गई एक रिसर्च के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से 2.8% पुरुषों की मौत हुई, जबकि महिलाओं में मृत्यु दर दर 1.7% थी।

चीन ही नहीं, अमेरिका, इटली, फ्रांस, यूके, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया में भी यही पैटर्न देखा गया है कि इन देशों में भी कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ज़्यादा मौत हो रही है।

अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण से महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ज़्यादा मौत हो रही है। ऐसे में अब वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या महिलाओं में पाए जाने वाले सेक्स हार्मोन एक्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन के कारण वे कोरोना वायरस संक्रमण से कुछ हद तक पुरुषों से ज़्यादा सुरक्षित हैं?

दरअसल, कोरोना वायरस फैमिली की दूसरी बीमारियों में भी ऐसा देखा गया है कि इनमें महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ज़्यादा मौते हुई हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2003 में SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) बीमारी, या फिर साल 2012 में MERS (Middle East Respiratory Syndrome) बीमारी के दौरान भी पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में ज़्यादा देखी गई थी। चूंकि यह बीमारियां श्वसन तंत्र से जुड़ी हुई होती हैं, इसलिए; इन बीमारियों के कारण पुरुषों की मौत की दर ज़्यादा होने के कारण ऐसी बीमारियों को 'Man Flu' भी कहा जाता है।

लेकिन चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कोरोना वायरस फैमिली जनित बीमारियों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कम मौत का कारण महिलाओं की जेनेटिक संरचना भी हो सकती है। दरअसल, महिलाओं में दो X क्रोमोजोम होते हैं, और इन्हीं X क्रोमोजोम्स में मनुष्य के इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाने वाले ज़्यादातर जीन्स मौजूद होते हैं। जबकि पुरुषों में पाए जाने वाले Y क्रोमजोम में यह तुलनात्मक तौर पर कम पाए जाते हैं। इसी कारण से महिलाएं का इम्यून सिस्टम बीमारियों से लड़ने में पुरुषों के इम्यून सिस्टम की तुलना में ज़्यादा अच्छा काम करता है। 

इसी कारण से न्यूयॉर्क की Stony Brook University ने कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित कुछ पुरुष मरीजों का महिलाओं में पाए जाने वाले एस्ट्रोजन हार्मोन से इलाज करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, लॉस एंजिलस में Cedars-Sinai Medical Center ने कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित पुरुष मरीज़ों में प्रोजेस्ट्रॉन का हल्का डोज़ देना शुरू किया है। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को अब इलाज के परिणाम का इंतज़ार है।

इस शोध में शामिल मुख्य वैज्ञानिक Dr Sara Ghandehari का कहना है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से तुलनात्मक रूप से अच्छा मुक़ाबला कर पा रही हैं। यहां तक कि गर्भवती महिलाएं में भी, जिनमें दो हार्मोन्स का स्तर काफ़ी ज़्यादा होता है, कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत कम दिख रहा है। इन्हीं सब कारणों से, कोरोना वायरस से संक्रमित पुरूष मरीज़ों का इलाज महिला हार्मोन्स के ज़रिए करने की कोशिश हो रही है।

लेकिन इस क्षेत्र के बहुत से जानकारों का इस बारे में कुछ और ही तर्क है। वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाओं के इन दो हार्मोन्स का कोरोना वायरस बीमारी से ठीक होने से कोई संबंध नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक़, महिलाओं में इस तरह के हार्मोन प्रजनन की अवस्था के दौरान काफ़ी ज़्यादा होते हैं, जो गर्भधारण के दौरान और भी बढ़ जाते हैं। लेकिन मेनोपॉज आने से पहले ही इन हार्मोन्स का कम होना शुरू हो जाता है, और मेनोपॉज होते ही ये दोनों महिला हार्मोन महिलाओं में से लगभग ख़त्म हो जाते है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि यह दोनों हार्मोन ही महिलाओं को कोरोना वायरस संक्रमण से बचा रहे हैं, तो बड़ी उम्र की वे महिलाएं, जिनमें मेनोपॉज आ चुका है, उनमें भी मृत्यु दर पुरुषों की तरह ही ज़्यादा होना चाहिए। लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। क्योंकि मेनोपॉज की अवस्था वाली ज़्यादा उम्र वाली महिलाएं भी अपने ही उम्र के पुरुषों से ज़्यादा अच्छे तरीके से कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो रही हैं। ख़ैर, अब देखना होगा कि कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित पुरुषों का महिला हार्मोन्स से जो इलाज किया जा रहा है, उसका कितना सकारात्मक परिणाम निकलता है?