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कोरोना वायरस महामारी संकट के कारण पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों के बेरोज़गार होने का ख़तरा

30 Apr 2020

चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती के कारण करोड़ों लोगों के सामने खड़ी हुई दो वक़्त के खाने की परेशानी

APRIL 30 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी मानव सभ्यता के अस्तित्व के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,28,251 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका जैसी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में कोरोना वायरस के कारण अभी तक सबसे ज़्यादा क़रीब 61,669 लोग मारे जा चुके हैं।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस बीमारी संक्रमण की बीमारी है। इसी कारण से कि कोरोना वायरस संक्रमण ना फैले, अधिकांश देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। स्वाभाविक है कि लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। होटेल्स, पर्यटन और एयरलायंस जैसी कंपनियों को लॉकडाउन के दौरान सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, उद्योगों और आईटी कंपनियों को भी लॉकडाउन के कारण हानि होती जा रही है। लेकिन इस सबके कारण, पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों के बेरोज़गार होने का ख़तरा मंडराने लगा है।

जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ की श्रम इकाई अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन ने कोरोना वायरस महामारी संकट के कारण आशंका जताई है कि अप्रैल से जून के दौरान, सिर्फ़ तीन महीने में ही क़रीब 30.5 करोड़ लोगों की पूर्णकालिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं।

बता दें कि संगठन ने पिछले पूर्वानुमान में आशंका जताई थी कि इस महामारी के कारण जून तिमाही में हर सप्ताह औसतन 48 घंटे के वर्किंग पीरियड में 19.5 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों का नुकसान हो सकता है। इस बारे में संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन जारी है और इसे आगे भी बढ़ाया जाने के आसार भी हैं। ऐसे में पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की पूर्णकालिक नौकरी जा सकती है।

संगठन ने आंकड़ों के आधार पर कहा है कि इस महामारी के कारण अनौपचारिक क्षेत्र के 1.6 अरब श्रमिकों की नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो करोड़ों लोगों के सामने दो वक़्त के खाने की मुसीबत खड़ी हो जाएगी। और जब तक कोरोना वायरस महामारी का अंत होगा, तब तक करोड़ों लोग मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर हो चुके होंगे।

कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से दुनिया का कोई भी देश नहीं बचा है। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका से लेकर अफ्रीका के ग़रीब देशों तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का क़हर हर कहीं देखा जा रहा है। जहां तक अमेरिका की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान, अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर निगिटेव हो गई है। जी हां, अमेरिका में फ़िलहाल GDP ग्रोथ रेट -4.8 प्रतिशत पर आ गई है।

ख़ुद IMF (International Monterey Fund) यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरी दुनिया को 1930 के दशक की महामंदी के तरह की भयावह आर्थिक परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, लॉकडाउन जारी रहने के कारण दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्था के अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े और भी ज़्यादा ख़राब हो सकते है। 

हालांकि, जहां तक भारत की बात है, तो भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का क़हर दुनिया के अन्य देशों से तुलनात्मक रूप से कम है। कोरोना वायरस संक्रमण पर काफ़ी हद तक नियंत्रण होने के कारण भारत में लॉकडाउन के दौरान आंशिक छूट मिलने के बाद बेरोज़गारी दर में गिरावट आई है। कुछ जगहों पर नियंत्रित कारोबार और रबी की फसल कटाई के बाद ग्रामीण इलाक़ों में आर्थिक गतिविधियों के गति पकड़ने से 26 अप्रैल को समाप्त हुई तिमाही में बेरोज़गारी दर में कमी दर्ज़ की गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 26 अप्रैल को समाप्त तिमाही के दौरान, भारत में बेरोज़गारी दर गिरावट 21.05 प्रतिशत रही। इसके पहले 19 अप्रैल तक यह 26.19 प्रतिशत थी। अब देखना होगा कि कोरोना वायरस महामारी पर कब तक नियंत्रण हासिल हो पाता है, और आर्थिक गतिविधियां एक बार फिर से कब तक गति पकड़ पाती हैं। लेकिन जब तक ऐसा होगा, तब तक पूरी दुनिया में करोड़ों लोग बेरीज़गार हो चुके होंगे।