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लॉकडाउन के कारण अप्रैल के महीने में दर्ज़ की गई ऐतिहासिक आर्थिक गिरावट

04 May 2020

डिमांड और सप्लाई में लॉकडाउन के दौरान आई भारी कमी; PMI रिकॉर्ड गिरावट के साथ 27.4 पर आया

MAY 04 (WTN ) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण पूरी दुनिया थम गई है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण कई देशों में लॉकडाउन है, और स्वाभाविक है कि लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं। जहां तक भारत की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण को फ़ैलने से रोकने के लिए जारी लॉकडाउन से भारत को काफ़ी आर्थिक हानि हो रही है।

ज़मीनी स्तर पर तो लॉकडाउन के कारण कितना आर्थिक नुकसान लोगों को उठाना पड़ रहा है इसका अनुभव तो आपको हो ही गया होगा। अब आपको आंकड़ों के आधार पर बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण देश को कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल अप्रैल में PMI (Purchasing Managers' Index) यानी मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स रिकॉर्ड गिरावट के साथ 27.4 पर आ गया है, जो कि मार्च महीने में 51.8 के स्तर पर था। बता दें कि मार्च 2005 के बाद यह सबसे निचला स्तर है।

दरअसल, PMI का 50 से ऊपर का आंकड़ा आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है, जबकि PMI का 50 से नीचे का आंकड़ा आर्थिक गिरावट को बताता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2005 में मैन्युफैक्चरिंग PMI की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद 15 साल में पहली बार PMI में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज़ की गई है। स्वाभाविक है कि लॉकडाउन के कारण देश को ऐतिहासिक रूप से आर्थिक गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में 25 मार्च से जारी लॉकडाउन अभी तक जारी है, जिसके कारण अप्रैल का पूरा महीना लॉकडाउन में निकल गया है। स्वाभाविक है कि अप्रैल के पूरे महीने में आर्थिक गतिविधियां ठप रही हैं, ऐसे में सरकार को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अप्रैल के पूरे महीने में लॉकडाउन के कारण सामानों और सेवाओं की डिमांड अभी तक सबसे कम रही है। कारखाने, फैक्ट्री और कारोबार ठप रहने से करोड़ों लोगों की नौकरियों पर ख़तरा मंडरा रहा है और यह लोग बेरोज़गार होने की कगार पर आ गए हैं।

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान इनपुट कॉस्ट और आउटपुट प्राइस दोनों कम हुए हैं क्योंकि सप्लायर्स और मैन्युफैक्चर्रस ऑर्डर लेने के लिए डिस्काउंट दे रहे हैं। हालांकि, भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालत मार्च में अपेक्षाकृत रूप से बेहतर थी। लेकिन अप्रैल के महीने में इस पर लॉकडाउन का बुरा असर देखने को मिला। लॉकडाउन के कारण अप्रैल के महीने में उत्पादन, नए ऑर्डर और रोज़गार में ज़बरदस्त गिरावट दर्ज़ की गई, और इसी कारण से गुड्स और सर्विस की मांग में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज़ की गई है।

दरअसल, पूरी दुनिया चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण मुसीबत का सामना कर रही है। चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण अभी तक पूरी दुनिया में 2,48,655 लोगों की मौत हो चुकी है। पूरी दुनिया की आर्थिक गतिविधियों पर इस समय रोक लगी हुई है। ऐसे में तेज़ी से विकास करती भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश को काफ़ी बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब जबकि लॉकडाउन के तीसरे चरण में कुछ आर्थिक गतिविधियों को छूट मिल गई है, ऐसे में आशा की जा सकती है कि बदहाल हो चुकी देश की अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा मिलेगा।