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वैज्ञानिकों का दावा; कोरोना वायरस को शरीर में फैलने से रोकने वाले एंटीबॉडी का परीक्षण सफल

05 May 2020

वैज्ञानिकों ने खोजी कोरोना वायरस की एंटीबॉडी; क्लीनिकल ट्रायल सफल होने की उम्मीद

MAY 05 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी से 200 से ज़्यादा देशों के क़रीब 36,46,211 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,52,407 लोगों की मौत हो चुकी है। साफ़ है कि चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैल गया।

कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन और दवा की खोज में चिकित्सक और वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है। लेकिन इस सबके बीच, एक बड़ी राहत देने वाली ख़बर आई है। दरअसल, वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने ऐसी एंटीबॉडी को खोजा है, जो कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) को शरीर में शरीर में फैलने से रोक देगी। इस एंटीबॉडी की खोज के बाद अब वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे जल्द ही कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के इलाज के लिए एक बेहतर वैक्सीन बना पाएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों की इस टीम का नेतृत्व यूट्रेच विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेरेंड-जेन बॉश कर रहे हैं। रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की एंटीबॉडी कोरोना वायरस से चिपक कर उसकी बाहरी कंटीली परत को तोड़कर उसे निष्क्रिय कर देती है। वैज्ञानिकों ने इस एंटीबॉडी का नाम 47D11 रखा है। कहा जा सकता है कि इस एंटीबॉडी की खोज के साथ ही वैज्ञानिकों को आशा है कि अब कोरोना वायरस को शरीर में ही निष्क्रिय किया जा सकेगा, जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक न फैल सके। वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इस एंटीबॉडी का परीक्षण चूहों पर सफल रहा है।

बता दें कि यूरोप के वैज्ञानिकों ने चूहों में पाए जाने वाली 51 सेल लाइंस कोशिकाओं में इस एंटीबॉडी को खोजा है। इसके बाद इसे मनुष्यों के लायक बनाने के लिए जेनेटिकली इंजीनियर किया गया है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस एंटीबॉडी का परीक्षण साल 2003 में फैले सार्स कोरोना वायरस पर किया। 2003 के सार्स कोरोना वायरस पर जब वैज्ञानिकों ने इसका परीक्षण किया, तो 2003 के सार्स कोरोना वायरस को इस एंटीबॉडी ने निष्क्रिय कर दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार, COVID-19 में भी सार्स कोरोना वायरस के परिवार का वायरस है। ऐसे में यह एंटीबॉडी उसे भी कमज़ोर कर ख़त्म करने में सफल हो सकता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक़, यदि इस एंटीबॉडी के कारण अगर मनुष्यों के शरीर में कोरोना वायरस फैलने से नहीं रुकता है, तो भी इस एंटीबॉडी से कोरोना वायरस को मनुष्यों के शरीर में फैलने में काफ़ी ज़्यादा वक़्त लग जाएगा, और COVID-19 का वायरस शरीर में ही कमज़ोर हो जाएगा।

बता दें कि इस परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने सबसे पहले लैब में चूहे को कोरोना वायरस से संक्रमित कराया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने देखा कि कोरोना वायरस ने जैसे ही चूहे के शरीर में प्रवेश किया, चूहे के शरीर के अंदर 51 तरह के एंटीबॉडी निकलने शुरू हो गए और इसी एंटीबॉडी में मौजूद थी 47D11 एंटीबॉडी जो कि वकोरोना वायरस की बाहरी परत को नष्ट कर रही थी।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस का आकार गोल होता है। कोरोना वायरस के चारों तरफ़ S-2 नाम के प्रोटीन की कंटीला लेयर होती है। यही कंटीली लेयर ही मनुष्यों के शरीर की कोशिकाओं से चिपक जाती है और इसके बाद यह मनुष्य शरीर की कोशिकाओं की बाहरी लेयर को गलाकर उसके अंदर अपना जींस छोड़ देती है। अब कोशिकाओं में जींस छोड़ने के बाद कोरोना वायरस कोशिकाओं को खाकर अपनी संख्या बढ़ाना शुरू करता है। इसीलिए वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबॉडी खोजी है जो कोरोना वायरस की बाहरी कंटीले लेयर से चिपक कर उसे नष्ट कर देगी।

इधर, रीडिंग यूनिवर्सिटी के सेल्यूलर माइक्रोबॉयोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. सिमोन क्लार्क का कहना है कि जब कोरोना वायरस को मनुष्यों के शरीर में प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा, तो इसके बाद यह वायरस मनुष्य के शरीर में कुछ नहीं कर पाएगा। प्रो. सिमोन के अनुसार, यह एंटीबॉडी वायरस के ऊपर हमला कर उसके ऊपर चिपक जाता है। ऐसा होने से या तो वायरस मारा जाता है या फिर शरीर की कोशिकाओं पर पूरी ताक़त से हमला नहीं कर पाता है।

हालांकि, वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए कोरोना वायरस के एंटीबॉडी का क्लीनिकल ट्रायल होना अभी बाक़ी है। क्लीनिकल ट्रायल के सफल होने के बाद ही पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस का जल्द ख़ात्मा होगा। वैसे अभी तक के 
47D11 एंटीबॉडी के सारे परीक्षण और नतीजे सकारात्मक रहे हैं। ऐसे में अब आशा और दुआ की जा सकती है इसका क्लीनिकल ट्रायल सफल हो जिससे पूरी दुनिया को कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से मुक्ति मिले।