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जल्द भारत को करना पड़ सकता है अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना

18 May 2020

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की GDP ग्रोथ रेट में भारी गिरावट की आशंका

MAY 18 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में 25 मार्च से ही लगातार लॉकडाउन जारी है। स्वाभाविक है कि लॉकडाउन के कारण पूरे देश में आर्थिक गतिविधियों पर लम्बा ब्रेक सा लग गया।है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत को लॉकडाउन के कारण अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रसिद्ध ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) ने आशंका जताई है कि लॉकडाउन के कारण भारत को अब तक की सबसे भीषण मंदी के दौर से गुजरेगा पड़ सकता है। गोल्डमैन सैश के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ में पहले के अनुमान 20% की तुलना में 45% की गिरावट आएगी। लेकिन वहीं, तीसरी तिमाही में 20% की मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है।

वहीं, गोल्डमैन सैश ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और अगले वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के लिए विकास दर का अनुमान क्रमशः 14% और 6.5% पर बरकरार रखा है।

बता दें कि गोल्डमैन सैश की इकोनॉमिस्ट प्राची मिश्रा और एंड्रयू टिल्टन ने 17 मई को अपने एक नोट में लिखा है, "इन अनुमानों का मतलब यह है कि वित्त वर्ष 2020-2021 में रियल जीडीपी में क़रीब 5% की गिरावट आ सकती है और यह मंदी ऐसी होगी जिसका सामना भारत ने अब तक नहीं किया होगा।"

गोल्डमैन सैश के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, "भारत सरकार द्वारा पिछले कुछ दिनों में विभिन्न सेक्टर्स में कई आधारभूत सुधारों की घोषणा की गई है। हो सकता है कि इन सुधारों का असर आने वाले समय में मीडियम टर्म में देखने को मिले। लेकिन इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में इसका कितना तत्काल असर दिखाई देगा?" 

दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भी आर्थिक गतिविधियों को फिर से गति देने के लिए चौथे चरण के लॉकडाउन में कुछ खास क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाबंदियों में और भी ढील देने का ऐलान भारत सरकार ने किया है। वहीं, हाल ही में केन्द्र सरकार ने कोरोना संकट के इस दौर में राहत देने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। बता दें कि यह राहत पैकेज भारत की कुल जीडीपी का क़रीब 10 प्रतिशत है।

अब देखना होगा कि लॉकडाउन में सशर्त छूट और आर्थिक पैकेज मिलने के बाद भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाला देश सम्भावित भीषण आर्थिक मंदी को आने से रोक पाने में सफल हो पाता है कि नहीं। या फिर यदि भीषण आर्थिक मंदी आती भी है तो उसका सामना किस तरह से भारत सरकार कर पाती है?