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जानिए क्यों पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों पर कम हुआ है कोरोना वायरस संक्रमण का असर ?

05 Jun 2020

रिसर्च का दावा: पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग कोरोना वायरस से हुए हैं कम संक्रमित

JUNE 05 ( WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और1 फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी 180 से ज़्यादा देशों के नागरिकों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी आज मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर दुनिया भर में लगातार रिसर्च जारी हैं, और हर रिसर्च में कई तरह की नई-नई बातें सामने आ रही हैं।

इसी कड़ी में एक नए रिसर्च में पता चला है कि समुद्रतल से कम से कम 3,000 मीटर और इससे ज़्यादा ऊंचाई पर रहने वाले लोगों पर कोरोना वायरस संक्रमण का काफी कम असर हुआ है। रिसर्च में पाया गया है कि समुद्रतल से ज़्यादा ऊंचाई पर रहने वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में कम आए हैं। जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग कोरोना वायरस संक्रमण से ज़्यादा संक्रमित हुए हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोधकर्ताओं के मुताबिक़, "पहाड़ी इलाकों में दिन और रात के तापमान में काफी अंतर रहता है। इतना ही नहीं, पहाड़ी इलाकों में हवा भी शुष्‍क होती है। इन्हीं सब कारणों से पहाड़ी इलाकों में किसी भी बीमारी के फैलने की आशंका मैदानी इलाकों की तुलना में काफी कम होती है।"

वहीं, रिसर्च करने वालों के अनुसार, "पहाड़ी इलाकों में सूर्य से आने वाली अल्‍ट्रावायलेट किरणों का स्‍तर भी निचले इलाकों की तुलना में काफी ज्‍यादा रहता है। कोरोना वायरस संक्रमण के पहाड़ी इलाकों में नहीं फैलने का एक बड़ा कारण अल्‍ट्रावायलेट किरणों की तेजी भी हो सकती है।" शोधकर्ताओं का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में तेज अल्‍ट्रावायलेट किरणें प्राकृतिक सैनेटाइजर का काम करती हैं। और इसी कारण से कोरोना वायरस निष्क्रिय होकर संक्रमण नहीं फैला पा रहा है।

इतना ही नहीं, रिसर्च करने वालों के अनुसार, "पहाड़ी इलाकों में हवा का कम दबाव भी कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने में मदद कर रहा है।" रिसर्च करने वालों के अनुसार, "हो सकता है कि पहाड़ी इलाकों में ऑक्सीजन की कमी शरीर में ACE2 रिसेप्टर्स पर असर डाल रही हो और इसी कारण से इन इलाकों में कोरोनो वायरस संक्रमण कम फैल रहा है।" आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ACE2 रिसेप्टर्स के ज़रिए ही कोरोना वायरस शरीर में घुसकर कोशिकाओं पर हमला करता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, "पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों में ऑक्‍सीजन की कमी के कारण हाइपॉक्सिया या रक्‍त में ऑक्‍सीजन की कमी से लड़ने की क्षमता अपने आप ही विकसित हो जाती है।" वहीं, डॉक्टर्स के अनुसार, "पहाड़ी इलाक़ों में रहने वाले लोग एक्‍यूट रेस्पिरेटरी डिस्‍ट्रेस सिंड्रोम से आमतौर पर बचे रहते हैं। और इसी कारण से कोरोना वायरस संक्रमण से यह लोग काफी हद तक बचे हुए हैं।" 

रिसर्च करने वालों ने यह सभी आंकड़े नेपाल, उत्तराखंड, तिब्बत, चीन के चिंघाई और सिचुआन, बोलीविया, पेरू और इक्वाडोर आदि के पहाड़ी इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण पर शोध करने के बाद जुटाए हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्‍ययन के बाद दावा किया है कि पहाड़ी इलाकों में बसे इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की गति बहुत कम है। वहीं, यदि इन इलाकों में यदि कोरोना वायरस संक्रमण थोड़ा बहुत फैला भी है, तो वहां पर कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्‍यु दर काफी कम है।