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अब नेपाल को 'धोखा' दे रही चीन की वामपंथी सरकार

24 Jun 2020

नेपाल की ज़मीन पर सुनियोजित तरीक़े से 'कब्ज़ा' कर रही चीन की वामपंथी सरकार

JUNE 24 (WTN) -  चीन की वामपंथी सरकार अपनी विस्तारवादी मानसिकता के लिए पूरी दुनिया में बदनाम है। चीन के जितने भी पड़ोसी देश हैं, लगभग इन सभी देशों के साथ चीन का सीमा विवाद है। इधर जैसा कि आप जानते ही हैं कि नेपाल की वामपंथी सरकार चीन की वामपंथी सरकार के इशारे पर ग़लत नक्शे के द्वारा भारत के साथ सीमा विवाद बढ़ा रही है। लेकिन उसी नेपाल की ज़मीन पर चीन की वामपंथी सरकार कब्ज़ा कर रही है।

जी हां, भारत को दरकिनार करते हुए चीन को खुश करने में लगी नेपाल की वामपंथी सरकार के सामने चीन की विस्तारवादी नीति एक बड़ी चुनौती बन गई है। दरअसल, नेपाल की सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें चीन को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि तिब्बत में सड़क निर्माण के बहाने चीन नेपाली जमीन पर अतिक्रमण करने में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह आशंका भी ज़ाहिर की गई है कि चीन नेपाल के इन इलाकों में सैन्य चौकियां भी बना सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वे विभाग ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में नेपाल की अतिक्रमण कर ली गई 11 जगहों की एक सूची है, और इनमें 10 जगहों पर चीन ने अतिक्रमण किया हुआ है। नेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वे विभाग के अनुसार, नदियों के बहाव को मोड़कर नेपाल-चीन की प्राकृतिक सीमा को बदलने की कोशिश चीन की सरकार कर रही है।

रिपोर्ट में एक साफ कहा गया है कि चीन की सरकार कथित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में सड़क नेटवर्क का विस्तार कर रही है, जिसके कारण से कई नदियों और सहायक नदियों का रास्ता बदल गया है। और यह नदियां अब नेपाल की तरफ बहने लगी हैं। इस नदियों और सहायक नदियों के नेपाल की तरफ बहने से नेपाली भू-भाग घटता जा रहा है। और यही ऐसा ही होता रहा, तो नेपाल का अधिकतर हिस्सा कथित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में चला जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सड़क निर्माण के कारण बागडारे खोला नदी और करनाली नदी ने अपना रास्ता बदल लिया। और इसी कारण से नेपाल के हुमला ज़िले में 10 हेक्टेयर जमीन पर चीन का अतिक्रमण हो गया है। वहीं, तिब्बत में निर्माण कार्य से सिनजेन, भुरजुक और जम्बू-खोला नदियां अपना रास्ता बदल गई हैं, और इसी कारण से नेपाल के रासुवा ज़िले में 6 हेक्टेयर ज़मीन पर भी चीन का कब्जा हो गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन पहले ही नेपाल की 11 हेक्टेयर ज़मीन पर दावा कर चुका है। दरअसल, चीन ने पहले ही सिंधुपालचौक ज़िले में खोला और भोटे कोसी नदियों का बहाव मोड़ दिया है और अब इन इलाकों को वो तिब्बत का हिस्सा बताता है।

इतना ही नहीं, तिब्बत में चीन के निर्माण कार्य के कारण सुमजंग, काम खोला और अरुण नदियों के बहाव की दिशा भी बदल गई है और यहां भी नेपाल की 9 हेक्टेयर ज़मीन पर चीन ने अतिक्रमण कर लिया है।

रिपोर्ट में साफ-साफ आशंका ज़ाहिर की गई है कि अगर चीन की कारस्तानी के कारण इसी तरह से नदियों का रास्ता बदला जाता रहा, तो नेपाल का एक बड़ा भू-भाग घटता जाएगा और तिब्बत में हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन चली जाएगी। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी आशंका ज़ाहिर की गई है कि चीन इन इलाकों में बॉर्डर ऑब्जर्वेशन पोस्ट भी बना सकता है। 

ज़ाहिर है कि चीन की वामपंथी सरकार के कुटिल चाल में नेपाल भी फंस चुका है। और भारत को दरकिनार कर चीन की वामपंथी सरकार के क़रीब आने की सज़ा एक न एक दिन नेपाल को भुगतना ही पड़ेगा।