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उइगर मुस्लिमों के 'जनसांख्यिकीय नरसंरहार' में लगी चीन की वामपंथी सरकार!

29 Jun 2020

चीन में उइगर मुस्लिमों पर हुई ज़ुल्म की इंतेहा

JUNE 29 (WTN) - यदि आपको इतिहास में रुचि है, तो साल 1989 में चीन की क्रूर वामपंथी सरकार ने लोकतंत्र की मांग कर रहे अपने ही देश के युवाओं के साथ किस तरह का हिंसक बर्ताव किया था यह तो आप जानते ही होंगे। वर्ष 1989 में चीन में लोकतंत्र की मांग के आंदोलन को चीन की वामपंथी सरकार ने काफी बरबरता से कुचला था। कहा जाता है कि बीजिंग के थियानमेन स्क्वायर पर ही चीनी सेना ने आन्दोलन कर रहे क़रीब दस हज़ार लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

चीन की वामपंथी सरकार अपनी अमानवीय करतूतों के लिए पूरी दुनिया में बदनाम है। लेकिन इसका कोई भी असर वहां की सरकार को नहीं पड़ता है क्योंकि चीन में अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं है, और कोई भी सरकार के ख़िलाफ़ न बोल सकता है और न लिख सकता है, इसी कारण से चीन में अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों पर लगातार अत्याचार किए जा रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने मुस्लिमों की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर एक क्रूर और अमानवीय अभियान चलाया जा रहा है।  इस अभियान के तहत सिर्फ उइगर समुदाय के पुरुषों और महिलाओं की ज़बरदस्ती नसबंदी की जा रही है बल्कि उन्हें बच्चे पैदा करने से भी रोका जा रहा है। एक तरफ चीन की वामपंथी सरकार उइगर मुस्लिमों को बच्चे पैदा करने से रोक रही है, तो वहीं बहुसंख्यकों हान वंश के लोगों को ज़्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बता दें कि सरकारी आंकड़ों, शिनजियांग राज्य के डॉक्युमेंट्स तथा निरोध केन्द्र में पूर्व में रखे गए 30 लोगों और उनके परिवार के सदस्यों और निरोध केन्द्र के पूर्व प्रबंधक के साक्षात्कारों पर आधारित एक जांच के अनुसार, शिनजियांग राज्य के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में पिछले चार साल से एक 'जनसांख्यिकीय नरसंरहार' हो रहा है जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बच्चे पैदा करने ने जबरन रोका जा रहा है।

जी हां, अल्पसंख्यक समुदाय की लाखों महिलाओं को नियमित तौर पर गर्भावस्था जांच कराने को कहा जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्हें IUD लगवाने के अलावा नसबंदी करवाने और गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया जाता है। शिनजियांग राज्य में जनसंख्या नियंत्रण के इन उपायों को ज़ोर ज़बरदस्ती के साथ अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

वहीं, ऐसा न करने वालों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लिया जा रहा है, और जनसंख्या नियंत्रण के आदेश न मानने पर उन्हें निरोध केन्द्र में भेजे जाने की धमकी दी जाती है। साथ ही यहां पर जन्म दर पर काबू पाने में विफल रहने पर बाकायदा सज़ा का भी प्रावधान है।

निरोध केन्द्र में उन लोगों को ज़्यादातर रखा जाता है जिनके तीन या उससे ज़्यादा बच्चे हैं। उन्हें उनके परिवार से तब तक अलग निरोध केन्द्र में रखा जाता है जब तक कि वे बड़ा ज़ुर्माना नहीं भर देते हैं। इतना ही नहीं, पुलिस छिपे हुए बच्चों की तलाश के लिए घरों में छापा तक मारती है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन की वामपंथी सरकार सवालों से घबराती है क्योंकि चीन में सब कुछ तानाशाही पूर्ण तरीके से वहां की सरकार काम करती है। माना कि चीन की जनता अपनी सरकार से डरकर सवाल नहीं कर पाती है, लेकिन जब दुनिया के अन्य देश इस बारे में चीन की वामपंथी सरकार से सवाल करते हैं, तो चीन का इस बारे में कहना है कि वो अपने यहां चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जारी जंग की वजह से ऐसा कर रहा है। पकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल कई ऐसी रिपोर्टें आई थीं जिनमें दावा किया गया था कि चीन की वामपंथी सरकार ने आतंकवाद और धार्मिक चरमपंथ से लड़ने के बहाने क़रीब दस लाख उइगर और अन्य तुर्क मुसलमानों को 'यातना शिविरों' में रखा है जहां कथित तौर पर उनका ब्रेन वॉश किया जाता है।

इतना ही नहीं, चीन की वामपंथी सरकार ने कोरोना वायरस पीड़ितों की जान बचाने के  लिए उइगर मुस्लिमों के शरीर के अंग निकालकर कोरोना पीड़ितों का इलाज किया। हालांकि, इन आरोपों का चीनी सरकार ने खण्डन किया है। वैसे तो चीन में घटने वाली घटनाओं के बारे में कोई भी जानकारी दुनिया को पता नहीं चल पाता है क्योंकि चीन में मीडिया पर पाबंदी है, लेकिन फिर भी चीन की वामपंथी सरकार की बरबरता के बारे में देर से ही सही लेकिन दुनिया को पता चल ही चल जाता है।