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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प के लिए काफी 'निर्णायक' साबित होंगे भारतवंशी मतदाता

20 Jul 2020

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में क़रीब 14 लाख भारतवंशी मतदाताओं पर टिकी निगाहें 

JULY 20 (WTN) - विश्व राजनीति में भारत के लोकसभा चुनाव और अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव काफी चर्चित रहते हैं। दरअसल, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए भारत के लोकसभा चुनाव पर वर्ल्ड मीडिया की काफी दिलचस्पी रहती है। वहीं, विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर दुनिया भर की निगाहें टिकी रहती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से आने वाले 4 सालों के लिए विश्व राजनीति की दशा और दिशा तय होती है।

जहां तक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कोरोना वायरस महामारी से लेकर चीन के साथ ट्रेड वॉर, और ईरान के साथ अमेरिकी संबंधों से लेकर अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत तक के कई मुद्दे असर डालने वाले हैं। इसी कारण से अमेरिकी राजनीति के जानकारों के अनुसार, इस बार के अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को काफी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, अमेरिका नें 3 नवंबर को होने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतवंशी समुदाय पर दोनों प्रमुख पार्टियों रिपब्लिकन और डेमोक्रेट की निगाहें आशा से टिकी हुई हैं। दरअसल, कोरोना वायरस महामारी से निपटने में कथित रूप से असफल रहने, अर्थव्यवस्था में संकट और गिरावट और अश्वेतों के साथ कथित अन्याय के आरोपों के कारण डोनाल्ड ट्रम्प के लिए इस बार का राष्ट्रपति चुनाव कठिन परीक्षा साबित हो सकता है।

इस सबके बीच, माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतवंशी समुदाय एक बड़ा फेरबदल कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का मुकाबला इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी प्रत्याक्षी जो बिडेन से है। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याक्षी हैं।

इधर, अमेरिका के शीर्ष डेमोक्रेटिक नेता थॉमस पेरेज का कहना है कि साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 77% भारतवंशी समुदाय ने उनकी पार्टी के पक्ष में था। थॉमस का दावा है कि 2016 के चुनाव में 84% भारतीयों ने ट्रम्प का विरोध किया था। वैसे दावा किया जाता है कि 2016 के चुनाव में भारतीयों ने हिलेरी क्लिंटन को वोट दिया था। वहीं, दावा तो यह भी किया जाता है कि 62% भारतवंशी खुद को डेमोक्रटिक बताते हैं।

लेकिन अमेरिकी राजनीति के कुछ जानकारों का कहना है कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय लोगों ने वोटिंग के समय हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ वोट दे दिया था। जानकारों का मानना है कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याक्षी हिलेरी क्लिंटन के पाकिस्तान पक्ष में झुकाव और उनकी टीम में कुछ लोगों के पाकिस्तान के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर से काफी बड़ी संख्या में ऐन वक़्त पर भारतवंशी लोगों ने हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ वोटिंग की थी।

जहां तक इस बार अमेरिकी चुनाव की बात है, तो एक सर्वे के मुताबिक़ भारतवंशी लोगों के बीच इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी की पकड़ कम हुई है। वैसे इस समय अमेरिका में जो 5 भारतवंशी, अमेरिकी सांसद हैं वे डेमोक्रेटिक पार्टी के ही सदस्य हैं। लेकिन सर्वे के अनुसार, हिलेरी क्लिंटन की तुलना में जो बिडेन के पक्ष में भारतवंशी समुदाय कम है। बता दें कि अमेरिका के कई प्रांतों में भारतवंशी समुदाय बड़ी तादात में रहता है और यह समुदाय इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में काफी बड़ा फेरबदल कर सकता है। यही कारण है कि दोनों ही पार्टियां, रिपब्लिकन पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी भारतवंशी लोगों के वोट पाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं। और ऐसी नीतियां बनाने का वादा कर रही जिससे भारतवंशी लोगों को फायदा हो सके।

लेकिन जहां तक डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में भारत वंशी लोगों के जाने की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प की बहुत सी नीतियां अप्रवासी भारतीय विरोधी रही हैं। ऐसे में भारतीयों का ट्रम्प को इस ज़्यादा वोट करना मुश्किल लगता है। दरअसल, ट्रम्प हमेशा से ही अप्रवासियों के ख़िलाफ़ सख्त नीति बनाने की बात करते हैं और उस पर अमल भी करते रहे हैं। वहीं, आव्रजन पर ट्रम्प की नीतियां उच्च शिक्षित पेशेवर भारतीय अमेरिकियों के हितों के ख़िलाफ़ रही हैं। 

ट्रम्प के ख़िलाफ़ भारत वंशी लोगों के नाराज़ होने की बड़ी वजह ट्रम्प प्रशासन द्वारा एच-1बी वीसा की संख्या सीमित करना है। इतना ही नहीं, ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीसा पाने वालों के जीवनसाथी के वर्क परमिट को भी रद्द करने की इच्छा ज़ाहिर की है जिसका भी काफी विरोध देखा जा रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के 8 राज्यों में क़रीब 14 लाख भारतवंशी मतदाता हैं। अमेरिका में 8 राज्यों टेक्सास, फ्लोरिडा, पेन्सिलवेनिया, जॉर्जिया, नार्थ कैरोलिना, मिशिगन और विस्कॉन्सिन में हज़ारों की तादात में भारतवंशी मतदाता हैं जो कि हर बार की तरह इस बार भी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में काफी कुछ निर्णायक साबित हो सकते हैं। अब जबकि डोनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच काफी अच्छी ट्यूनिंग है, और प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, तो ऐसे में देखना होगा कि क्या इस समीकरण से ट्रम्प को राष्ट्रपति चुनाव में भारत वंशी लोगों का कितना समर्थन मिल पाता है?