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आधार कार्ड की सूचनाओं में सेंध लगाना अब पड़ेगा ‘भारी’, हो सकती है 10 साल तक की जेल

18 Dec 2018
‘अपनी इच्छा’ से मोबाइल सिम और बैंक अकाउंट को आधार से करा सकेंगे लिंक
 
DEC 18 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोबाइल कनेक्शन लेने और बैंक खाता खोलने के लिए आधार की अनिवार्यिता खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को चिंता थी कि मोबाइल नम्बर लेने और बैंकों में खाता खुलवाते समय शातिर लोग हेराफेरा कर फर्जी और जाली प्रमाण पत्र लगा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार आधार कानून में बड़ा संशोधन करने जा रही है। इससे मोबाइल की सिम और बैंक अकाउंट आधार से ग्राहक की मर्जी से लिंक हो सकेंगे।
 
जानकारी के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट के आधार कार्ड पर हाल के फैसले के बाद ये ज़रूरी हो गया था क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 57 को निरस्त कर दिया था। यह धारा सिम तथा बैंक खाता के साथ आधार को जोड़ना अनिवार्य बनाती थी। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने मोबाइल नम्बर और बैंक खातों को जैविक पहचान वाले आधार कार्ड से स्वैच्छिक रूप से जोड़ने को क़ानूनी जामा पहनाने की पहल की है। इसके तहत आधार से सम्बन्धित दो क़ानूनों में संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाने के प्रस्तावों को सोमवार तो मंजूरी दी गयी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके तहत टेलीग्राफ अधिनियम को संशोधित किया जा रहा है। ऐसा करने से आधार के ज़रिये सिमकार्ड जारी करने को वैधानिक समर्थन मिलेगा। इतना ही नहीं, मनी लांडरिंग रोकथाम अधिनियम में संशोधन से बैंक खातों से आधार को जोड़ने का रास्ता खुल जाएगा। आधार कार्ड की सूचनाएं सुरक्षित रहे इसलिए सरकार ने आधार की सूचनाओं में सेंध लगाने की कोशिश पर 10 साल तक की जेल का प्रस्ताव दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी इसके लिये तीन साल की जेल का प्रावधान है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इसमें परिजनों द्वारा आधार पंजीयन कराये गये बच्चों के पास 18 साल के हो जाने के बाद आधार के डेटाबेस से अपनी सूचनाएं हटवाने की सुविधा का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा क्यूआर कोड के जरिए भी वैरिफिकेशन हो सकेगा। वहीं प्रावधान किया जा रहा है कि सिविल मुकदमें में 1 करोड़ रुपए तक की पेनल्टी लगाई जा सकेगी।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डल ने टेलीग्राफ अधिनियम और मनी लांडरिंग रोकथाम अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्तावित विधेयकों के मसौदों को मंजूरी दे दी है। कहा जा रहा है कि यह फ़ैसला निजी कम्पनियों को ग्राहकों के सत्यापन के लिए जैविक पहचान वाले आधार के इस्तेमाल पर सितम्बर में उच्चतम न्यायालय की रोक के बाद लिया गया है। अब केवाईसी के दस्तावेज के रूप में आधार का इस्तेमाल करने वाली निजी कम्पनियों को आधार से सम्बन्धित सूचनाओं की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करनी होगी।
 
कहा जा रहा है कि इन दोनों अधिनियमों को संशोधित किया जाएगा ताक़ि नया मोबाइल नम्बर लेने या बैंक खाता खोलने के लिये ग्राहक स्वेच्छा से 12 अंकों वाली आधार संख्या को साझा कर सकें। ऐसा करने से मोबाइल नम्बर लेने और बैंक खाता खोलते समय उपभोक्ता अपने आधार की जानकारी की सुरक्षा का भरोसा होने पर स्वेच्छा से मोबाइल नम्बर लेते समय और बैंक में खाता खुलवाते समय आधार कार्ड नम्बर दे सकेगा।