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लोकसभा चुनाव: बिहार में एनडीए गठबंधन के लिए भाजपा लाई 20-20 फार्मूला

30 Aug 2018
भाजपा से शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद का टिकट कटना तय, जेडीयू को मिल सकती हैं 12 सीटें
 
AUG 30 (WTN) – लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एनडीए में सीटों के बंटवारे के लिए उठापटक का दौर जारी है। समय-समय पर जेडीयू की तरफ से बयान आते रहे हैं कि बिहार में बड़ा भाई होने का कारण उसे ज़्यादा सीटें मिलना चाहिए। इस पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता था। लेकिन अब मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने बिहार में सीटों के बंटवारे का फार्मूला तैयार कर लिया है।
 
जानकारी के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 20-20 का फार्मूला तैयार किया है। भाजपा ने जो फार्मूला तैयार किया है उसके मुताबिक बिहार की 40 में से 20 सीटों पर भाजपा खुद चुनाव लड़ेगी। अभी भाजपा के पास बिहार में 22 सांसद हैं। कहा जा रहा है कि बाकी बची 20 सीटों में से 12 सीटें जेडीयू को भाजपा दे सकती है। इस समय जेडीयू के पास बिहार में दो सांसद हैं।
 
खुद के पास 20 सीटें रखने और जेडीयू को 12 सीटें देने के बाद बाकी बचीं 8 सीटों में से पांच सीटें रामविलास पासवान की एलजेपी यानि कि लोक जनशक्ति पार्टी को देने का फार्मूला सामने आया है। एलजेपी ने 2014 के चुनाव में 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। फिलहाल एलजेपी के पास 6 सांसद हैं।
 
वहीं यदि उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी यानि कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी अगर एनडीए के साथ रहती है, तो उन्‍हें 2 सीटें मिलेंगी। आरएलएसपी से निलम्बित सांसद अरुण कुमार भी एनडीए से ही चुनाव लड़ेंगे।
 
लेकिन यह जितना आसान लग रहा है उतना आसान नहीं है। जेडीयू 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के लिए 2009 के चुनावी फॉर्मूले को अपनाने पर जोर दे रही है, उस दौरान दोनों पार्टियां साथ थीं। 2009 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने 40 में से 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था। अब यदि भाजपा का 20-20 का फॉर्मूला तय हो जाता है तो इन परिस्थितियों में भाजपा से कम सीटों पर जेडीयू को चुनाव लड़ना पड़ेगा, जिससे बिहार में उसकी कथित बड़े भाई की छवि को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही इससे नीतीश कुमार की छवि पर भी सवालिया निशान लगेंगे।
 
अब यदि भाजपा के इस फॉर्मूले पर विस्तार से विचार करें तो इसमें भाजपा की सोची समझी रणनीति है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बिहार की 40 में से 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2019 के चुनाव के लिए भाजपा एनडीए गठबंधन के लिए दो सीटें छोड़ने के बाद 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
 
जो दो सीटें भाजपा जेडीयू के लिए छोड़ने का बात कह रही है उसमें से एक सीट है पटना साहिब की, जहां से शत्रुघ्न सिन्हा जीते थे और दूसरी सीट दरभंगा से है जहां से कीर्ति आजाद सांसद हैं। हालिया वर्षों में ये दोनों ही नेता भाजपा से नाराज़ चल रहे हैं और समय-समय पर बगावती तेवर अपनाते हुए पार्टी विरोधी बयान भी दे चुके हैं। यह लगभग तय है कि इन दोनों ही नेताओं को पार्टी टिकट नहीं देगी। ऐसे में ये दोनों सीटों भाजपा जेडीयू के लिए छोड़ सकती है।
 
वहीं कहा जा रहा कि उपेन्द्र कुशवाहा ज़्यादा सीटों की डिमाण्ड कर सकते हैं। कहा यह भी जा रह है कि उपेन्द्र कुशवाहा कांग्रेस-आरजेडी के महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इन सीटों पर भी भाजपा जेडीयू को मौका दे सकती है। खैर यह तो समय ही बताएगा कि बिहार में एनडीए में सीटों के बंटवारे का कौन सा फार्मूला अपनाया जाता है। लेकिन इतना तो तय है कि शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को छोड़कर बाकी बची 20 सीटों पर शायद ही भाजपा कोई समझौता करे क्योंकि ये वो सीटें हैं जहां पर 2014 में भाजपा ने जीत हासिल की है।