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राहुल गांधी का ‘टारगेट 2019’, राफेल पर बनाई ‘रणनीति’

12 Sep 2018
लोकसभा चुनाव में राफेल का ‘फायदा’ उठाने की कवायद, राहुल गांधी ने किया पार्टी नेताओं को ‘सचेत’

SEP 12 (WTN) – 2014 के लोकसभा चुनाव में 44 सीटों पर सिमटी कांग्रेस समझ चुकी है कि बिना भाजपा पर ‘आक्रामक’ हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं की जा सकती है। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मुद्दे पर हर मंच से भाजपा से ‘तीखे’ सवाल करते रहते हैं। राहुल गांधी चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव तक राफेल का मुद्दा जनचर्चा का विषय बन जाए।
 
राहुल गांधी जानते हैं कि मोदी-शाह की जोड़ी को घेरने के लिए ‘रणनीति’ के तहत ही काम करना होगा, यदि कोई भी गलती हुई तो इसका ‘ख़ामियाज़ा’ कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। ऐसे में राफेल मुद्दे पर आक्रामक होने के साथ-साथ राहुल गांधी ने इस पर ‘सतर्कता’ बरतनी भी शुरू कर दी है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के वकील नेताओं को साफ़ कर दिया है कि वे किसी भी कोर्ट में अनिल अम्बानी ग्रुप का कोई भी मुकदमा ना लड़ें। ऐसा इसलिए क्योंकि राफेल मुद्दे पर राहुल गांधी के ‘निशाने’ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ अनिल अम्बानी भी हैं।  
 
काफ़ी समय से राहुल गांधी और कांग्रेस नेता राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ उद्योगपति अनिल अम्बानी और उनकी कम्पनी पर घोटाले, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते रहे हैं। इसके बाद अनिल अम्बानी और उनकी कम्पनी ने कांग्रेस नेताओं पर करोड़ों का मानहानि का दावा ठोंकते हुए नोटिस भेजा है।
 
राफेल मुद्दे पर राहुल गांधी काफ़ी आक्रामक भी हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ फूंक फूंककर कदम भी रख रखे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, अब राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं में चिंता है कि एक तरफ वो अनिल अम्बानी और उनकी कम्पनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं,  और दूसरी तरफ़ कहीं ऐसा ना हो कि पार्टी का कोई बड़ा वकील अनिल अम्बानी ग्रुप के पक्ष में कोई केस लड़ता पाया जाए। क्योंकि यदि ऐसा होता है तो इससे बड़े पैमाने पर पार्टी की किरकिरी होना स्वाभाविक है।
 
जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी के सभी नामी-गिरामी वकीलों को इस बारे में सचेत कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़ा कोई भी वकील अनिल अम्बानी के ग्रुप के पक्ष में कोई भी केस ना लड़े। कुल मिलाकर राफेल के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी की ज़रा सी भी किरकिरी ना हो और किसी भी तरह की सियासी असहजता न हो इसलिए राहुल गांधी हर कदम काफ़ी सोच समझकर उठा रहे हैं।
 
कहा जा सकता है कि जिस तरह से राहुल गांधी राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अनिल अम्बानी को घेर रहे हैं उससे वो पीछे हटने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी की यह रणनीति है कि लोकसभा चुनाव तक राफेल के मुद्दे पर जोरदार आक्रामक रुख अपनाया जाए जिससे भाजपा जनता के सामने जवाब देने में असहज हो जाए। अब देखना होगा कि राहुल गांधी की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।